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देशव्यापी SIR: अगले साल जिन 5 राज्यों में होंगे चुनाव, वहां के क्या हैं राजनीतिक और वोटर समीकरण — पूरी रिपोर्ट

DigitalDesk by DigitalDesk
October 27, 2025
in दिल्ली, मुख्य समाचार, राजनीति, संपादक की पसंद
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What are the political and voter equations in the five states where elections will be held next year
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देशव्यापी SIR: अगले साल जिन 5 राज्यों में होंगे चुनाव, वहां के क्या हैं राजनीतिक और वोटर समीकरण — पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली। देश में एक बार फिर SIR (Special Summary Revision) यानी मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। 2002 के बाद यह पहली बार होगा जब चुनाव आयोग इस प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में लागू करेगा। इसका सीधा असर 2026 में होने वाले पांच बड़े विधानसभा चुनावों — असम, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, केरल और पुड्डुचेरी — पर पड़ेगा। इन राज्यों में राजनीतिक तापमान पहले ही बढ़ने लगा है और अब वोटर लिस्ट की सफाई से लेकर नए मतदाताओं के जुड़ने तक का काम तय करेगा कि चुनावी समीकरण किस ओर झुकेंगे।

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  • बिहार के बाद अब देशव्यापी SIR
  • 2008 के बाद फिर दिल्ली में SIR
  • विपक्ष ने SIR पर उठाए सवाल
  • पहले चरण में 15 राज्यों की बारी
  • वोटर लिस्ट से हटेंगे डुप्लीकेट नाम

क्या है SIR और क्यों है यह अहम

SIR यानी Special Summary Revision of Electoral Rolls — एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें चुनाव आयोग पूरे राज्य या देश की वोटर लिस्ट का गहन पुनरीक्षण करता है। इसका उद्देश्य है। डुप्लीकेट या मृत वोटरों को हटाना। स्थानांतरित मतदाताओं की एंट्री अपडेट करना। नए पात्र मतदाताओं (18+) को जोड़ना और लिस्ट की पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करना। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया इस बार दो चरणों में होगी। पहले चरण में 10 से 15 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल होंगे — जिनमें प्रमुख रूप से वे राज्य हैं जहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। दूसरे चरण में वे राज्य होंगे, जहां स्थानीय निकाय या पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं।

बिहार के बाद अब देशभर में शुरू होगा SIR

बिहार में हाल ही में यह प्रक्रिया पूरी की गई थी, जहां चुनाव से पहले 7.89 करोड़ वोटरों की सूची को पुनरीक्षित किया गया। इस प्रक्रिया में 3.66 लाख अयोग्य वोटरों को हटाया गया। 21.53 लाख नए पात्र वोटर जोड़े गए और 65 लाख नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए गए। अंतिम सूची में 7.42 करोड़ मतदाता शामिल रहे। अब बिहार के बाद, चुनाव आयोग अगले कुछ हफ्तों में देश के अन्य हिस्सों में SIR शुरू करने जा रहा है। आयोग का कहना है कि इस बार प्रक्रिया डिजिटल ऑडिट सिस्टम और आधार-वोटर लिंकिंग सत्यापन से और अधिक सटीक होगी।

पांच राज्यों का पूरा विश्लेषण

असम: बीजेपी के सामने ‘हैट्रिक’ की चुनौती अगले साल मार्च-अप्रैल में असम में चुनाव होने की संभावना है। इस राज्य में आखिरी बार SIR साल 2004 में हुआ था, जब कुल 1.7 करोड़ वोटर थे। अब यह संख्या बढ़कर 2.6 करोड़ तक पहुंच गई है। राज्य में हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में एनडीए सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में है। बीजेपी की कोशिश है कि तीसरी बार भी जीत की हैट्रिक लगाई जाए। हालांकि, विपक्षी कांग्रेस और AIUDF यहां अल्पसंख्यक वोट बैंक पर फोकस कर रही हैं। SIR से यह पता चलेगा कि राज्य में कितने नए युवा वोटर जुड़े हैं और क्या NRC के बाद वोटर प्रोफाइल में कोई बड़ा बदलाव आया है। राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से असम का SIR बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि यहां नागरिकता और पहचान का मुद्दा हमेशा से केंद्र में रहा है।

तमिलनाडु: डीएमके बनाम एआईएडीएमके की पुरानी जंग फिर होगी ताजा तमिलनाडु में आखिरी बार SIR साल 2003 में कराया गया था। उस समय यहां 4.6 करोड़ वोटर थे, जो अब बढ़कर 6.3 करोड़ हो चुके हैं। राज्य में एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके सरकार है, जो केंद्र की भाजपा सरकार से लगातार टकराव की मुद्रा में रही है। अगले साल के चुनाव में डीएमके की कोशिश अपनी पकड़ बनाए रखने की होगी, जबकि एआईएडीएमके और बीजेपी गठबंधन के जरिये मैदान में उतर सकते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नए युवा मतदाता, जो 2003 के बाद वोटर बने हैं, वे तमिलनाडु की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। इस बार के SIR से तमिलनाडु की राजनीतिक तस्वीर को नया आयाम मिलने वाला है।

