Tawang: अरुणाचल प्रदेश के तवांग में भारत और चीन कै सैनिकों के बीच झड़प का मसला आज संसद में भी गूंजा। विपक्ष सरकार पर हमलावर रहा और चर्चा की मांग को लेकर हंगामा किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तवांग झड़प को लेकर राज्यसभा में बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने चीन की घुसपैठ का मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि चीन ने एलएसी की यथास्थिति को बदलने की कोशिश की, जिसका भारतीय जवानों ने बहादुरी से मुकाबला किया।
बता दें कि अब राजनाथ सिंह दोपहर करीब 2 बजे लोकसभा में बयान देंगे।
नई नहीं है चीन की विस्तारवादी नीति
चीन की विस्तारवादी नीति कोई छुपी हुई बात नहीं है। जिस किसी भी देश से उसकी सीमा लगती है, उसके साथ उसका छत्तीस का आंकड़ा चल रहा है। भारत में भी चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। डोकलाम, लद्दाख के बाद अब उसने तवांग में घुसपैठ करने की कोशिश की, जिसका भारतीय फौजियों ने मुंहतोड़ जवाब दिया।
- 9 दिसंबर को चीनी सेना ने तवांग में घुसपैठ की कोशिश की
- 300 चीनी सैनिकों को भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया
- चीन के 20 से अधिक सैनिक घायल
- रणनीतिक तौर पर बहुत अहम है तवांग, इसलिए चीन की है गंदी नज़र
अरुणाचल प्रदेश में पेट्रोलिंग के दौरान तवांग सेक्टर में दोनों देशों के फौजी एक दूसरे के सामने आ गए। चीनी फौज एलएसी तक पहुंचना चाहती थी लेकिन भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों का डटकर सामना किया।
चीन चाहता है तवांग पर कब्जा
1962 की जंग के बाद से ही तवांग पर चीन की गंदी नजर है। साल 1962 में दोनों देशों के बीच हुई जंग के बाद से चीन ने इसे खाली कर दिया था क्योंकि यह मैकमोहन लाइन के अंदर पड़ता है। हालांकि, बाद में चीन की नीयत बदल गई और उसने यहां फौजी जमा करने शुरू कर दिए। चीन के लिए यह जगह इतनी अहम क्यों है और अगर भारत के हाथों से यह तवांग चला जाता है तो फिर हमें क्या नुकसान होंगे, यह हम आपको आगे बताएंगे।
रणनीतिक महत्व का है तवांग
अरुणाचल प्रदेश का तवांग करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई है। यह भारत और चीन दोनों देशों की फौज के लिए रणनीतिक तौर पर बहुत खास जगह है। इस पोस्ट पर कब्जा करने के बाद चीन, तिब्बत के साथ-साथ एलएसी की निगरानी भी करना चाहता है। इसके अलावा चीन भूटान पर भी अपना दावा ठोंकता ही रहता है। वैसे, बदले हुए भारत में चीन का इस पर कब्जा तो दूर की कौड़ी है, लेकिन बारहां हमला कर चीन शायद तापमान जांचता रहता है।
इस बीच भारत में विपक्ष ने एकजुट होकर तवांग का मसला जोरशोर से उठा दिया है और फिलहाल तो राजनीतिक गलियारों में इसी की चर्चा है।