कब साइन होगी भारत-अमेरिका ट्रेड डील? और ट्रंप टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार क्या है?

India-US trade deal be signed

कब साइन होगी भारत-अमेरिका ट्रेड डील? और ट्रंप टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार क्या है?

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम ट्रेड डील अब अंतिम दौर में है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, समझौते पर मार्च में हस्ताक्षर होने और अप्रैल से लागू होने की संभावना है। कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए 23 फरवरी से तीन-दिवसीय बैठक अमेरिका में शुरू हो चुकी है। इससे पहले दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी कर डील के फ्रेमवर्क पर सहमति की घोषणा की थी।

क्या होगा डील का असर?

अंतरिम समझौते के तहत कई उत्पादों पर ड्यूटी में कटौती प्रस्तावित है। अमेरिकी पक्ष ने भारतीय सामान पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% करने और अतिरिक्त 25% टैरिफ हटाने का संकेत दिया है। यह अतिरिक्त शुल्क रूस से तेल खरीद के संदर्भ में लगाया गया था। लागू होने पर भारतीय निर्यातकों को सीधा लाभ मिल सकता है, खासकर टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, फार्मा और कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों में।

फ्रेमवर्क में मार्केट एक्सेस का भी प्रावधान है। भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक के आयात—तेल-गैस, कोकिंग कोल, विमान/विमान-पुर्जे, कीमती धातुएं और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी—बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। बदले में भारत कुछ औद्योगिक और कृषि वस्तुओं पर टैरिफ रियायत देगा। सरकार का दावा है कि इससे भारतीय किसानों, मछुआरों और एसएमई को अमेरिका के विशाल बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी।

ट्रंप टैरिफ पर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इसी बीच अमेरिका में बड़ा घटनाक्रम हुआ। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए व्यापक टैरिफ अभियान को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी ठहरा दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने जिस कानून—International Emergency Economic Powers Act (IEEPA)—का सहारा लिया, वह राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के आधार पर इस तरह के व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने का पूर्ण अधिकार नहीं देता।

IEEPA क्या है?

IEEPA 1977 में बना कानून है, जो राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा/विदेश नीति से जुड़े आपातकालीन हालात में आर्थिक प्रतिबंध, लेन-देन पर रोक या संपत्ति फ्रीज करने जैसी शक्तियां देता है। ट्रंप प्रशासन ने इसी प्रावधान के तहत “रेसिप्रोकल टैरिफ” लागू करते हुए कई देशों पर शुल्क बढ़ाए थे। अदालत का मत है कि IEEPA का उद्देश्य व्यापक व्यापार कर थोपना नहीं, बल्कि लक्षित आर्थिक उपाय करना है। इसलिए अदालत ने टैरिफ वॉर को कानूनी आधारहीन माना।

इसका वैश्विक संदेश क्या?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अमेरिकी कार्यपालिका की व्यापार-नीति शक्तियों पर संवैधानिक सीमाएं रेखांकित हुई हैं। वैश्विक बाजारों को संकेत मिला कि बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने के लिए कांग्रेस की भूमिका अहम है। इससे भविष्य में किसी भी प्रशासन के लिए एकतरफा “टैरिफ अटैक” शुरू करना आसान नहीं रहेगा।

भारत-अमेरिका डील पर संभावित असर

ट्रंप-युग के टैरिफ को अवैध ठहराए जाने से भारत-अमेरिका वार्ता का वातावरण अपेक्षाकृत स्थिर हो सकता है। यदि अमेरिकी टैरिफ ढांचा न्यायिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता, तो द्विपक्षीय समझौते के जरिए संरचित और पारदर्शी टैरिफ कटौती का रास्ता मजबूत होगा। इससे मार्च-अप्रैल टाइमलाइन पर साइनिंग और लागू होने की संभावना और स्पष्ट दिखती है। साथ ही, भारत समानांतर रूप से ब्रिटेन और ओमान के साथ एफटीए को अप्रैल से लागू करने की तैयारी में है, जबकि न्यूजीलैंड के साथ समझौता सितंबर तक संभव बताया जा रहा है। यानी नई दिल्ली बहुपक्षीय और द्विपक्षीय—दोनों ट्रैकों पर आगे बढ़ रही है।

अगर सब कुछ तय समय पर हुआ, तो यह डील दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए व्यापार, निवेश और सप्लाई-चेन सहयोग का नया अध्याय खोल सकती है—और “टैरिफ का The End” की बहस को एक ठोस, नियम-आधारित ढांचे में बदल सकती है।

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