फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों नीम करौली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक विरासत को लेकर चर्चा में है। फिल्म की खास बात सिर्फ इसकी कहानी नहीं, बल्कि उन किरदारों को पर्दे पर जीवंत करने की कोशिश भी है, जिनसे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। इसी कड़ी में बाल कलाकार विहान शेडगे का नाम खास तौर पर सामने आ रहा है, जिन्होंने महाराज जी के बचपन से प्रेरित भूमिका को सहजता और मासूमियत के साथ निभाया है।
फिल्म में अभिनेता शोभिनव सत्या ने नीम करौली बाबा का किरदार निभाया है, जबकि उनके शुरुआती जीवन से प्रेरित भूमिका में विहान शेडगे दिखाई देते हैं। यही जोड़ी फिल्म की कहानी में एक महत्वपूर्ण भावनात्मक कड़ी तैयार करती है। एक तरफ दर्शकों के सामने महाराज जी के व्यक्तित्व का परिपक्व रूप आता है, तो दूसरी तरफ विहान के जरिए उनके बाल्यकाल की झलक देखने को मिलती है।
बाल कलाकार की मासूमियत बनी ताकत
किसी आध्यात्मिक व्यक्तित्व के बचपन को पर्दे पर दिखाना आसान काम नहीं होता। खासकर तब, जब उस व्यक्तित्व के प्रति दर्शकों के मन में पहले से गहरी श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव हो। ऐसे में बाल कलाकार से सिर्फ संवाद बोलने की उम्मीद नहीं होती, बल्कि चेहरे के भाव, सहजता और मौन अभिनय के जरिए भी किरदार की मासूमियत और आंतरिक संवेदनशीलता को सामने लाना पड़ता है।
विहान शेडगे की भूमिका इसी वजह से ध्यान आकर्षित करती है। उनकी उम्र और अभिनय शैली किरदार में एक स्वाभाविक मासूमियत लेकर आती है। यही मासूमियत दर्शकों को कहानी के उस हिस्से से जोड़ने का काम करती है, जहां नीम करौली बाबा के शुरुआती जीवन को सिनेमाई रूप में प्रस्तुत किया गया है।
अभिनय की दुनिया में शुरुआती कदम
विहान शेडगे अभी अपने अभिनय करियर के शुरुआती दौर में हैं। ‘हनुमान अंश’ से पहले वह वर्ष 2025 में रिलीज हुई मराठी फिल्म ‘झापूक झुपूक’ में भी नजर आ चुके हैं। यानी बड़े पर्दे पर यह उनकी पहली पहचान नहीं है, लेकिन ‘हनुमान अंश’ जैसी विषयवस्तु वाली फिल्म में भूमिका निश्चित तौर पर उनके लिए अलग तरह की चुनौती लेकर आती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विहान फिलहाल 8वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे हैं। यह पहलू भी उनके सफर को खास बनाता है। एक ओर स्कूल की पढ़ाई और दूसरी ओर कैमरे के सामने अभिनय—दोनों जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना किसी भी बाल कलाकार के लिए आसान नहीं होता।
श्रद्धा और सिनेमा का संगम
‘हनुमान अंश’ को केवल एक फिल्म के तौर पर देखना इसकी व्यापकता को सीमित कर सकता है। नीम करौली बाबा का नाम आध्यात्मिकता, सेवा और हनुमान भक्ति से जुड़ी एक बड़ी आस्था का हिस्सा है। ऐसे व्यक्तित्व पर फिल्म बनाते समय निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है—कहानी को रोचक भी रखा जाए और श्रद्धा से जुड़े भावनात्मक पक्ष का सम्मान भी कायम रहे।
यही वजह है कि फिल्म में महाराज जी के जीवन के शुरुआती दौर को दिखाने के लिए बाल कलाकार का चयन कहानी को भावनात्मक गहराई देता है। विहान का किरदार दर्शकों को उस व्यक्तित्व के मानवीय और बाल स्वरूप से जोड़ता है, जिसे आगे चलकर लाखों लोग आध्यात्मिक प्रेरणा के रूप में जानने लगे।
क्यों चर्चा में है विहान का किरदार?
फिल्म में विहान की चर्चा का एक बड़ा कारण यह है कि दर्शक किसी प्रसिद्ध व्यक्तित्व के बचपन को पर्दे पर देखने के प्रति स्वाभाविक रूप से उत्सुक रहते हैं। जब वह व्यक्तित्व नीम करौली बाबा जैसा आध्यात्मिक और श्रद्धेय नाम हो, तो यह उत्सुकता और बढ़ जाती है।
विहान की सबसे बड़ी ताकत फिलहाल उनकी सहजता नजर आती है। बाल कलाकार के लिए अभिनय का सबसे बड़ा जोखिम बनावटीपन होता है। लेकिन जब स्क्रीन पर बच्चा अपने किरदार में स्वाभाविक दिखाई देता है, तो दर्शक कहानी के साथ आसानी से जुड़ जाते हैं।
विहान के करियर के लिए अहम पड़ाव
‘हनुमान अंश’ विहान शेडगे के अभिनय करियर के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है। बाल कलाकार के तौर पर शुरुआती फिल्मों में काम करने का अनुभव भविष्य में उनके लिए मजबूत आधार तैयार कर सकता है। खास बात यह है कि उनकी शुरुआत ऐसी भूमिका से हो रही है, जिसमें अभिनय के साथ भावनात्मक संवेदनशीलता की भी जरूरत है।
आगे चलकर यह देखना दिलचस्प होगा कि विहान बाल कलाकार से आगे अभिनेता के रूप में अपनी पहचान किस तरह बनाते हैं। फिलहाल उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वह पढ़ाई के साथ अभिनय को आगे बढ़ा रहे हैं।
बड़ा सवाल—फिल्म कितनी असरदार?
‘हनुमान अंश’ की चर्चा के बीच असली कसौटी यही होगी कि फिल्म नीम करौली बाबा के जीवन और विचारों को दर्शकों तक किस संवेदनशीलता से पहुंचाती है। किसी श्रद्धेय संत के जीवन को पर्दे पर प्रस्तुत करना केवल मनोरंजन का विषय नहीं होता। इसमें इतिहास, आस्था, भावनाओं और सिनेमाई स्वतंत्रता के बीच संतुलन जरूरी होता है।
विहान शेडगे की भूमिका इस कहानी का भावनात्मक प्रवेश द्वार बनती है। उनकी मासूमियत के जरिए दर्शक महाराज जी के शुरुआती जीवन की झलक देखते हैं और यहीं से फिल्म का आध्यात्मिक पक्ष कहानी से जुड़ता है।
कुल मिलाकर, ‘हनुमान अंश’ में विहान शेडगे की मौजूदगी यह दिखाती है कि किसी बड़े आध्यात्मिक व्यक्तित्व की कहानी कहने के लिए केवल बड़े सितारे ही जरूरी नहीं होते। कई बार एक बाल कलाकार की मासूम अभिव्यक्ति ही कहानी के सबसे संवेदनशील हिस्से को दर्शकों तक पहुंचा देती है। विहान के लिए यह शुरुआत भले ही छोटी हो, लेकिन ‘हनुमान अंश’ उनके अभिनय सफर में एक यादगार और महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकती है।