बगैर ट्रैफिक जाम होंगे बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब के दर्शन

Visit to Badrinath Dham and Hemkund Sahib without traffic jams

बगैर ट्रैफिक जाम होंगे बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब के दर्शन

हेलंग–मारवाड़ी बाईपास लगभग बनकर तैयार, चार धाम यात्रा 2026 से पहले बड़ी राहत

जोशीमठ।
उत्तराखंड में अप्रैल माह से शुरू होने वाली चार धाम यात्रा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। सड़क, बिजली, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। इसी कड़ी में बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी जाने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत देने वाला हेलंग–मारवाड़ी बाईपास लगभग बनकर तैयार हो चुका है। इसके शुरू होने से यात्रियों को ट्रैफिक जाम से निजात मिलेगी और यात्रा दूरी भी करीब 30 किलोमीटर कम हो जाएगी।

सड़क मार्ग सबसे अहम, लाखों श्रद्धालु करते हैं यात्रा

चार धाम यात्रा में सड़क मार्ग की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है, क्योंकि अधिकांश श्रद्धालु सड़क के जरिए ही बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री पहुंचते हैं। वर्ष 2025 में चार धाम यात्रा के दौरान 50 लाख से अधिक श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचे थे। बढ़ती भीड़ के कारण कई स्थानों पर ट्रैफिक जाम आम समस्या बन गया था, खासकर जोशीमठ और विष्णु प्रयाग क्षेत्र में।

जल्द शुरू होगा हेलंग–मारवाड़ी बाईपास

लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पांडे ने बताया कि हेलंग–मारवाड़ी बाईपास को चार धाम यात्रा 2026 से पहले चालू किए जाने की पूरी उम्मीद है। यह बाईपास बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) द्वारा बनाया जा रहा है और लगभग पूरा हो चुका है। यात्रा शुरू होने से पहले इसे वाहनों के लिए खोलने की तैयारी है, जिससे श्रद्धालु समय पर और बिना किसी रुकावट के अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।

जोशीमठ को बाइपास कर सीधे बदरीनाथ की राह

अब तक बदरीनाथ धाम जाने वाले यात्रियों को पीपलकोठी से हेलंग, फिर जोशीमठ और उसके बाद विष्णु प्रयाग होते हुए बदरीनाथ जाना पड़ता था। यह मार्ग संकरा और सिंगल लेन होने के कारण पीक सीजन में अक्सर जाम की समस्या से जूझता था।
नया हेलंग–मारवाड़ी बाईपास यात्रियों को जोशीमठ में प्रवेश किए बिना ही विष्णु प्रयाग मार्ग से सीधे बदरीनाथ धाम की ओर ले जाएगा। इससे न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि जोशीमठ क्षेत्र पर यातायात का दबाव भी कम होगा।

30 किलोमीटर कम होगा सफर, समय और ईंधन की बचत

इस बाईपास के बनने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि बदरीनाथ जाने वाले वाहनों की यात्रा दूरी करीब 30 किलोमीटर कम हो जाएगी। यह वैकल्पिक मार्ग चमोली जिले में बदरीनाथ नेशनल हाईवे पर लगभग 5 से 6 किलोमीटर लंबा है, लेकिन इससे लंबे और जाम वाले पुराने मार्ग से पूरी तरह बचा जा सकेगा। इसके अलावा सामरिक दृष्टि से भी यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सीमावर्ती क्षेत्रों तक तेज और सुगम पहुंच सुनिश्चित करता है।

हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी को भी लाभ

हेलंग–मारवाड़ी बाईपास का फायदा सिर्फ बदरीनाथ धाम तक सीमित नहीं रहेगा। इसके माध्यम से हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी जाने वाले श्रद्धालु और पर्यटक भी बिना ट्रैफिक जाम के आसानी से अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को भी राहत मिलेगी।

भू-धंसाव के कारण रुका था निर्माण कार्य

इस परियोजना के निर्माण में कुछ बाधाएं भी आईं। जुलाई 2022 में राज्य सरकार ने हेलंग–मारवाड़ी बाईपास के लिए 190 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था और अगस्त से निर्माण कार्य शुरू हुआ। हालांकि, वर्ष 2023 में जोशीमठ क्षेत्र में भू-धंसाव की गंभीर घटना सामने आने के बाद सुरक्षा कारणों से सभी निर्माण कार्य रोक दिए गए। करीब छह महीने तक काम ठप रहा। इसके बाद बीआरओ की मांग पर आईआईटी रुड़की से जियोटेक्निकल सर्वे कराया गया। रिपोर्ट में निर्माण को सुरक्षित बताया गया, जिसके बाद फिर से काम शुरू हुआ और अब यह अंतिम चरण में है।

चार धाम में ट्रैफिक सबसे बड़ी चुनौती

हर साल चार धाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। इसी को देखते हुए ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत सड़कों का चौड़ीकरण, पार्किंग सुविधाओं का विकास और ट्रैफिक प्रबंधन पर लगातार काम किया जा रहा है। इसके बावजूद भीड़ के चलते ट्रैफिक जाम एक बड़ी चुनौती बना रहता है। हेलंग–मारवाड़ी बाईपास जैसे वैकल्पिक मार्ग इस समस्या को काफी हद तक कम करने में सहायक साबित होंगे।

श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत

कुल मिलाकर, हेलंग–मारवाड़ी बाईपास के शुरू होने से चार धाम यात्रा अधिक सुगम, सुरक्षित और समयबद्ध होगी। बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और उत्तराखंड की चार धाम यात्रा व्यवस्था एक नए और बेहतर दौर में प्रवेश करेगी।

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