पश्चिम बंगाल: ममता बनाम भाजपा, वोटर लिस्ट पर शुरू हुआ संग्राम

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर पहले ही विवाद शुरू हो चुका है। राज्य में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा के बीच टकराव चरम पर है। यहां आखिरी बार 2002 में वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण हुआ था, तब 5.8 करोड़ वोटर थे। अब यह संख्या बढ़कर 7.4 करोड़ तक पहुंच चुकी है। राज्य में भाजपा लगातार TMC पर “फर्जी वोटर” जोड़ने के आरोप लगा रही है, जबकि TMC का कहना है कि SIR के नाम पर केंद्र सरकार बंगाल में “राजनीतिक हस्तक्षेप” कर रही है। इस बार SIR के दौरान NRC की तरह माहौल गर्माने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अगर SIR के जरिए 18 से 25 वर्ष के नए मतदाताओं का बड़ा वर्ग जोड़ा गया, तो इसका लाभ भाजपा को मिल सकता है।

केरल: वाम मोर्चे की सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा नया पुनरीक्षण

केरल में आखिरी बार 2003 में SIR कराया गया था। उस समय यहां 2.3 करोड़ वोटर थे, जो अब 2.8 करोड़ हो गए हैं। राज्य में पी. विजयन के नेतृत्व में वाम मोर्चा (LDF) सरकार है, जबकि कांग्रेस की अगुवाई वाला UDF विपक्ष में है। यहां SIR को लेकर कुछ विपक्षी दलों ने विरोध शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि पुनरीक्षण के नाम पर कुछ इलाकों में वोटरों की संख्या कम करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और सभी पार्टियों की उपस्थिति में होगी। केरल में हर चुनाव में अंतर बहुत कम रहता है, ऐसे में SIR का परिणाम यहां की सत्ता की दिशा तय कर सकता है।

पुड्डुचेरी: छोटा राज्य, लेकिन बड़ी राजनीतिक गर्मी

पुड्डुचेरी, जो केंद्र शासित प्रदेश है, में आखिरी बार 2003 में SIR हुआ था। तब यहां 7 लाख वोटर थे, अब इनकी संख्या 10 लाख हो चुकी है। यहां वर्तमान में एनडीए की सरकार है, लेकिन कांग्रेस और डीएमके गठबंधन इसे कड़ी चुनौती देने की तैयारी में हैं।पुड्डुचेरी का SIR तमिलनाडु से जुड़ा माना जाता है क्योंकि कई निर्वाचन क्षेत्र भाषाई और सांस्कृतिक रूप से आपस में जुड़े हुए हैं। इसलिए यहां का पुनरीक्षण तमिलनाडु के राजनीतिक परिदृश्य पर भी असर डाल सकता है।

विपक्ष की आलोचना और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

बिहार में SIR को लेकर विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि यह प्रक्रिया चुनाव से ठीक पहले कराई जा रही है ताकि वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ की जा सके। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, हालांकि अदालत ने इसे चुनाव आयोग का प्रशासनिक अधिकार बताया। अब अन्य राज्यों में भी विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से आग्रह किया है कि SIR की प्रक्रिया निष्पक्ष और निगरानी में कराई जाए, ताकि किसी भी तरह के राजनीतिक पक्षपात की आशंका न रहे।

तकनीकी बदलाव: अब डिजिटल सत्यापन और आधार लिंकिंग
इस बार चुनाव आयोग SIR के लिए डिजिटल सत्यापन सिस्टम लागू कर रहा है। इसमें वोटरों के नाम, पता, जन्मतिथि और पहचान पत्र को आधार और जनगणना डेटाबेस से मिलाया जाएगा। इससे मृत, डुप्लीकेट या फर्जी वोटरों की पहचान तेजी से हो सकेगी। इसके अलावा आयोग ने मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से फॉर्म 6, 7 और 8 जमा करने की सुविधा दी है।

SIR से बदलेगा राजनीतिक गणित

आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह SIR प्रक्रिया कई राज्यों में राजनीतिक संतुलन को बदल सकती है। असम में NRC के बाद नई मतदाता सूची राजनीतिक बहस को फिर जगा सकती है, तमिलनाडु और पुड्डुचेरी में डीएमके और बीजेपी के बीच नए समीकरण बन सकते हैं, जबकि बंगाल और केरल में यह सत्ता परिवर्तन का निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। स्पष्ट है, SIR सिर्फ वोटर लिस्ट का अपडेट नहीं, बल्कि आने वाले साल के राजनीतिक भविष्य की रूपरेखा तय करने वाला कदम है। जहां हर राज्य की नई मतदाता सूची, चुनावी किस्मत का फैसला लिखेगी। (प्रकाश कुमार पांडेय)

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Tags: #elections will be held next year#Nationwide SIR#political and voter equationsfive states
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