वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज का आश्रम इन दिनों एक के बाद एक सामने आ रहे मामलों को लेकर चर्चा में है। विवाद की शुरुआत 25 सितंबर को रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत से हुई। 25 वर्षीय दीपक गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए थे। पुलिस की शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या माना गया, लेकिन पोस्टमार्टम में गंभीर चोटों और कमरे से ग्राइंडर मिलने के बाद पुलिस अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही है। परिजन भी मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
रसिक दुलारी की मौत ने खड़े किए कई सवाल
पुलिस के मुताबिक शुरुआती तौर पर मामला आत्महत्या का है। वहीं पोस्टमार्टम में शरीर पर गंभीर चोटें सामने आईं और निजी अंग पर चोट के तथ्य की भी जांच हो रही है। कमरे से ग्राइंडर मिलने की जानकारी सामने आई है। परिवार ने घटना को लेकर संदेह जताते हुए गहराई से जांच की मांग की है। फिलहाल किसी साजिश की पुष्टि नहीं हुई है।
अनुज के मामले से फिर बढ़ा आश्रम पर दबाव
हाथरस के 18 वर्षीय अनुज चौधरी के परिजनों ने आरोप लगाया कि वह करीब तीन महीने से आश्रम से जुड़ा था और उन्हें उससे मिलने की जानकारी नहीं दी गई। रसिक दुलारी की मौत के बाद मामला सामने आने पर मीडिया और प्रशासन के दबाव के बीच आश्रम प्रबंधन ने अनुज के मौजूद होने की बात स्वीकार की और उसे परिवार को सौंपने की बात कही।
नोएडा की विभा की तलाश भी आश्रम तक पहुंची
नोएडा की 38 वर्षीय विभा कुमारी 15 अगस्त से लापता हैं। उनके पिता शुक्रवार को वृंदावन के श्रीराधा केलिकुंज पहुंचे। परिवार का कहना है कि विभा प्रेमानंद महाराज की भक्त थीं और उनके प्रवचन सुनती थीं। हालांकि, रिपोर्ट में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि विभा आश्रम में ही हैं।
मौत के बाद आश्रम की व्यवस्थाओं में बड़ा बदलाव
रसिक दुलारी की मौत के बाद केली कुंज में नए भक्तों की दीक्षा अनिश्चितकाल के लिए रोक दी गई है और टोकन के जरिए दर्शन की व्यवस्था भी फिलहाल बंद है। शिष्यों की वेशभूषा को लेकर भी नए निर्देश जारी किए गए हैं। ये बदलाव आश्रम की ओर से हालिया घटनाओं के बाद किए गए हैं।
प्रेमानंद महाराज की छवि और उठता बड़ा सवाल
प्रेमानंद महाराज लंबे समय से गंभीर पॉलीसिस्टिक किडनी डिजीज से जूझ रहे हैं और उनकी दोनों किडनियां खराब होने की रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं। वे अपने प्रवचनों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर डॉक्टर से सलाह लेने की बात भी करते रहे हैं। उनके अनुयायी उनकी आध्यात्मिक आस्था को उनकी सक्रियता से जोड़ते हैं, लेकिन इसे चिकित्सकीय तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये अलग-अलग घटनाएं हैं या इनके पीछे कोई साझा कारण है? अभी उपलब्ध जानकारी किसी षड्यंत्र की पुष्टि नहीं करती। सच पुलिस जांच, फॉरेंसिक रिपोर्ट और आगे सामने आने वाले साक्ष्यों से ही स्पष्ट होगा।





