18 जुलाई 2025 का मौसम अलर्ट: उत्तर भारत में तूफानी बारिश का कहर, दक्षिण और पूर्वोत्तर में भी भारी जलवृष्टि के आसार
जुलाई माह का एक पखवाड़ा पूरा हो चुका है। देश भर में मानसून भी पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। इसका व्यापक असर अब साफ़ नजर आ रहा है। मानसूनी बारिश से जहां किसानों के चेहरे खिले हुए हैं तो वही कुछ परेशानियां भी सामने आ रही है। बाढ़ और जल जमाव के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त का नजर आ रहा है।
आज शुक्रवार 18 जुलाई की बात करें तो भारत मौसम विज्ञान विभाग IMD की ओर से 18 जुलाई को देश के विभिन्न हिस्सों में तेज बारिश के साथ आंधी-तूफान और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। खासतौर पर मौसम विभाग ने उत्तर भारत, पूर्वोत्तर, मध्य भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में आने वाले 24 घंटे बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं।
शुक्रवार को कैसा रहेगा मौसम
आज 18 जुलाई को मौसम के तूफानी रहने के आसार
आंधी के साथ बरसेगा झमाझम पानी
वज्रपात की भी चेतावनी जारी
मानसून की सक्रियता से यूपी, बिहार
राजस्थान, हरियाणा-पंजाब
दिल्ली-एनसीआर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड
उत्तर भारत के अधिकतर इलाकों में आंधी के साथ बारिश
दक्षिण भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक देखा जा सकता है ऐसा मौसम
उत्तर भारत में तेज बारिश और वज्रपात की चेतावनी
उत्तर भारत के प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली-एनसीआर में गंभीर मौसम गतिविधियों के संकेत मिल रहे हैं। आसमान में काले घने बादल छाए हुए हैं और तेज हवाएं चल रही हैं, जिससे तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है। हालांकि, इसके साथ ही वज्रपात, तेज आंधी और भारी बारिश की संभावना भी बढ़ गई है।मौ सम विभाग ने बताया है कि 18 जुलाई को इन राज्यों में मेघ गर्जन, झमाझम बारिश, और तेज हवाएं चल सकती हैं।
दिल्ली-एनसीआर में सुबह और शाम के समय गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है, जिससे ट्रैफिक और जनजीवन प्रभावित हो सकता है।
हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में भी वज्रपात और ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है।
हिमालयी राज्यों में बादल फटने और लैंडस्लाइड का खतरा
उत्तर भारत के पहाड़ी इलाकों जैसे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में मौसम का मिजाज काफी अनिश्चित बना हुआ है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इन इलाकों में बादल फटने, अचानक बाढ़ आने, और भूस्खलन (landslide) जैसी घटनाएं हो सकती हैं।
चारधाम यात्रा पर निकले यात्रियों को प्रशासन ने अलर्ट पर रखा है। स्थानीय प्रशासन द्वारा कई संवेदनशील क्षेत्रों में आवाजाही को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजस्थान में रिकॉर्डतोड़ बारिश
जलमग्न कोटा का रामगंजमंडी
राजस्थान में मानसून की रफ्तार ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। 18 जुलाई को पूर्वी राजस्थान में विशेष रूप से कोटा, भरतपुर, अजमेर, जयपुर और उदयपुर संभाग में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग की ओर से जारी कर दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, रामगंजमंडी (कोटा) में पिछले 24 घंटों में 186 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो कि सीजन की सबसे अधिक है। बीकानेर और जोधपुर संभाग में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
एक नया मॉनसून सिस्टम दक्षिण-पश्चिम बिहार और उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय है, जो धीरे-धीरे राजस्थान की ओर बढ़ रहा है। कोटा और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बन रही है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे बिना जरूरत घरों से बाहर न निकलें और जलजमाव या ढलान वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
दक्षिण भारत में मानसून का कहर, नदियां उफान पर
दक्षिण भारत में भी मानसून सक्रिय है और तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, हैदराबाद और केरल के कई हिस्सों में अतिवृष्टि की स्थिति बन गई है। केरल और कर्नाटक की कई नदियां उफान पर हैं और निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश के कारण सड़क परिवहन बाधित हुआ है। प्रशासन द्वारा स्कूलों को बंद करने और राहत दलों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं। अगले 48 घंटे इन क्षेत्रों के लिए अत्यधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं।
पूर्वोत्तर और मध्य भारत में जारी रहेगा बारिश का दौर
पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम की गतिविधियां तेज हैं। असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम, मणिपुर और नगालैंड में 18 जुलाई को भारी बारिश के आसार हैं। कुछ क्षेत्रों में भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं। पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी अगले 24 घंटों में तेज बारिश की संभावना है। वहीं, मध्य भारत के राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में भी मानसूनी हवाओं के चलते बारिश की गतिविधियां बनी रहेंगी। खासतौर पर छत्तीसगढ़ के बस्तर और रायगढ़, महाराष्ट्र के विदर्भ और मराठवाड़ा, और गुजरात के दक्षिणी हिस्सों में अच्छी बारिश होने के संकेत हैं।
मौसम विशेषज्ञों की राय
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जुलाई का तीसरा सप्ताह पूरे भारत में अत्यधिक मानसूनी सक्रियता लेकर आया है। यह गतिविधियां अगले कुछ दिनों तक बनी रहेंगी। कुछ क्षेत्रों में औसत से दोगुनी वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग की वेबसाइट और मोबाइल ऐप्स से अपडेट लेते रहें। वज्रपात से बचने के लिए खुले स्थानों, पेड़ों और टावरों के नीचे खड़े न हों।
उत्तर भारत, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी से अति भारी बारिश, वज्रपात, आंधी-तूफान और बाढ़ जैसी आपदाओं की आशंका बनी हुई है। ऐसे में सावधानी और सतर्कता ही सबसे बड़ा उपाय है। प्रशासन और मौसम विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। अब ज़रूरत है कि आमजन समय रहते सतर्कता बरतें और मौसम के अनुसार दिनचर्या को ढालें। बारिश जीवन देती है, लेकिन लापरवाही जान भी ले सकती है।..प्रकाश कुमार पांडे





