क्या अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को नेताओं के साथ करना पड़ेगा दंगल?

प्रदर्शन में मिक्स हो रही पॉलिटिक्स

दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन करने वाले अंतरराष्ट्रीय पहलवानों को न्याय मिला की नहीं, इस पर किसी का ध्यान नहीं है। पर,इतना जरूर है कि राजनैतिक लाभ लेने वाले नेताओं की होड़ लग गई है। इसके लिए कांग्रेस से लेकर आम आदमी पार्टी सहित तमाम भाजपा विरोधी दलों ने अपने सियासी मुनाफे का सपना देखना शुरु कर दिया है। जब धरना प्रदर्शन में पहलवान दलों के समर्थन की अपील कर रहे थे तब किसी ने दमदारी से नहीं कहा था कि हम पूरी तरह पहलवानों के साथ खड़े हैं।

प्रदर्शन में मिक्स हो रही पॉलिटिक्स

प्रदर्शन में मिक्स हो रही पॉलिटिक्स को लेकर कई पहलवान चिंतित दिखाई दिए। हालांकि तात्कालिक तौर पर किसी ने कुछ नहीं कहा लेकिन उनकी मनोदशा को देखते हुए कहा जा सकता है कि इस स्थिति से बिलकुल सहज नहीं थे। राजनीति की शुरुआत शनिवार को सुबह उस समय हो गई जब कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी पहलवानों से मिलने पहुंच गई। थोड़ा ही समय हुआ था कि कुश्ती संघ की अध्यक्ष बृजभूषण सिंह ने एक पत्रकारवार्ता करके अपना पूरा गुस्सा विरोधी दलों पर निकाल दिया। उन्होंने कहा कि एक ही परिवार एक ही अखाड़ा छोड़ दें तो बाकी के खिलाड़ी कहां है जिनका यौन शोषण हुआ है। गर्माती राजनीति के बीच पहलवान साक्षी मलिक ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि हम किसी राजनैतिक दल के साथ नहीं है और जो भी यहां आ रहे हैं और धरने को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं उसके जिम्मेदार वे खुद ही होंगे। रही सही कसर कांग्रेस सांसद दीपेन्द्र हुडडा ने पूरी कर दी। उन्होंने कहा कि इसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। आपको बता दें कि जब पहलवान धरना दे रहे थे तब उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि हम राजनीति नहीं चाहते हैं। उन्होेंने सीपीआई नेता वृंदा करात से बात करने को भी मना कर दिया था।

सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने दी सफाई

पहलवानों के मामले में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने पत्रकारों से चर्चा कर पहलवानों को न्याया दिलाने के बहाने केन्द्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी देश के लिए मैडल जीतता है और पूरा राष्ट्र खुशी से झूमता है। प्रधानमंत्री भी तारीफ करते हैं,अवार्ड देते हैं लेकिन अब उन्होंने क्यों चुप्पी साध रखी है।

 

 

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