पोल खुली तो कनाडा के पीएम ट्रूडो ने लिया यू टर्न…क्या ट्रूडो के भारत पर आरोप चुनावी राजनीति से प्रेरित थे… क्या है कनाडा भारत के रिश्तों का भविष्य…!
खालिस्तानी आतंकवादी निज्जर की हत्या में भारत का हाथ बताने वाले कनाडा प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा के भीतर विदेशी हस्तक्षेप पर हुई पब्लिक इंक्वायरी में इस बात को स्वीकार किया है कि ठोस सबूतों के बजाय प्रारंभ में खुफिया जानकारी के आधार पर उनकी सरकार ने भारत पर आरोप लगाया था। भारत कनाडा व्यापार
सितंबर 2024 में निर्यात
34.58अरब डॉलर
सितंबर में निर्यात में बढ़ोत्तरी 0.5%
सितंबर 2024 में आयात
55.36 अरब डॉलर
सितंबर में आयात में बढ़ोत्तरी 1.6%
व्यापार घाटा
29.65 अरब डॉलर
जस्टिन ट्रूडो ने यह भी कहा है कि कनाडा और उसके सहयोगियों से उन्हें जो भी खुफिया जानकारी मिली थी, जिससे पता चलता है कि भारतीय एजेंट इस सब में शामिल थे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि लेकिन उस समय कोई ठोस सबूत नहीं थे। दरअसल कनाडा पीएम झूठ पकड़ा गया है। जिसके बाद MEA की और से ट्रूडो को खरी-खरी सुनाई गई है। साथ ही दोनों देशों के बीच रिश्तों को जो नुकसान हुआ है उसके केवल ट्रूडो हो ही जिम्मेदार मना है।
सवालों में ट्रूडो का यूटर्न
ऐसे में सवाल यह है कि क्या कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रुडो का यह बयान मात्र राजनीति से प्रेरित था ताकि चुनाव में सिख कम्युनिटी का वोट हासिल कर सकें। फिर देश के भीतर विदेशी हस्तक्षेप पर हुई पब्लिक इंक्वायरी में कनाडा के पीएम ने यह बात क्यों स्वीकारी की निज्जर हत्याकांड मामले में पर्याप्त सबूत नहीं थे। भारत भारत कनाडा रिश्ते में खटास का जिम्मेदार अब कनाडा प्रधानमंत्री ट्रूडो को मानने के कई मतलब निकले जा रहे हैं।
सवाल यह भी है कि क्या ट्रुडो के हाथ बढ़ने पर संबंध सामान्य होंगे। या भारत कोई और सख्त एक्शन ले सकता है। क्या भारत के कूटनीतिक रिश्तों की तरह व्यापारिक रिश्तों में भी खटास आएगी। जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा चुनावों की जांच के लिए बनी विदेशी हस्तक्षेप समिति के सामने अपने कुबूलनामे के बाद भारत की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। भारत की ओर से करारा जवाब दिया गया है। जिसमें कहा गया अब पिछले कुछ दिनों में इस सबके बीच भारत कनाडा के जो रिश्ते बिगड़े हैं, उसकी जिम्मेदारी अब अकेले केवल जस्टिन ट्रूडो की है।
ट्रूडो द्वारा इस तरह से भारत को बदनाम करने के पीछे की साजिश क्या है और साथ ही साथ कनाडा में चुनाव की जांच के लिए बनी विदेशी हस्तक्षेप समिति के सामने यह बात स्वीकारना कि भारत को नेचर हत्याकांड मामले में कोई ठोस सबूत कनाडा ने पेश नहीं किया। आखिर क्या कहलाता है ट्रूडो का बदला रुप। जस्टिन ट्रूडो ने देश के भीतर विदेशी हस्तक्षेप पर हुई पब्लिक इंक्वायरी में कहा हमने भारत से कहा कि यह पक्का सबूत नहीं है। बल्कि उस समय सिर्फ खुफिया जानकारी थी। अब हमारी कोशिश थी कि पर्दे के पीछे भारत हमारे साथ सहयोग करे। उनका कहना था कि भारत हमें सबूत दें जो भी उनके पास हैं हमारा जवाब था कि यह आपकी सुरक्षा एजेंसी के भीतर है। आपको यह देखना चाहिए कि वे कितना जानते हैं। आपको जुड़ना चाहिए। भारत की ओर से कहा गया है कि नहीं, नहीं पहले सबूत दिखाओ। उस समय, यह मुख्य रूप से खुफिया जानकारी थी। न कि ठोस सबूत, तो कहा था कि चलो साथ मिलकर काम करते हैं।
भारत की ओर से कनाडाई पीएम ट्रूडो के बयानों को तुरंत खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि आज हमने जो सुना है, वह केवल उसी की पुष्टि करता है जो हम हर समय कहते आ रहे हैं। कनाडा की ओर से भारत के साथ भारतीय राजनयिकों पर जो गंभीर आरोप लगाए उनके समर्थन में भारत को कोई सबूत नहीं दिया है। उन्होंने आगे कहा भारत-कनाडा संबंधों को जो नुकसान हुआ है। उसकी पूरी जिम्मेदारी कनाडाई पीएम ट्रूडो की है। इस लापरवाह व्यवहार से भारत-कनाडा संबंधों को जो नुकसान हुआ है। उसकी जिम्मेदारी अकेले कनाडा पीएम ट्रूडो की है।