पश्चिम बंगाल की नंदी ग्राम सीट से ममता बेनर्जी चुनाव नहीं ल़ड़ेंगी। टीएमसी ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे को टिकट दे दिया है। टीएमसी के नाम के ऐलान के साथ ही ये साफ तौर पर सामने आ गया कि ममता बेनर्जी फिलहाल विधानसभा से बाहर रहकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले रहेंगी।
नंदीग्राम और ममता बेनर्जी का है सालों का नाता
नंदीग्राम और ममता बेनर्जी का नाता सालों पुराना है। कहा जा सकता है कि ममता बेनर्जी के राजनीति में नंदीग्राम आंदोलन का बड़ी अमह भूमिका रही। नंदीग्राम के आंदोलन के बाद ममता बेनर्जी पश्चिम बंगाल की राजनीति में गेम चेंजर बन गई उन्होंने लेफ्ट की तीन दशक से भी ज्यादा पुरानी सरकार का तख्ता पलट कर दिया।
2007 में किया था नंदीग्राम में आंदोलन
2007 में वाम सरकार नंदीग्राम इलाके में स्पेशल इक़ॉमिक जोन बनाना चाहती थी। इसके लिए सरकार किसानों सेजमनी का अधिग्रहण कर रही थी। ममता बेनर्जी ने जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन किया । आंदोलन को किसानों और गांव के लोगों का इतना साथ मिला कि -अगले चुनावों में लेफ्ट का 34 साल पुराना किला ठह गया और ममता बेनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में बंपर बहुमत से सरकार बनाई।
15 साल बाद ममता सदन से बाहर
ममता बेनर्जी पूरे 15 साल बाद नंदीग्राम से दूर है। अटकलें थी कि ममता नंदीग्राम के उपचुनावों को लड़कर विधानसभा जा सकती हैं लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जानकार मानते है कि उपचुनाव ज्यादातर सरकार के पक्ष में होते हैं ऐसे में अगर ममता एक बार चुनाव हार जाती तो टीएमसी के लिए हालात और नाजुक हो जाते और पार्टी में फिर से कोई टूट हो सकती थी।शायद इसीलिए ममता बेनर्जी ने खुद को फिलहाल के लिए चुनावी राजनीति से अलग कर लिया है।