दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 फरवरी यानी गुरुवार को जब राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा पर जवाब दे रहे थे तो वह कांग्रेस पर पूरी तरह हमलावर थे। उन्होंने अपने भाषण में अनुच्छेद 356 का भी जिक्र किया। पहले देखते हैं, उन्होंने कहा क्या? उन्होंने कहा, ‘जरा इतिहास उठा करके देख लीजिए, वो कौन पार्टी थी, वो कौन सत्ता में बैठे थे, जिन्होंने अनुच्छेद 356 का सबसे ज्यादा दुरुपयोग किया? 90 बार चुनी हुई सरकारों को गिरा दिया. कौन हैं वो, कौन हैं जिन्होंने किया, कौन हैं जिन्होंने किया, कौन हैं जिन्होंने किया? केरल में आज जो लोग इनके साथ खड़े हैं जरा याद कर लीजिए। केरल में वामपंथी सरकार चुनी गई जिसे पंडित नेहरू पसंद नहीं करते थे कुछ ही समय के भीतर चुनी हुई पहली सरकार को गिरा दिया।’
आर्टिकल 356 का इस्तेमाल
अब जरा देखते हैं कि जिस अनुच्छेद का जिक्र पीएम ने अपने भाषण में किया है, वह अब तक कितनी बार और किन राज्यों में लग चुका है? इस अनुच्छेद के जरिए किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है और अब तक केवल छत्तीसगढ़ और तेलंगाना ही इससे बचे हुए हैैं। गृह मंत्रालय के एक जवाब के मुताबिक राष्ट्रपति शासन अब तक सबसे अधिक बार उत्तर प्रदेश में 10 बार लगाया गया है, जबकि सबसे अधिक समय यानी 3000 दिनों से भी अधिक तक पंजाब में लगा है।
कांग्रेस पार्टी जब शासन में रही, तो सबसे अधिक 84 बार राष्ट्रपति शासन लगा। यह कुल समय का 73 फीसदी है।
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 356
संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत, राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता के मामले में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। इसमें शर्त यह है कि राष्ट्रपति अगर, राज्य के राज्यपाल से एक रिपोर्ट प्राप्त करने पर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर ऐसी हालत में, जब वह मानते हैं कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें सरकार राज्य के संविधान के प्रावधानों के अनुसार काम नहीं कर सकती है।
- 1951 में पंजाब में पहली बार अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल किया गया था
- इसके बाद, इस अनुच्छेद का बहुत बार गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता था
- सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में एसआर बोम्मई बनाम भारत संघ मामले पर अपने फैसले में राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश स्थापित किए
- राष्ट्रपति अमूमन केंद्रीय कैबिनेट की राय पर काम करते हैं
- यदि दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किया जाता है, तो राष्ट्रपति शासन छह महीने तक लगा सकते हैं
- हर छह महीने में संसद की मंजूरी से अधिकतम तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है
- भारतीय संविधान की ड्राफ्टिंग कमिटि के चेयरमैन भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद 356 को ‘संविधान का मृत पत्र’ कहा था और उन्होंने संविधान सभा की बहस में यह भी कहा कि अनुच्छेद 356 का ‘राजनीतिक लाभ के लिए दुरुपयोग’ किया जा सकता है
कब लग सकता है अनुच्छेद 356
अनुच्छेद 356 भारतीय संविधान में निहित ऐसी शक्ति है, जिसका इस्तेमाल बिल्कुल अंतिम स्थिति में ही करने की सलाह दी गयी है। किसी भी राज्य में इसका इस्तेमाल तब होता है, जब विधायिका उस राज्य के राज्यपाल द्वारा निर्धारित समय के लिए मुख्यमंत्री के रूप में एक नेता का चुनाव करने में असमर्थ है। इसका तब भी प्रयोग होता है जब किसी गठबंधन के टूटने से मुख्यमंत्री को सदन में अल्पसंख्यक समर्थन ही रहता है और मुख्यमंत्री उस राज्य के राज्यपाल द्वारा निर्धारित समय के भीतर बहुमत साबित करने में विफल रहते हैं या ऐसी संभावना है।
युद्ध, महामारी, या प्राकृतिक आपदाओं जैसे अपरिहार्य कारणों से चुनाव स्थगित हो जाए, तो भी अनुचछेद 356 का प्रयोग होता है. या फिर, राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट प्रतिकूल हो, राज्य की संवैधानिक मशीनरी या विधायिका संवैधानिक मानदंडों का पालन करने में विफल रहे तो भी इसका प्रयोग कर सकते हैं।
(संविधान विशेषज्ञ रूपेश पाठक से बातचीत पर आधारित)
