बदले बदले से शशि थरूर जाने क्यों है मजबूर
कांग्रेस के साथ बगावती सुर क्यों दिखा रहे हैं थरूर जाने पीछे की कहानी
कांग्रेस पार्टी के सांसद शशि थरूर इन दिनों सियासत में चर्चा का कारण बने हैं। वजह है उनकी अपनी ही पार्टी कांग्रेस से दूरी और केंद्र की बीजेपी सरकार से नजदीकी। हांलाकि अभी तक राजनैतिक पंडित ये समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर थरूर जैसे नेता ने अचानक पार्टी से बागी तेवर क्यों रखना शुरू कर दिए चाहे बात ऑपरेशन सिंदूर की हो या फिर सीज फायर की हर मौके पर थरूर पार्टी से एक कदम आगे केंद्र सरकार के साथ नजर आ रहे है। थरूर का पिछले कुछ दिनों का सोशल मीडिया पर गौर करें तो उसकी पोस्ट देखकर सवाल खड़े होते थे कि क्या ये किसी कांग्रेसी नेता का सोशल मीडिया है।
थरूर क्यों दिखा रहे बगावती तेवर
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर थरूर ऐसा क्यों कर रहे हैं। आकलन है कि थरूर केरल की राजनीति में टॉप पर जाना चाहते है। थरूर सालों केरल का राजनीति का एक अहम हिस्सा हैं । जानकार बताते हैं कि पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी में स्थानीय स्तर की राजनीति में उनको हाशिए पर लाने की कोशिश की गई। मामला दिल्ली दरबार तक से जानकारी में था लेकिन इसके बाद भी उनकी तरफ से कोई कारवाई नहीं की गई। इसके बाद से शशि थरूर ने कांग्रेंस पार्टी के साथ साथ प्रदेश की सीपीएम सरकार को भी कटघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया ।
ऑपरेशन सिदूंर में थरूर खुलकर आए बीजेपी के साथ
आपरेशन सिदूंर के बाद थरूर ने खुलकर बीजेपी का केंद्र सरकार का साथ दिया। ऑपरेशन सिदूंर के बाद जब सीज फायर को लेकर सवाल खड़े हुए तब कांग्रेस पार्टी सरकार से जो सवाल करती थी उसका जवाब आने के पहले ही थरूर सोशल मीडिया पर जवाब लिख देते हैं। सीज फायर को लेकर जब कांग्रेस ने केंद्र सरकार को घेरा तो उसके जवाब में थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों को समझया कि क्या होता है सीज फायर और क्यों जरूरी था।
कांग्रेस पार्टी ने टीम इंडिया के लिए नहीं दिया था नाम
शशि थरूर का नाम कांग्रेस पार्टी ने उस लिस्ट में नहीं दिया जिनको सरकार डेलीगेशन के तौर पर भारत का पक्ष रखने और कांग्रेस की पोल खोलने के लिए विदेश भेजना चाहती थी। लेकिन केंद्र ने शशि थरूर का नाम जोड़कर उनको डेलीगेशन में भेजा।
क्या मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं शशि थरूर
जानाकरों की माने तो क्या थरूर ये सब केरल में सर्वोच्च पद पाने के लिए कर रहे है। अगर ऐसा होता कि थरूर कांग्रेस का साथ छोड़ते हैं तो उनको तिरूअनंत परुम से इस्तीफा देना होगा।वैसे भी इस बार के चुनाव में थरूर को केरल बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और सुरेश गोपी ने कड़ी चुनौती दी थी। राजवी चंद्रशेखर अब प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष हैं
वे अब प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हैं और उन्होंने राज्य में भाजपा की सरकार बनाए बगैर राज्य नहीं छोड़ने का ऐलान किया है। ऐसे में अगर थरूर बीजेपी में आते है तो राजीव चंद्रशेखऱ और सुरेश गोपी उनको कड़ी चुनौती दे सकते हैं। हांलाकि सूत्र बताते हैं कि एक सर्वे कांग्रेस आलाकमान तक पहुंचा है जिसमें ये बताया है कि थरूर मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लोकप्रिय चेहरा हो सकते हैं।
प्रकाश कुमार पांडेय