पिछड़ों और आर्थिक कमजोर वर्गों के लिए योगी सरकार की मुफ्त कोचिंग से सफलता की उड़ान, 701 उम्मीदवारों का हुआ चयन

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पिछड़ों और आर्थिक कमजोर वर्गों के लिए योगी सरकार की मुफ्त कोचिंग से सफलता की उड़ान, 701 उम्मीदवारों का हुआ चयन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार सामाजिक न्याय और अवसर की बराबरी को लेकर लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में पिछड़े वर्गों (OBC), अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के युवाओं को मुफ्त कोचिंग की सुविधा देकर प्रशासनिक सेवाओं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता की राह आसान की जा रही है। इस पहल का नतीजा यह हुआ है कि राज्य में अब तक 701 अभ्यर्थियों का चयन विभिन्न परीक्षाओं में किया जा चुका है। इससे कई युवा IAS-PCS जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में भी पहुंचने में अब तक सफल हो चुके हैं।

उच्च स्तरीय कोचिंग से मिल रही राह

राज्य सरकार की इस अभिनव योजना के तहत राज्य के समाज कल्याण विभाग परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र Pre-Examination Training Centres को संचालित किया जा रहा है। यहां अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा Prelims ही नहीं इससे लेकर मुख्य परीक्षा Mains और साक्षात्कार Interview तक की पूरी तैयारी भी करवाई जाती है। विशेषज्ञ फैकल्टी, आधुनिक पाठ्यक्रम और नियमित टेस्ट सीरीज के जरिए युवाओं को प्रतियोगी माहौल प्रदान किया जा रहा है। खास बात यह है कि लखनऊ में एक महिला समर्पित केंद्र भी स्थापित किया गया है, जहां बालिकाओं को विशेष रूप से सशक्त बनाने का प्रयास हो रहा है।

बजट और सरकार की मंशा

वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के लिए 11.24 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। यह केवल वित्तीय सहयोग नहीं, बल्कि सरकार की उस सोच का प्रतीक है, जिसके तहत समाज के अंतिम पायदान पर खड़े युवाओं को भी समान अवसर देने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई बार यह दोहराया है कि प्रदेश के युवाओं को किसी भी स्तर पर संसाधनों की कमी नहीं होने दी जाएगी।

सफलता की कहानियां

अब तक इस योजना से 6784 से अधिक अभ्यर्थी लाभान्वित हो चुके हैं। इनमें से 48 उम्मीदवार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (UPPSC) में चयनित हुए हैं। वहीं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे बैंकिंग, रेलवे, SSC और न्यायिक सेवाओं में 653 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है। कोविड काल में भी सरकार ने ऑनलाइन माध्यम से क्लासेस शुरू रखीं, जिसका नतीजा रहा कि 81 उम्मीदवारों ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज कीं।

प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र

वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जिलों में आठ प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इनमें—

लखनऊ का श्री छत्रपति शाहू जी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान

प्रयागराज का न्यायिक सेवा केंद्र

वाराणसी का संत रविदास आईएएस-पीसीएस केंद्र

अन्य जिलों में संचालित अंबेडकर और राजकीय कोचिंग केंद्र
विशेष पहचान रखते हैं। इन केंद्रों में अभ्यर्थियों को मुफ्त किताबें, डिजिटल लाइब्रेरी और ऑनलाइन-ऑफलाइन लेक्चर की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।

किसे मिल रहा लाभ?

यह योजना उन युवाओं के लिए है, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 6 लाख रुपये तक है। आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर तबकों को अवसर देने के उद्देश्य से बनाई गई इस नीति ने हजारों युवाओं के जीवन की दिशा बदल दी है।

सामाजिक और आर्थिक बदलाव की ओर

इस पहल का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि अब गांव और छोटे कस्बों के होनहार युवाओं को भी IAS-PCS बनने का समान अवसर मिल रहा है। पहले जहां कोचिंग के महंगे खर्चे इनके सपनों को रोक देते थे, वहीं अब सरकारी सहयोग से ये युवा न केवल परीक्षाओं में बैठ रहे हैं बल्कि सफलता भी हासिल कर रहे हैं। इससे समाज में प्रतिनिधित्व और संतुलन बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं न सिर्फ प्रशासनिक सेवाओं में विविधता और संतुलन लाती हैं, बल्कि यह युवाओं के आत्मविश्वास को भी मजबूत करती हैं। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में इन केंद्रों की संख्या और सुविधाओं को और बढ़ाया जाए, ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक यह लाभ पहुंच सके।
योगी सरकार की मुफ्त कोचिंग पहल ने साबित किया है कि यदि अवसर मिले तो पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के युवा भी बड़ी से बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकते हैं। यह न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर देने की दिशा में मील का पत्थर है, बल्कि प्रदेश की सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्था को भी अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बना रहा है। यह योजना वास्तव में उन युवाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो संसाधनों की कमी के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने की क्षमता रखते हैं। ( प्रकाश कुमार पांडेय)

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