राजनीति कब कहां और कौन से मुद्दे को लेकर शुरु हो जाए कोई नहीं जानता है। अब चॅूकि 28 मई को वीर सावरकर के जन्म दिन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नए संसद भवन का उद्घाटन करने जा रहे है। दो साल में बनकर तैयार हुए इस भवन की मांग दोनों सदनों ने 5 अगस्त, 2019 को की थी,इसके बाद 10 दिसंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संसद के नए भवन का शिलान्यास किया गया था।
विपक्ष का माइक बंद है, नए भवन की जरूरत क्या है
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने नए संसद भवन में चल रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री की एक तस्वीर साझा करते हुए ट्वीट किया, ‘28 मई को उद्घाटन किए जाने वाले नए संसद भवन के एकमात्र वास्तुकार, डिजाइनर और श्रमिक. तस्वीर सबकुछ बयां करती है… व्यक्तिगत महात्वाकांक्षा वाली परियोजना।’वहीं कांग्रेस के सांसद और लोकसभा में पार्टी के सचेतक मणिकम टैगोर ने ट्वीट किया,‘संसद भवन सिर्फ ईंट और सीमेंट की बनी दीवारें नहीं है, यह बेजुबानों की जुबान है।’ उन्होंने सवाल किया है,‘यह जगह की बात नहीं है… यह सुविधाओं की बात नहीं है… यह आवाज है। लेकिन जब विपक्ष के माइक ही बंद हैं तो इसकी जरूरत क्या है।’
राहुल गांधी के निशाने पर रही है नई संसद
इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कई बार नए संसद भवन को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। गांधी ने पहली बार 14 दिसंबर 2019 को रामलीला मैदान में ‘भारत बचाओ रैली’ में सावरकर के जरिए भाजपा पर काफी आक्रामक हमले किए थे। झारखंड की रैली में ‘रेप इन इंडिया’ वाले बयान पर भाजपा की माफी मांगने की मांग पर राहुल गांधी ने कहा था, ‘ये लोग कहते हैं माफी मांगो। मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है, राहुल गांधी है। मैं सच बात बोलने के लिए कभी माफी नहीं मांगूंगा। मर जाऊंगा, पर माफी नहीं मांगूंगा।’ इसके बाद राहुल गांधी अक्सर सावरकर पर हमले करते रहते हैं। पिछले साल भारत जोड़ो यात्रा के समय राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के वाशिम ज़िले में आयोजित एक रैली में सावरकर को लेकर भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा था कि एक ओर बिरसा मुंडा जैसी महान शख्सियत हैं, जो अंग्रेजों के सामने झुकी नहीं और दूसरी ओर सावरकर हैं, जो अंग्रेजों से माफी मांग रहे थे।
नए भवन से शुरु होगा नया घमासान
नए संसद भवन के शिलान्यास से लेकर भवन के उद्घाटन तक कांग्रेस लगातार हमलावर रही है। किसी न किसी बहाने केंद्र सरकार पर निशाना साधती रही है। अब बताया जा रहा है कि नए संसद भवन में ही मानसून सत्र की शुरुआत हो सकती है। ऐसे में भवन को लेकर विपक्ष हमला करेगी इस संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। वीर सावरकर के बहाने कांग्रेस को राजनीति का एक नया बहाना मिल जाएगा। कई जानकारों का कहना है कि भाजपा चाहती है कि सावरकर के बहाने सियासत गर्माती रहे। चॅूकि महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में सावरकर का एक अपना क्रेज है। यही कारण है कि जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सावर पर तंज कसे थे तो शिवसेना ने गठबंधन तोड़ने की भी धमकी दे दी थी। इसलिए भाजपा चाहती है कि सावरकर के बहाने कांग्रेस बयानबाज करती रहे। इससे कांग्रस को नफा कम नुकसान ज्यादा होने की संभावना है। इसलिए 28 मई को सावरकर के जन्मदिवस पर नए संसद भवन का उद्घाटन करने का निर्णय लिया गया है।