राष्ट्रपति के साथ हमेशा दिखने वाले मेजर ऋषभ सिंह संब्याल कौन हैं? सोशल मीडिया पर छाए एडीसी

Major Rishabh Singh Sambyal

राष्ट्रपति के साथ हमेशा दिखने वाले मेजर ऋषभ सिंह संब्याल कौन हैं? सोशल मीडिया पर छाए एडीसी

सोशल मीडिया पर इन दिनों राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उनके एडीसी (Aide-de-Camp) मेजर ऋषभ सिंह संब्याल सुर्खियों में हैं। छोटे-छोटे वीडियो और तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं, जिनमें उनकी सादगी, मुस्कान और विनम्रता लोगों को खूब भा रही है।

एक ड्राई फ्रूट से वायरल हुए

हाल ही में एक कार्यक्रम का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें मेजर संब्याल सिर्फ़ एक ड्राई फ्रूट उठाते हैं और हल्की-सी मासूम मुस्कान के साथ कैमरे में कैद हो जाते हैं। यह सादगी भरा पल सोशल मीडिया पर लाखों बार देखा गया और उनकी लोकप्रियता रातों-रात बढ़ गई। लोग उनके व्यवहार, अनुशासन और विनम्रता की तुलना एक आदर्श अधिकारी से कर रहे हैं।

पहली बार कब आए सुर्खियों में?

मेजर संब्याल पहली बार 2021 में चर्चा में आए थे, जब उन्होंने जाट रेजिमेंट के कैप्टन के तौर पर गणतंत्र दिवस परेड में अपनी टुकड़ी का नेतृत्व किया। उनकी टुकड़ी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने “सर्वश्रेष्ठ मार्चिंग टुकड़ी ट्रॉफी” से नवाज़ा। उनकी अनुशासित चाल और नेतृत्व क्षमता की खूब सराहना हुई थी।

राष्ट्रपति के एडीसी – सबसे प्रतिष्ठित भूमिका

आज मेजर ऋषभ सिंह संब्याल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एडीसी हैं। यह पद भारतीय सेना के किसी भी अधिकारी के लिए अत्यंत सम्मानजनक माना जाता है।

एडीसी की भूमिका: वरिष्ठ अधिकारी का निजी सहायक होना, कार्यक्रमों का प्रबंधन करना, यात्रा और आधिकारिक कार्यक्रमों की व्यवस्था देखना और सुरक्षा प्रोटोकॉल सुनिश्चित करना। यह पद सिर्फ़ अनुशासन ही नहीं, बल्कि उच्च संवेदनशीलता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता की भी मांग करता है।

क्यों बन गए लोगों के चहेते?

राष्ट्रपति के साथ हमेशा ड्यूटी पर दिखने वाले मेजर संब्याल का शांत और सहज स्वभाव लोगों को बेहद आकर्षित कर रहा है। चाहे राजकीय समारोहों में सुरक्षा की ज़िम्मेदारी निभाना हो या राष्ट्रपति की सहायता करना – हर जगह उनकी पेशेवराना और नम्रता भरी झलक साफ़ दिखती है। सोशल मीडिया पर उनके कई फैन पेज बन चुके हैं। इंस्टाग्राम पर उनके नाम से बने एक पेज को ही 45 हज़ार से ज्यादा लोग फॉलो कर रहे हैं।

युवा पीढ़ी के लिए रोल मॉडल

मेजर संब्याल आज युवा पीढ़ी के लिए डिसिप्लिन और ग्रेस का प्रतीक बन गए हैं। उनका कामकाज यह संदेश देता है कि सेना के अधिकारी सिर्फ़ रणभूमि के हीरो नहीं होते, बल्कि सार्वजनिक जीवन में भी अनुशासन और विनम्रता से लोगों का दिल जीत सकते हैं। प्रकाश कुमार पांडेय

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