देश में उपराष्ट्रपति पद के लिए एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद यह पद रिक्त है और सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। बीजेपी के रणनीतिकार विभिन्न राज्यों और सामाजिक वर्गों से संभावित उम्मीदवारों पर मंथन कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधा जा सके।
धनखड़ का कार्यकाल कई बार सरकार के लिए असहज रहा, खासकर न्यायपालिका और विपक्ष से उनके टकराव के चलते। इसलिए बीजेपी इस बार ऐसे चेहरे की तलाश में है जो न केवल संगठनात्मक रूप से भरोसेमंद हो, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील न हो।
बिहार या दक्षिण भारत से चेहरा?
बिहार में चुनाव सिर पर हैं और वहां एनडीए की सरकार है, ऐसे में बिहार से उपराष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में किसी नाम पर विचार संभव है। हालांकि, यहां हरिवंश नारायण सिंह पहले से ही राज्यसभा के उपसभापति हैं और वे भी बिहार से आते हैं, जिससे संतुलन गड़बड़ा सकता है।
दूसरी ओर, दक्षिण भारत बीजेपी का फोकस एरिया बनता जा रहा है। तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों से उम्मीदवार सामने लाकर पार्टी क्षेत्रीय समीकरण साधना चाहती है। संघ से जुड़े व्यक्ति या फिर संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेता को तरजीह दी जा सकती है।
दलित-OBC या महिला कार्ड की भी चर्चा
बीजेपी ने 2022 में राष्ट्रपति पद पर द्रौपदी मुर्मू को लाकर बड़ा दांव खेला था। उसी तर्ज पर अब दलित, OBC या महिला नेता को उपराष्ट्रपति बनाकर बीजेपी विपक्ष के जातीय और सामाजिक मुद्दों के जवाब में बड़ा संदेश देना चाहती है। राहुल गांधी द्वारा लगातार ओबीसी सवाल उठाए जाने के जवाब में यह कदम अहम हो सकता है।
संख्या बल से एनडीए को बढ़त
इस चुनाव में केवल सांसद वोट करते हैं, जिसमें एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है। इसलिए जिसे एनडीए तय करेगा, वही उपराष्ट्रपति बनेगा। विपक्ष प्रतीकात्मक उम्मीदवार उतारेगा, लेकिन नतीजा बीजेपी के पक्ष में ही रहने की पूरी संभावना है। ऐसे में सबकी नजर सिर्फ इस बात पर है कि बीजेपी अगला सरप्राइज़ किसे बनाकर देती है—महिला, दलित, दक्षिण का कोई चेहरा या फिर संगठन का वफादार सिपाही?





