उपराष्ट्रपति चुनाव Vice Presidential electionमें एनडीए ने अपने सभी 425 सांसदों से पूरे 100 फीसदी मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। जिससे क्रॉस वोटिंग जैसी स्थिति से बचा जा सके। साथ ही एनडीए के उम्मीदवार की बड़ी जीत सुनिश्चित हो सके। इस चुनाव में एनडीए को वाईएसआरसीपी के साथ बीजेडी और बीआरएस का भी समर्थन मिलने की संभावना नजर आ रही है। बता दें इसी माह 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान होगा। इससे एक दिन पहले 8 सितंबर 2025 को पीएम मोदी सभी सांसदों को डिनर देने वाले है।
- उपराष्ट्रपति चुनाव Vice Presidential election में शत-प्रतिशत मतदान की तैयारी
- एनडीए ने कसी कमर, हर सांसद की मौजूदगी सुनिश्चित करने की रणनीति
- प्रधानमंत्री मोदी देंगे डिनर, सांसदों को मिलेगी मतदान की ट्रेनिंग
- एनडीए की बड़ी रणनीति
उपराष्ट्रपति चुनाव Vice Presidential election 9 सितंबर को होना है और इस बार एनडीए ने शत-प्रतिशत वोटिंग सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। गठबंधन के कुल 425 सांसद हैं और एनडीए चाहता है कि इनमें से कोई भी मतदान से न चूके। इसके लिए केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों की ड्यूटी राज्यों के हिसाब से लगाई गई है। हर राज्य में एक मंत्री और एक सांसद की नियुक्ति की गई है। इनकी जिम्मेदारी होगी कि वे संबंधित प्रदेश के एनडीए सांसदों को दिल्ली लाकर 9 सितंबर को मतदान कराएं।
यूपी और बिहार में सख्त निगरानी
उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी की जिम्मेदारी तय की गई है। ये दोनों नेता सुनिश्चित करेंगे कि यूपी के सभी बीजेपी और सहयोगी सांसद समय पर वोट डालें। इसी तरह बिहार में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और लोकसभा सांसद संजय जाय को जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, चिराग पासवान और संजय झा की ड्यूटी लगाई गई है कि वे एलजेपी और जेडीयू के सांसदों का सौ फीसदी मतदान सुनिश्चित करें।
सांसदों की वर्कशॉप
क्रॉस वोटिंग और तकनीकी गलतियों से बचने के लिए एनडीए ने सांसदों की वर्कशॉप आयोजित करने का फैसला लिया है। ये ट्रेनिंग सत्र 6 से 8 सितंबर तक चलेंगे। इसमें सांसदों को बताया जाएगा कि मतदान के दौरान कौन-सी सावधानियाँ बरतनी हैं। सांसद अपना पेन लेकर मतदान केंद्र न जाएं, बल्कि चुनाव अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए पेन से ही मतपत्र भरें। मतपत्र को सही तरीके से फोल्ड करना होगा ताकि स्याही फैलकर वोट निरस्त न हो। मतदान गुप्त होता है, इसलिए सांसदों को मतदान की गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश दिए जाएंगे। एनडीए की कोशिश है कि एक भी वोट निरस्त न हो और उसके उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत से जीत मिले।
पीएम मोदी का डिनर डिप्लोमेसी
सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मैदान में उतर आए हैं। 8 सितंबर को वे एनडीए सांसदों के लिए विशेष डिनर का आयोजन कर रहे हैं। इसी दिन दिल्ली में कई संसदीय समितियों की बैठकें भी रखी गई हैं, ताकि सांसद पहले से ही राजधानी में मौजूद रहें। संसदीय समिति की बैठक में शामिल होने पर सांसदों को टीए-डीए और हवाई किराए का भुगतान भी मिलता है, जिससे उनकी उपस्थिति और आसान हो जाएगी।
वोटों का गणित
वर्तमान स्थिति में एनडीए के पास जीत के लिए आवश्यक 391 से 34 वोट अधिक, यानी कुल 425 सांसदों का समर्थन है। इसके अलावा वाईएसआरसीपी ने भी समर्थन देने का ऐलान किया है। उसके पास लोकसभा में 4 और राज्यसभा में 7 सांसद हैं। एनडीए को उम्मीद है कि बीजेडी और बीआरएस भी उनके पक्ष में आएंगे। बीजेडी के पास राज्यसभा में 7 सांसद हैं, लेकिन उसने अब तक स्पष्ट ऐलान नहीं किया है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पीएम मोदी पहले ही फोन कर चुके हैं। वहीं, बीआरएस के पास 4 सांसद हैं। विपक्षी INDIA गठबंधन भी बीआरएस से समर्थन पाने की कोशिश कर रहा है।
एनडीए की जीत की रणनीति
एनडीए उम्मीदवार सी. पी. राधाकृष्णन की जीत को सुनिश्चित बनाने के लिए पूरा ध्यान फुलप्रूफ वोटिंग और क्रॉस वोटिंग रोकने पर है। भाजपा और सहयोगी दलों का लक्ष्य है कि इस बार कम से कम 60% से अधिक वोट उनके पक्ष में जाएं। पिछली बार 2022 में हुए चुनाव में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को रिकॉर्ड 528 वोट मिले थे, जबकि विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को सिर्फ 346 वोट मिले। धनखड़ Dhankhar की जीत 74.4% मतों के साथ History of by elections उपराष्ट्रपति चुनाव के इतिहास की सबसे बड़ी जीत में गिनी गई। हालांकि इस बार Opposition position is a little stronger than before विपक्ष की स्थिति पहले से थोड़ी मजबूत है, इसलिए एनडीए के लिए उस प्रदर्शन को दोहराना आसान नहीं होगा।
गुप्त मतदान की चुनौती
चूंकि उपराष्ट्रपति Vice Presidential election का चुनाव गुप्त मतदान से होता है और व्हिप लागू नहीं होता, इसलिए क्रॉस वोटिंग की संभावना हमेशा बनी रहती है। यही वजह है कि एनडीए अपने सांसदों को बार-बार ट्रेनिंग दे रहा है और उन्हें गलती से भी वोट निरस्त न करने की हिदायत दी जा रही है।
विपक्ष की रणनीति
उधर INDIA गठबंधन ने तेलुगु उम्मीदवार को सामने लाकर बीआरएस और अन्य दक्षिणी दलों से समर्थन की अपील की है। विपक्ष का मानना है कि यदि एनडीए के कुछ सांसद Absenteeism or mistake in voting हुई, तो अंतर थोड़ा कम हो सकता है। उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर एनडीए पूरी तैयारी में जुटा है। हर सांसद की मौजूदगी और सही वोटिंग सुनिश्चित करने के लिए न केवल वर्कशॉप और ट्रेनिंग कराई जा रही है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी खुद भी सांसदों को साधने के लिए डिनर का आयोजन कर रहे हैं। एनडीए के पास फिलहाल बहुमत से अधिक संख्या है, लेकिन उसकी असली चुनौती है क्रॉस वोटिंग रोकना और शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करना। विपक्ष के मजबूत होते मनोबल को देखते हुए यह चुनाव न सिर्फ संख्याओं का खेल है, बल्कि रणनीति की भी परीक्षा है। (प्रकाश कुमार पांडेय)