योग सरकार की नई पहल: यूपी में गांवों की सड़कें अब देंगी एक्सप्रेस—वे को टक्कर…लोहालाट तकनीक से बनेंगी मजबूत सड़कें…

Yogi government new initiative Village roads

योग सरकार की नई पहल: यूपी में गांवों की सड़कें अब देंगी एक्सप्रेस—वे को टक्कर…लोहालाट तकनीक से बनेंगी मजबूत सड़कें…

उत्तर प्रदेश में अब ग्रामीण इलाकों की सड़कें भी यमुना एक्सप्रेसवे, ताज एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसी मजबूत और टिकाऊ बनने जा रही हैं। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (सीआरआरआई) ने एक नई तकनीक एमएसएस+ विकसित की है। जिसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत लागू किया जाएगा। इस तकनीक से बनी सड़कें न केवल टिकाऊ होंगी, बल्कि सभी मौसमों में आसानी से बनाई जा सकेंगी।

प्रयागराज से गोंडा तक बदलेगा सड़क का चेहरा

इस योजना के तहत प्रयागराज, लखनऊ, रायबरेली, सुल्तानपुर, गोंडा और बाराबंकी जिलों में लगभग 202 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण इस साल किया जाएगा। एमएसएस+ तकनीक के जरिए इन सड़कों को लोहालाट बनाया जाएगा, यानी मजबूती के मामले में ये ग्रामीण सड़कें एक्सप्रेसवे को टक्कर देंगी।

गोंडा में तकनीक का प्रदर्शन

भारत सरकार के वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग की सचिव एवं सीएसआईआर महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने गोंडा जिले में एमएसएस+ तकनीक से बनी मानकपुर नवाबगंज मार्ग से बक्सरा वाया अम्बरपुर मार्ग का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने सड़क की गुणवत्ता की सराहना की और कहा कि यह तकनीक पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है।

गर्म करने की जरूरत नहीं, सभी मौसम में संभव निर्माण

सीआरआरआई के निदेशक डॉ. मनोरंजन परिड़ा के अनुसार, एमएसएस+ तकनीक में गिट्टी और बिटुमिन को गर्म करने की आवश्यकता नहीं होती। इस वजह से सड़क निर्माण बरसात, सर्दी या गर्मी—किसी भी मौसम में संभव हो जाता है। हॉट मिक्स से बनी सड़क की तुलना में यह तकनीक ज्यादा मजबूत और टिकाऊ सड़क प्रदान करती है।

2022 में हुआ था पहला प्रयोग

इस तकनीक के शोधकर्ता वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक सतीश पांडे ने बताया कि इसे विकसित करने में करीब दो साल का समय लगा और इसे जेएमवीडी इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर तैयार किया गया। पहला प्रयोग 2022 में लखनऊ के पास किया गया था और आज, तीन साल बाद भी सड़क की हालत बेहतरीन है। इसी सफलता के बाद इसे बड़े पैमाने पर अपनाने का निर्णय लिया गया।

कार्बन उत्सर्जन में कमी और ग्रीन स्ट्रक्चर को बढ़ावा

डॉ. कलैसेल्वी ने बताया कि एमएसएस+ तकनीक से सड़क निर्माण के दौरान कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आती है। यह संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के तहत ग्रीन स्ट्रक्चर निर्माण की दिशा में एक अहम कदम है। पीएमजीएसवाई के तहत इस तकनीक का उपयोग न केवल सड़क की मजबूती बढ़ाएगा, बल्कि ग्रामीण भारत में हरित सड़कों के निर्माण को भी बढ़ावा देगा।गोंडा निरीक्षण के दौरान भवन अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉक्टर पी प्रदीप कुमार के साथ ही सीएसआईआर-एसईआरसी की निदेशक डॉ.एन.आनंदवल्ली ही नहीं उत्तर प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण मुख्य कार्यपालन अधिकारी अखंड प्रताप सिंह भी निरीक्ष्ण के दौरान मौजूद रहे। इस पहल के बाद उम्मीद की जा रही है कि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में भी सफर पहले से ज्यादा आरामदायक, सुरक्षित और टिकाऊ होगा, और गांवों की सड़कें सच में एक्सप्रेस—वे को टक्कर देंगी।—-(प्रकाश कुमार पांडेय)

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