यूपी, एमपी, राजस्थान सहित 12 राज्यों में वोटर वेरिफिकेशन महा अभियान का आगाज…घर घर दस्तक देंगे BLOनई दिल्लीः भारत के 12 राज्यों में 4 नवंबर से मतदाता सूची सत्यापन (SIR – Special Intensive Revision) का महा अभियान शुरू हो रहा है। इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, गोवा, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप के मतदाताओं के घर-घर जाकर BLO यानी बूथ लेवल ऑफिसर पहुंचेंगे। वे मतदाता सूची के सत्यापन के लिए फार्म बांटेंगे, आवश्यक दस्तावेजों की जांच करेंगे और चार दिसंबर तक यह पूरा अभियान चलेगा। इस दौरान हर BLO मतदाता के घर तीन बार आएगा। अगर कोई व्यक्ति घर पर नहीं मिला तो BLO नोटिस छोड़ जाएगा। वोटर फॉर्म भरकर बीएलओ को देना होगा, जिसे आगे स्थानीय चुनाव कार्यालय में जमा किया जाएगा।
तीन बार घर आएंगे BLO
नहीं मिले तो नोटिस छोड़कर जाएंगे
आधार कार्ड नहीं होगा मान्य
27 अक्टूबर को आयोग ने किया था ऐलान
चुनाव आयोग ने इस महा अभियान का ऐलान 27 अक्टूबर को किया था। बिहार में यह प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है और अब दूसरे चरण में बाकी 12 राज्यों में इसे शुरू किया जा रहा है। आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और इसका उद्देश्य देश की मतदाता सूची को अद्यतन, त्रुटिरहित और शुद्ध बनाना है।
इसके तहत न केवल पुराने और मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे, बल्कि जो नए युवा मतदाता 18 वर्ष के हो चुके हैं, उनके नाम भी सूची में जोड़े जाएंगे।
13 दस्तावेजों से होगी पहचान, आधार कार्ड नहीं मान्य
इस बार की प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव किया गया है — आधार कार्ड को मान्य दस्तावेज़ के रूप में नहीं माना जाएगा।
वोटरों को पहचान और निवास साबित करने के लिए 13 में से किसी एक दस्तावेज की प्रति देनी होगी।
आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार ये दस्तावेज मान्य रहेंगे –
पासपोर्ट
जन्म प्रमाणपत्र
मैट्रिकुलेशन या अन्य शैक्षणिक प्रमाणपत्र
सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा जारी पहचान पत्र
स्थायी निवास प्रमाणपत्र
पेंशन भुगतान आदेश
जाति प्रमाणपत्र (SC/ST/OBC)
भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र
फैमिली रजिस्टर
वन अधिकार प्रमाणपत्र
राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) संबंधित प्रमाणपत्र
बैंक, डाकघर या सरकारी प्राधिकरण द्वारा 1 जुलाई 1987 से पहले जारी पहचान पत्र
बिहार एसआईआर का दस्तावेज (जहां लागू)
आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन दस्तावेजों में से कोई भी एक मान्य होगा, लेकिन केवल आधार कार्ड से सत्यापन नहीं किया जाएगा।
51 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचेगा अभियान
एसआईआर के इस दूसरे चरण में देशभर के लगभग 51 करोड़ मतदाताओं को एनुमरेशन फॉर्म बांटे जाएंगे। आयोग ने बताया कि नई वोटर लिस्ट तैयार करते समय पुरानी लिस्ट की पूरी समीक्षा की जाएगी। मृत मतदाताओं, डुप्लिकेट प्रविष्टियों और फर्जी नामों को हटाया जाएगा। इसके साथ ही बांग्लादेश, म्यांमार या अन्य देशों से आए बाहरी नागरिकों के नामों को भी सूची से हटाने की कार्रवाई होगी। अभियान के पूरा होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
असम को क्यों रखा गया बाहर?
हालांकि अगले साल असम में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, फिर भी इस बार उसे एसआईआर प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। इसकी वजह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट की — असम में नागरिकता की जांच पहले से ही सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है और वहां NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) से संबंधित अलग प्रक्रिया लागू है। इसलिए मतदाता सूची संशोधन का काम वहां फिलहाल स्थगित रखा गया है।
इन राज्यों में रहेगी विशेष निगरानी
चुनाव आयोग ने कहा है कि जहां पहले मतदाता सूची को लेकर शिकायतें या विरोध दर्ज किए गए हैं, वहां इस बार अधिक निगरानी और सघन जांच रखी जाएगी। BLO को हर घर का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। यह डेटा केंद्रीय सर्वर से जुड़ेगा ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को तुरंत रोका जा सके। आयोग ने राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि मतदाता सत्यापन के दौरान किसी भी प्रकार के जातीय, धार्मिक या क्षेत्रीय भेदभाव की शिकायत आने पर सख्त कार्रवाई की जाए।
नए मतदाताओं के लिए मौका
इस प्रक्रिया के जरिए 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवाओं के लिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने का बड़ा अवसर है। युवा अपने निकटतम BLO से फॉर्म भरकर जमा कर सकते हैं। इसके अलावा यदि किसी मतदाता का पता बदला है या नाम में कोई त्रुटि है, तो उसे भी इस अभियान के दौरान ठीक करवाया जा सकता है।
पारदर्शी और डिजिटल मॉनिटरिंग
चुनाव आयोग ने इस बार एसआईआर प्रक्रिया को डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा है। प्रत्येक BLO को एक मोबाइल ऐप दिया गया है, जिसमें हर घर की विजिट और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज होगा। इससे यह पता चलेगा कि कौन-सा BLO किस इलाके में गया, कितने फार्म मिले, कितने पेंडिंग हैं और कौन से घरों में लोग अनुपस्थित मिले। आयोग का कहना है कि इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि गलत प्रविष्टियों को भी तुरंत चिन्हित किया जा सकेगा।
कब और कैसे पूरी होगी प्रक्रिया
4 नवंबर 2025: 12 राज्यों में SIR की शुरुआत
4 दिसंबर 2025: फॉर्म इकट्ठा करने की अंतिम तिथि
7 फरवरी 2026: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन
इस दौरान मतदाता सूची में जो भी परिवर्तन होंगे, उनकी सार्वजनिक सूचना दी जाएगी। किसी को भी आपत्ति या सुधार दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा।
लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करने की कवायद
भारत में अंतिम बार व्यापक एसआईआर वर्ष 2002-04 के बीच किया गया था। उसके बाद से आंशिक संशोधन ही होते रहे। इस बार का विशेष अभियान इसलिए अहम है क्योंकि 2026 से पहले कई बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और 2029 में लोकसभा चुनाव भी होने हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, “यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने का प्रयास है। मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता यह सुनिश्चित करेगी कि हर नागरिक का वोट सही जगह गिने और कोई भी फर्जी मतदाता सूची में शामिल न हो। (प्रकाश कुमार पांडेय)





