उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने लखनऊ में एक अहम प्रेस वार्ता कर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, विकसित भारत जी-राम-जी कानून 2025 और मनरेगा में प्रस्तावित सुधारों को लेकर सरकार का विस्तृत पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि यह नया कानून ग्रामीण रोजगार, पारदर्शिता, जवाबदेही और स्थायी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
- मनरेगा से आगे जी-राम-जी
- रोजगार गारंटी अब 125 दिन
- विकसित भारत मिशन की शुरुआत
- मनरेगा में ऐतिहासिक सुधार
- गांवों के विकास की गारंटी
- रोजगार में पारदर्शिता और जवाबदेही
- जल संरक्षण को मिलेगी प्राथमिकता
- काम नहीं तो मुआवजा
- भ्रष्टाचार पर सख्त जुर्माना
- विकसित भारत 2047 की राह
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को और सशक्त बनाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में जी-राम-जी कानून 2025 को नई संरचना के साथ लागू किया जा रहा है, जो वर्तमान मनरेगा की जगह लेगा। उन्होंने कहा कि यह कानून मनरेगा में पहले बड़े सुधार का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें रोजगार की पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही सुनिश्चित होगी और वर्षों से चली आ रही कमियों को दूर किया जाएगा।
सुरेश खन्ना ने बताया कि मनरेगा में जहां अभी तक 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी, वहीं नए कानून के तहत इसे बढ़ाकर 125 दिनों की गारंटी कर दिया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों और जरूरतमंद परिवारों को अधिक रोजगार मिलेगा और उनकी आय में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला गरीब, किसान और मजदूर वर्ग के हित में लिया गया है।
वित्त मंत्री ने आगे बताया कि बुआई और कटाई के मौसम को ध्यान में रखते हुए इस योजना में विशेष प्रावधान किए गए हैं। जब बुआई और कटाई का सीजन रहेगा, तब मजदूरों को 60 दिनों तक कार्य से मुक्त रखा जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि किसान और मजदूर अपनी कृषि गतिविधियों पर पूरा ध्यान दे सकें और उन पर काम का अनावश्यक दबाव न पड़े। इस अवधि में लोग अपनी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार कृषि कार्य कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि रोजगार को चार प्रमुख प्राथमिकता वाले कार्य क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। पहला और सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र जल सुरक्षा और जल संरक्षण है, जिससे गांवों में जल संकट को दूर किया जा सके। दूसरा क्षेत्र ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास है, जिसमें सड़कों, नदियों, नालों और अन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। तीसरा अहम क्षेत्र आजीविका संवर्धन और कौशल विकास है, ताकि ग्रामीणों को किसी न किसी रूप में रोजगार से जोड़ा जा सके और वे आत्मनिर्भर बन सकें। चौथा क्षेत्र जलवायु परिवर्तन और प्रतिकूल मौसम से निपटने से जुड़ा है, ताकि बदलते मौसम के प्रभावों को कम किया जा सके।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि इस कानून का एक बड़ा और महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि यदि किसी व्यक्ति को 30 दिनों तक काम नहीं मिलता है, तो उसे उसकी मजदूरी का एक-चौथाई (1/4) हिस्सा मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। वहीं, अगर 60 दिनों तक काम नहीं मिलता, तो मजदूरी का आधा (1/2) हिस्सा मुआवजे के तौर पर मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है जब रोजगार की गारंटी को मुआवजे से जोड़ा गया है, जिससे सरकार की जवाबदेही भी तय होगी।
उन्होंने बताया कि इस योजना को लागू करने के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार किया गया है। गांव की आवश्यकताओं के अनुसार योजना बनाई जाएगी, जिसे पहले ब्लॉक और फिर जिले को भेजा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि हर गांव की जरूरतों के मुताबिक विकास कार्य हों और योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें। यह कानून राष्ट्रीय, राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर मिशन मोड में लागू किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता और निगरानी दोनों मजबूत होंगी। इसके जरिए स्थायी संपत्तियों का सृजन भी सुनिश्चित किया जाएगा।
सुरेश खन्ना ने बताया कि पुराने मनरेगा कानून में नियमों के उल्लंघन पर केवल 1000 रुपये का जुर्माना लगाया जाता था, लेकिन नए कानून में इसे बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा और जवाबदेही तय होगी। इसके अलावा पहले जहां 6 प्रतिशत की व्यवस्था थी, उसे बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे योजना के क्रियान्वयन में और सुधार होगा।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन, समान अवसर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत गांवों को डिजिटल, भौतिक और सामाजिक संरचना से जोड़ा जाएगा। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार ग्राम पंचायतें योजना निर्माण करेंगी और गांवों के विकास को नई गति दी जाएगी। इसमें पीएम गति शक्ति और अन्य राष्ट्रीय योजनाओं का भी उपयोग किया जाएगा, ताकि ग्रामीण विकास को समग्र रूप से आगे बढ़ाया जा सके।
अंत में वित्त मंत्री ने बताया कि यह नया कानून अगले छह महीनों में पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि जी-राम-जी कानून 2025 ग्रामीण भारत के लिए एक नया युग साबित होगा और देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे ले जाएगा।





