केला एक ऐसा फल है जो की हर जगह और हर मौसम में उपलब्ध रहता है. लगभग 50 प्रतिशत से ज़्यादा लोग नाश्ते में केले का सेवन करते है. केला एनर्जी से भरपूर फल है और केला ऐसा फल है, जिसको हर कोई खरीद कर खा सकता है. पर क्या आपने एक चीज़ पर गौर किया है? आप जब भी केला खाते होंगे तो उसकी बनावट को देख कर आपके मन में यह सवाल ज़रूर आता होगा की केले का अकार टेढ़ा क्यों होता है? तो हम आपको इसके पीछे का कारण बता रहे है.
टेढ़े होने का कारण
दरअसल, केले के इस टेढ़ेपन के पीछे एक साइंटिफिक कारण है. जब केले के पेड़ में फल लगता है तो वह गुच्छे में होता है, और एक कली जैसी होती है. जिसमे हर पत्ते के नीचे गैल होता है. जब शुरुआत में केला फलना शुरू होता है तो वह ज़मीन की तरफ ही बढ़ता है और सीधा होता है. फिर Negative Geotropism जो की विज्ञानं की प्रवृति है, उसके कारण केले का पेड़ सूरज की तरफ बढ़ता है. इस के कारण केले का फल ऊपर की तरफ बढ़ने लगता है और इसकी वजह से केले का फल टेढ़ा हो जाता है. सूरजमुखी का फूल भी इसी तरह सूरज की दिशा में बढ़ता है.
केले का इतिहास
इतिहास के हिसाब से केले के पेड़ सबसे पहले रेनफॉरेस्ट में पैदा हुए थे, और वहा सूरज की रोशनी पहुंचने में काफी दिक्कत होती थी जिसके कारण केले के पेड़ों ने अपने आप को उसमें ढाल लिया. इसिलए केले के फल पहले जमीन की तरफ फिर सूरज की तरफ बढ़ते है और उनका आकर टेढ़ा हो जाता है. केले का इतिहास काफी पुराना है, अजंता और एलोरा में भी केले की कलाकृतियां मौजूद है. कहा जाता है की केले करीब 400 साल पहले मलेशिया में उगाए गए थे और उसके बाद वह पूरी दुनिया में फ़ैल गए. केले के फल और पेड़ को धार्मिक तौर से भी पवित्र माना जाता है और कुछ अर्थशास्त्रों में भी केले का जिक्र है.