उपराष्ट्रपति चुनाव: NDA के सीपी राधाकृष्णन की बड़ी जीत, INDIA गठबंधन को 15 वोट कम मिले – 39 सांसद किस ओर गए?

Vice Presidential Election NDA CP Radhakrishnan wins big INDIA alliance got 15 votes less

उपराष्ट्रपति चुनाव: NDA के सीपी राधाकृष्णन की बड़ी जीत, INDIA गठबंधन को 15 वोट कम मिले – 39 सांसद किस ओर गए?

देश को नया उपराष्ट्रपति मिल गया है। 9 सितंबर को हुए चुनाव में एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन ने इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी सुदर्शन रेड्डी को हराकर यह जीत दर्ज की। राधाकृष्णन को 452 वोट मिले जबकि रेड्डी को 300 वोट प्राप्त हुए। यानी कुल 152 वोटों के अंतर से NDA विजयी रहा। यह नतीजा भले ही अनुमानित था, लेकिन असली दिलचस्पी इस बात पर रही कि विपक्ष के खाते से वोट कैसे कम हुए और उन 39 सांसदों का रुख क्या रहा, जो न तो NDA से जुड़े हैं और न ही INDIA गठबंधन से।

NDA की तय जीत, लेकिन विपक्ष को झटका

संयुक्त संसद (लोकसभा और राज्यसभा) में कुल 788 सीटें हैं, जिनमें से 7 रिक्त हैं। इस प्रकार 781 सांसदों को मतदान करना था।

NDA के पास सांसद: 427
INDIA के पास सांसद: 315
अन्य दल/निर्दलीय: 39

गणित साफ था कि एनडीए के पास बहुमत है। जीत पक्की थी। असली सवाल यही था कि विपक्ष अपने पूरे वोट सुरक्षित रख पाता या नहीं। लेकिन परिणाम ने दिखाया कि INDIA को 15 वोट कम मिले। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि विपक्ष के सभी 315 सांसद मतदान में शामिल हुए और यह “100% उपस्थिति” थी। इसके बावजूद 300 वोट ही विपक्षी उम्मीदवार को मिले। इससे साफ है कि क्रॉस वोटिंग और इनवैलिड वोटिंग ने विपक्ष को नुकसान पहुंचाया।

39 सांसद किस ओर गए?
अब नजर डालते हैं उन 39 सांसदों पर, जो न तो NDA से थे और न ही INDIA गठबंधन के साथ।

YSRCP : 11 सांसदों ने NDA के पक्ष में वोट किया।
बीजद (BJD) : 7 सांसदों ने तटस्थ रुख अपनाया, यानी किसी को वोट नहीं दिया।
BRS : 4 सांसदों ने भी वोटिंग से दूरी बनाई।
शिरोमणि अकाली दल : 1 सांसद ने वोट नहीं किया।
निर्दलीय और अन्य : 1-2 सांसदों ने वोट डालने से इनकार किया।

अमृतपाल सिंह (जेल में बंद) ने पोस्टल बैलेट से साफ लिखा कि वह किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देंगे। इस तरह 39 सांसदों में से YSRCP के वोट सीधे NDA को गए, जबकि शेष 28 में से कई ने मतदान नहीं किया या उनके वोट इनवैलिड हो गए।

इनवैलिड वोटों ने भी बढ़ाई हलचल
चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार कुल 15 वोट इनवैलिड पाए गए। सूत्रों का कहना है कि इनमें से 10 NDA के और 5 विपक्ष के थे। हालांकि विपक्ष के 15 वोट गायब होने का मतलब यह है कि कुछ क्रॉस वोटिंग भी हुई है। अंदरखाने की चर्चा है कि करीब 10 वोट विपक्ष से NDA की ओर खिसके।

जीत के बाद क्या बोले राधाकृष्णन?
जीत दर्ज करने के बाद सीपी राधाकृष्णन ने इसे “राष्ट्रवादी विचारधारा की जीत” बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने इस चुनाव को वैचारिक लड़ाई बताया था, लेकिन वोटिंग पैटर्न से यह स्पष्ट है कि जनता और प्रतिनिधियों ने विकास और राष्ट्रवाद के एजेंडे को समर्थन दिया। उन्होंने आगे कहा “यह हर भारतीय की जीत है।” “2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ेंगे।” “लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों जरूरी हैं। दोनों मिलकर काम करेंगे तभी लोकतंत्र मजबूत होगा।”

विपक्ष की सबसे छोटी हार
गौर करने वाली बात यह है कि 2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद हुए उपराष्ट्रपति चुनावों में विपक्ष की यह अब तक की सबसे कम अंतर से हार है। 2017 में वेंकैया नायडू ने 272 वोटों से जीत हासिल की थी। 2022 में जगदीप धनखड़ 346 वोटों से जीते थे। लेकिन 2025 में सुदर्शन रेड्डी को सिर्फ 152 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा। यह आंकड़ा विपक्ष के लिए राहत की बात हो सकता है, लेकिन क्रॉस वोटिंग और कमजोर एकजुटता के संकेत भी देता है।

नतीजों का संदेश

इस चुनाव ने साफ कर दिया है कि एनडीए अब भी संसद में मजबूत स्थिति में है। वहीं, इंडिया गठबंधन भले ही दावा करे कि उसके सभी सांसद एकजुट रहे, लेकिन 15 वोटों की कमी और इनवैलिड मतों ने विपक्ष की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।उधर, 39 गैर-संबद्ध सांसदों के रुख ने भी तस्वीर साफ कर दी है—YSRCP जैसे दल NDA के पक्ष में झुक गए हैं, जबकि BJD और BRS जैसे दल अभी भी ‘Issue-based Support’ की नीति पर टिके हैं।( प्रकाश कुमार पांडेय)

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