​तीन बहनों की आत्महत्या का केस: रात में अंतिम संस्कार क्यों?…पिता के दावे, डायरी के खुलासे और पुलिस जांच के बीच उलझी कहानी

What is the truth behind the suicide of three sisters from Ghaziabad

तीन बहनों की मौत, हर दावे की जांच

गाजियाबाद की भारत सिटी सोसायटी में नौवीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली तीन नाबालिग बहनों के मामले में पुलिस हर दावे और हर पहलू की गहन जांच कर रही है। घटना के बाद सामने आए पिता के बयानों, सोशल मीडिया पर फैली कहानियों और जमीनी तथ्यों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देने लगा है। पुलिस अब किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सबूतों को प्राथमिकता दे रही है।

पिता के दावे पर उठे सवाल

घटना के बाद पिता चेतन कुमार ने दावा किया था कि उनकी बेटियां पिछले तीन वर्षों से एक कोरियाई टास्क-आधारित गेम या ऐप की लत में थीं। उनका कहना था कि इसी वजह से बच्चियों ने स्कूल जाना छोड़ दिया और सामाजिक रूप से खुद को अलग-थलग कर लिया। शुरुआती दौर में यही दावा घटना की मुख्य वजह के तौर पर सामने आया, लेकिन अब पुलिस की जांच इस कहानी से मेल नहीं खा रही।

डिजिटल सबूतों की कमी

पुलिस ने बच्चियों के मोबाइल फोन, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई है। अब तक की जांच में किसी भी ऐसे कोरियाई गेम, ऐप या टास्क-आधारित प्लेटफॉर्म के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं, जो आत्महत्या जैसी घटना को सीधे जोड़ सकें। ट्रांस-हिंडन के डीसीपी निमिष पाटिल ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस दावे की पुष्टि करने वाला कोई तकनीकी साक्ष्य पुलिस के पास नहीं है।

डायरी से बदली जांच की दिशा

जांच के दौरान पुलिस को तीनों बहनों के कमरे से नौ पन्नों की एक पॉकेट डायरी मिली, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। यह डायरी भावनाओं, संघर्ष और अंदरूनी पीड़ा से भरी हुई है। इसमें कोरियाई संस्कृति के प्रति रुचि का उल्लेख जरूर है, लेकिन किसी खास ऐप या गेम का जिक्र नहीं मिलता। इसके उलट, डायरी घरेलू तनाव और पारिवारिक टकराव की ओर इशारा करती है।

पसंद और भविष्य को लेकर संघर्ष

डायरी के कई हिस्सों में यह साफ झलकता है कि बच्चियां अपनी पसंद और भविष्य को लेकर परिवार से लगातार टकराव महसूस कर रही थीं। उन्होंने लिखा है कि उनकी इच्छाओं को समझने और स्वीकार करने के बजाय दबाया जा रहा था। शादी और करियर को लेकर भी असहमति का जिक्र डायरी में मिलता है, जो मानसिक दबाव को और गहरा बनाता है।

शारीरिक सजा का संवेदनशील जिक्र

डायरी का सबसे गंभीर और संवेदनशील हिस्सा वह है, जिसमें कथित तौर पर शारीरिक सजा का उल्लेख मिलता है। एक पंक्ति में लिखा गया वाक्य— “आपकी मार से बेहतर हमारे लिए मौत है… सॉरी पापा”—पूरे मामले को झकझोर देता है। पुलिस इन पंक्तियों को बेहद गंभीरता से ले रही है और यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या बच्चियों पर किसी तरह का शारीरिक या मानसिक दबाव लगातार बनाया जा रहा था।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के निष्कर्ष

तीनों बहनों के शवों का पोस्टमॉर्टम कराया गया, जिसमें मौत का कारण सिर में गंभीर चोट लगना बताया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह चोटें ऊंचाई से गिरने के कारण आई हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने मौत के तरीके की पुष्टि तो कर दी, लेकिन आत्महत्या के पीछे के कारणों को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं।

रात में अंतिम संस्कार पर सवाल

पोस्टमॉर्टम के बाद बुधवार देर रात दिल्ली के निगम बोध घाट पर तीनों बहनों का अंतिम संस्कार किया गया। शालीमार गार्डन के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अतुल कुमार सिंह ने बताया कि अंतिम संस्कार उनके पिता ने किया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि अंतिम संस्कार रात में ही क्यों किया गया। पुलिस इसे परिवार का निजी निर्णय मान रही है, लेकिन कई लोग इतनी बड़ी घटना के बाद जल्दबाजी में लिए गए इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।

पुलिस की सतर्कता और आगे की जांच

गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि फिलहाल अंतिम संस्कार के समय और तरीके को लेकर कोई संदिग्ध तथ्य सामने नहीं आया है। इसके बावजूद, पुलिस हर पहलू को खुले दिमाग से जांच रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी एक कहानी या दावे के आधार पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। डायरी, पारिवारिक हालात और डिजिटल सबूत—सभी को जोड़कर ही सच तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

सच की तलाश जारी

तीन नाबालिग बहनों की मौत ने समाज, परिवार और सिस्टम—तीनों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह केवल किसी ऐप की लत का मामला था या घरेलू तनाव की अनदेखी का नतीजा? पुलिस की जांच का अगला चरण इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने पर केंद्रित है। फिलहाल, इस दर्दनाक घटना में सच और झूठ के बीच की रेखा को साफ करने की कोशिश जारी है।

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