क्या राजीव गांधी के हत्यारों को मिलेगी रिहाई?

तमिलनाडु सरकार ने क्यों किया याचिका का समर्थन ?

क्या राजीव गांधी के हत्यारों को मिलेगी रिहाई?

तमिलनाडु सरकार ने क्यों किया याचिका का समर्थन ?

राजीव गांधी हत्याकांड के दो आजीवन कारावास के दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका दायर की है। जिसका समर्थन तमिलनाडु की द्रमुक सरकार ने किया है। राज्य सरकार ने कहा कि दोनों ने  30 साल से अधिक की जेल की सजा काट चुके हैं। उसने चार साल पहले सभी सात दोषियों की सजा में छूट को मंजूरी दे दी थी। वहीं राज्य सरकार ने दोषियों एस नलिनी और आरपी रविचंद्रन की ओर से दायर अलग अलग याचिकाओं के जवाब में कहा कि कानून अच्छी तरह से जानता है कि राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्य के मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह से बाध्य है।

सुप्रीम कोर्ट से दोनों दोषियों ने की रिहाई की मांग

राज्य सरकार ने बताया कि उसने 11 सितंबर 2018 को सिफारिशें भेजी थीं। हालांकि राज्यपाल ने दो साल तक इस पर फैसला नहीं किया इसके बाद 27 जनवरी 2021 को फाइल को राष्ट्रपति को भेज दी गई। यह मुद्दा अभी भी अनिर्णीत है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले 26 सितंबर को राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों नलिनी और रविचंद्रन की याचिकाओं पर तमिलनाडु सरकार और केंद्र को नोटिस जारी किया था। एक ही मामले में दोषी एजी पेरारिवलन की रिहाई का हवाला देते हुएए दोनों दोषियों ने जेल से अपनी रिहाई की मांग करते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था। नलिनी और रविचंद्रन ने पेरारीवलन की रिहाई का हवाला देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया था। हालांकि उच्च न्यायालय ने जेल से रिहाई की मांग करने वाली उनकी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। वह उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत चले गए। जहां उच्च न्यायालय ने कहा था कि वे एक समान आदेश पारित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। जिसे शीर्ष अदालत ने मामले में पेरारिवलन को रिहा करने के लिए पारित किया था। उच्च न्यायालय ने जून में पारित एक आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से मांगे गए निर्देश अदालत द्वारा नहीं दिए जा सकते हैं। क्योंकि उसके पास भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शीर्ष अदालत के समान शक्ति नहीं है। ऐसे में  पूर्वगामी कारणों सेए रिट याचिका विचारणीय नहीं होने के कारण खारिज की जाती है।

सुप्रीम कोर्ट ने  मई में दिया था रिहाई का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल 18 मई को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत पूर्ण न्याय करने के लिए अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया। क्योंकि उसने पेरारिवलन की रिहाई का आदेश दिया था। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बी आर गवई और ए एस बोपन्ना की पीठ ने कहा था कि इस मामले के असाधारण तथ्यों और परिस्थितियों मेंए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए वे निर्देश देते हैं कि अपीलकर्ता मानता है कि उसने अपराध के सिलसिले में सजा काट ली है। अपीलकर्ताए जो जमानत पर है। उसको तुरंत आजादी दी जाती है। पेरारीवलन फिलहाल जमानत पर हैं। उनकी मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया और आतंकवाद के आरोप वापस ले लिए गए। शीर्ष अदालत ने पेरारिवलन की लंबी अवधि की कैद, जेल में उनके संतोषजनक आचरण के साथ साथ पैरोल के दौरान उनके मेडिकल रिकॉर्ड से पुरानी बीमारियों, कैद के दौरान हासिल की गई। उनकी शैक्षणिक योग्यता और राज्य मंत्रिमंडल की सिफारिश के बाद ढाई साल से अनुच्छेद 161 के तहत उनकी याचिका की लंबितता को ध्यान में रखा।

21 मई 1991 में हुई थी राजीव गांधी की हत्या

बता दें भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का निधन 21 मई 1991 को एक आत्मघाती हमले में हुआ था। राजीव गांधी ने अपने कार्यकाल में श्रीलंका में शांति सेना भेजी थी। जिससे तमिल विद्रोही संगठन लिट्टे यानी लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम उनसे नाराज चल रहा था। इसके बाद 1991 में लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार करने राजीव गांधी जब चेन्नई के पास श्रीपेरम्बदूर गए तो वहां लिट्टे ने राजीव पर आत्मघाती हमला करवाया था। बता दें राजीव को फूलों का हार पहनाने के बहाने लिट्टे की महिला आतंकी धनु जिसका नाम तेनमोजि राजरत्नम था आगे बढ़ी ओर  उसने राजीव के पैर छूए साथ ही झुकते हुए कमर पर बंधे विस्फोटकों में ब्लास्ट कर दिया। धमाका इतना जबर्दस्त था कि वहां आसपास मौजूद  कई लोगों के चीथड़े उड़ गए थे।। राजीव और हमलावर धनु समेत 16 लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जबकि 45 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। लोकसभा चुनावों में कांग्रेस तीन.चौथाई सीटें जीतने में कामयाब रही थी। उस समय कांग्रेस ने 533 में से पार्टी ने 414 सीटें जीतीं। राजीव जब प्रधानमंत्री बनेए तब उनकी उम्र महज 40 साल थी। वे देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री रहे। उन्होंने अपने कार्यकाल में स्कूलों में कंप्यूटर लगाने की व्यापक योजना बनाई। जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित किए। गांव.गांव तक टेलीफोन पहुंचाने के लिए पीसीओ कार्यक्रम शुरू किया। पर इस दौरान भ्रष्टाचार के आरोप भी उन पर लगे। सिख दंगे, भोपाल गैस कांड, शाहबानो केस, बोफोर्स कांड, काला धन और श्रीलंका नीति को लेकर राजीव सरकार की आलोचना हुई। लिहाजा चुनाव में कांग्रेस की हार हुई और वीपी सिंह की सरकार बनी। 1990 में ये सरकार गिर गई और कांग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर की सरकार बनी। 1991 में यह सरकार भी गिर गई और चुनाव का ऐलान हुआ। इन्हीं चुनावों के लिए प्रचार करने राजीव तमिलनाडु गए थे। जहां उनकी हत्या कर दी गई।

Exit mobile version