कौन हैं सैयद अता हसनैन..? जिन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया गया…क्या है हसनैन का सेना से संबंध

Syed Ata Hasnain

कौन हैं सैयद अता हसनैन..? जिन्हें बिहार का राज्यपाल बनाया गया

भारत की सेना में चार दशक तक सेवाएं देने वाले वरिष्ठ सैन्य अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) Syed Ata Hasnain को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वे भारतीय सेना के उन अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने कई संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों में नेतृत्व किया और बाद में रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में पहचान बनाई। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी वे राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

सैन्य परिवार से संबंध

लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता का नाम सय्यद महदी हसनैन था। सैन्य परंपरा और अनुशासन के माहौल में पले-बढ़े हसनैन ने कम उम्र से ही देश सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। उनकी पत्नी का नाम सबिहा हसनैन है और उनकी दो बेटियां हैं।

प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा

सैयद अता हसनैन ने देश और विदेश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की। उनकी शुरुआती पढ़ाई नैनीताल के प्रसिद्ध Sherwood College में हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित St. Stephen’s College से उच्च शिक्षा हासिल की।

इसके अलावा उन्होंने लंदन के Royal College of Defence Studies और King’s College London से रणनीतिक और रक्षा अध्ययन से जुड़ी पढ़ाई की। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण के लिए उन्होंने हवाई स्थित Asia-Pacific Center for Security Studies में भी अध्ययन किया।

चार दशक का गौरवशाली सैन्य करियर

लेफ्टिनेंट जनरल अता हसनैन का भारतीय सेना में लगभग 40 वर्षों का लंबा और महत्वपूर्ण करियर रहा है। इस दौरान उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण सैन्य क्षेत्रों में सेवा दी। उनकी तैनाती श्रीलंका, सियाचिन ग्लेशियर, उत्तर-पूर्व भारत और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों में रही। खासतौर पर जम्मू-कश्मीर में उन्होंने कई बार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। मोज़ाम्बिक और रवांडा में संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत उनकी तैनाती रही, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति स्थापना अभियानों में भूमिका निभाई।

भारतीय सेना में अहम कमान

अपने सैन्य करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमान संभालीं। वे श्रीनगर में तैनात भारतीय सेना की प्रतिष्ठित 15 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) रहे। यह कोर कश्मीर घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियानों के लिए जानी जाती है। इसके अलावा उन्होंने भोपाल स्थित 21 कोर के जीओसी के रूप में भी कार्य किया। यह कोर भारतीय सेना की स्ट्राइक कोर मानी जाती है और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही वे भारतीय सेना में सैन्य सचिव जैसे अहम पद पर भी रहे।

कश्मीर और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद भी सैयद अता हसनैन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में सक्रिय रहे। उन्हें जम्मू-कश्मीर संघर्ष, पाकिस्तान, मध्य-पूर्व और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर भारत के प्रमुख विशेषज्ञों में से एक माना जाता है। वे अक्सर रणनीतिक और सुरक्षा विषयों पर लेख लिखते हैं और टीवी चैनलों की बहसों में भी भाग लेते रहे हैं।

कई महत्वपूर्ण संस्थानों में जिम्मेदारी

सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें कई महत्वपूर्ण संस्थागत जिम्मेदारियां भी दी गईं। उन्हें 13 जुलाई 2018 को भारत के राष्ट्रपति द्वारा Central University of Kashmir का कुलाधिपति नियुक्त किया गया था। इसके अलावा वे National Disaster Management Authority के सदस्य भी रहे। इस पद पर उनकी नियुक्ति 21 फरवरी 2020 से 12 मार्च 2026 तक के लिए की गई थी। वे Prime Ministers Museum and Library की कार्यकारी परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। साथ ही वे Vivekananda International Foundation के विशिष्ट फेलो के रूप में भी जुड़े रहे हैं।

कई सैन्य पुरस्कारों से सम्मानित

लेफ्टिनेंट जनरल अता हसनैन को उनके उत्कृष्ट सैन्य योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा छह प्रमुख सैन्य अलंकरण प्रदान किए गए, जबकि दो पुरस्कार सेना प्रमुख द्वारा दिए गए। उनके प्रमुख सम्मान में परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा पदक (UYSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM), सेना मेडल (SM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) शामिल हैं।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सक्रिय

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ के रूप में उन्होंने कई वैश्विक संस्थानों में व्याख्यान भी दिए हैं। इनमें सिंगापुर का Lee Kuan Yew School of Public Policy, S. Rajaratnam School of International Studies, और लंदन का International Institute for Strategic Studies जैसे संस्थान शामिल हैं।

रक्षा मामलों के प्रमुख टिप्पणीकार

लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन सुरक्षा और सामरिक मामलों के एक सम्मानित विश्लेषक भी हैं। वे कई प्रमुख अखबारों और पत्रिकाओं के लिए लेख लिखते रहे हैं और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा करते हैं। चार दशकों के सैन्य अनुभव, रणनीतिक समझ और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लंबे अनुभव के बाद अब उन्हें बिहार के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। माना जा रहा है कि उनके अनुभव का लाभ राज्य के प्रशासनिक और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने में मिल सकता है।

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