अमृतसर। एक संगठन है- वारिस पंजाब दे। इससे जुड़े हजारों लोगों ने गुरुवार यानी 23 फरवरी को अमृतसर के अजनाला थाने पर हमला कर दिया। इनके हाथों में बंदूकें, तलवारें और भाले थे। ये लोग संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह के करीबी लवप्रीत सिंह तूफान की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे।
- हमले के बाद दबाव में आई पंजाब पुलिस ने आरोपी को रिहा करने का ऐलान कर दिया
- उसके बाद संगठन के प्रमख अमृतपाल सिंह ने बयान दिया- 500 साल से हमारे पूर्वजों ने इस धरती पर अपना खून बहाया है, कुर्बानी देने वाले इतने लोग हैं कि हम उंगलियों पर गिना नहीं सकते, इस धरती के दावेदार हम हैं, इस दावे से न इंदिरा हटा सकी थी और न ही मोदी या अमित शाह हटा सकता है
- हम मरते मर जाएंगे, लेकिन अपना दावा नहीं छोड़ेंगे
कौन है अमृतपाल सिंह?
पंजाब के अमृतसर जिले में जल्लूपुर खेड़ा में साल 1993 में अमृतपाल सिंह का जन्म हुआ। 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद साल 2012 में अमृतपाल काम के सिलसिले में दुबई चला गया। दुबई में वह ट्रांसपोर्ट बिजनेस का काम करने लगा। पिछले साल फरवरी में दीप सिद्धू की मौत के बाद ‘वारिस पंजाब दे’ को संभालने के लिए अमृतपाल वापस पंजाब लौट आया।
- 29 सितंबर 2022 को मोगा जिले के रोडे गांव में अमृतपाल को ‘वारिस पंजाब दे’ का प्रमुख घोषित किया गया
- खालिस्तानी आतंकी रहे जरनैल सिंह भिंडरांवाला इसी रोडे गांव का रहने वाला था
- इस दौरान यहां पर हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे, जिन्होंने खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए
यह संगठन पंजाबी अभिनेता का था
‘वारिस पंजाब दे’ संगठन को पंजाबी अभिनेता संदीप सिंह उर्फ दीप सिद्धू ने सितंबर 2021 में बनाया था। दीप सिद्धू 26 जनवरी 2021 को लालकिले पर हुए उपद्रव के मामले में प्रमुख आरोपी था।
- संगठन का मकसद- युवाओं को सिख पंथ के रास्ते पर लाना और पंजाब को जगाना है
- इस संगठन के एक मकसद पर विवाद भी है, वह है- पंजाब की ‘आजादी’ के लिए लड़ाई
- अमृतपाल पिछले 5 सालों से सिखों से संबंधित मुद्दों पर मुखर होकर बोल रहा है
- वह 3 कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का भी हिस्सा बना
- शंभू बॉर्डर पर दीप सिद्धू अपने भाषणों में कहता था कि कृषि कानूनों को निरस्त करने के बावजूद आंदोलन बंद नहीं होना चाहिए, अमृतपाल सिंह के अपने विचार भी ऐसे ही हैं, लेकिन उसने दीप सिद्धू से अलग राह पकड़ी है।
अमृतपाल सिंह और विवाद
अमृतपाल सिंह का विवादों से पुराना नाता है। उनके समर्थकों का दावा है कि दीप सिद्धू, अमृतपाल सिंह के करीबी थे। इसीलिए वह वारिस पंजाब दे के प्रमुख बनने के सबसे योग्य थे। दीप सिद्धू के कुछ सहयोगी जैसे पलविंदर सिंह तलवारा और परिवार के कुछ सदस्य अमृतपाल को प्रमुख बनाए जाने का विरोध करते हैं।
- कुछ लोगों का दावा है कि सिद्धू ने अमृतपाल को सोशल मीडिया पर ब्लॉक तक कर दिया था
- लुधियाना के वकील और दीप सिद्धू के भाई मनदीप सिंह सिद्धू एक बातचीत में बताते हैं कि हम अमृतपाल से पहले कभी नहीं मिले, उसने खुद को मेरे भाई के संगठन का प्रमुख कैसे घोषित कर दिया, यह पता नहीं है
- वह असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए हमारे नाम का दुरुपयोग कर रहा है, उसने किसी तरह मेरे भाई के सोशल मीडिया अकाउंट्स को एक्सेस कर लिया और उन पर पोस्ट करना शुरू कर दिया
मनदीप कहते हैं कि उसके भाई ने इस संगठन को पंजाब के मुद्दों को उठाने और जरूरतमंदों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए बनाया था न कि खालिस्तान का प्रचार करने के लिए।
अमृतपाल फिलहाल पंजाब का नया मसीहा बनकर उभरा है। वह खालिस्तान की बातें करता है और लोग उसको सुन भी रहे हैं।
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