वोटर अधिकार यात्रा :विधानसभा चुनाव में होगी राहुल तेजस्वी की चुनावी रणनीति की असली परीक्षा… जनता तय करेगी कि विपक्ष की राह
बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी महागठबंधन ने वोटर अधिकार यात्रा के जरिए बड़ा सियासी दांव चला है। 17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई यह यात्रा शनिवार को आरा पहुंची, जहां तेजस्वी यादव, राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने साझा मंच से शक्ति प्रदर्शन किया।
बिहार में 14 दिन, 24 जिले और 50 विधानसभा क्षेत्र
वोटर अधिकार यात्रा से विपक्ष का चुनावी मैसेज
यात्रा का रोडमैप
14 दिन, 1300 किलोमीटर, 24 जिले और 50 विधानसभा क्षेत्र
सासाराम से शुरू होकर गया, नालंदा, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, मधुबनी, दरभंगा, सीवान, छपरा होते हुए यह यात्रा 31 अगस्त को आरा पहुँची।
आज 1 सितंबर को पटना में समापन
बीजेपी और एनडीए सरकार पर विपक्ष का आरोप
विपक्ष का कहना है कि मोदी सरकार वोटर लिस्ट से नाम काटकर लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। राहुल गांधी ने यात्रा के दौरान लगातार बीजेपी और पीएम मोदी पर निशाना साधा। अखिलेश यादव ने कहा – “जैसे अवध की जनता ने बीजेपी को हटाया, वैसे ही मगध के लोग भी हटाएंगे।”
तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार को “नकलची मुख्यमंत्री” बताया और खुद को महागठबंधन का सीएम चेहरा घोषित कर दिया।
विरोध और विवाद
आरा में राहुल गांधी को बीजेपी कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना करना पड़ा, काले झंडे दिखाए गए। जेडीयू ने इस यात्रा को “चुनावी जुमला” बताया। बिहार के मंत्री नीरज कुमार बबलू ने कहा – “राहुल और तेजस्वी अराजकता फैलाना चाहते हैं, इनका जनाधार खिसक चुका है। जनता एनडीए सरकार फिर लाएगी।” उन्होंने यहां तक कह दिया कि “जो प्रधानमंत्री को गाली देता है उसकी जुबान काट देनी चाहिए।” इस बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया।
विपक्ष का मकसद
कांग्रेस और आरजेडी ने यात्रा को ‘लोकतंत्र और मताधिकार बचाने की लड़ाई’ बताया। महागठबंधन ने इसे जनता के अधिकार की रक्षा का अभियान करार दिया। यात्रा का रूट बीजेपी-जेडीयू और चिराग पासवान-मांझी के गढ़ों से होकर तय किया गया, जिससे विपक्ष ने सत्ता पक्ष को सीधी चुनौती देने का संदेश दिया।
यात्रा के राजनीतिक मायने
विश्लेषकों के मुताबिक, इस यात्रा से विपक्ष ने दिखाया कि इंडिया ब्लॉक एकजुट है और चुनावी समीकरण साधने की कोशिश कर रहा है। खासकर दलित-पिछड़ा और मुस्लिम वोट बैंक को साधने पर विपक्ष का फोकस रहा। वहीं एनडीए इसे महज़ चुनावी रणनीति बताकर खारिज कर रहा है। अब असली परीक्षा 2025 विधानसभा चुनाव में होगी, जब जनता तय करेगी कि विपक्ष की यह पदयात्रा सियासी बदलाव का रास्ता खोलेगी या सत्ता पक्ष के लिए सिर्फ एक और चुनौती बनेगी।( प्रकाश कुमार पांडेय)




