उपराष्ट्रपति चुनाव: इंडिया गठबंधन ने दी चुनावी चुनौती, जल्द तय होगा नाम…जानें चुनाव को लेकर क्या बोले सीनियर पवार

Vice Presidential Election

उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर देश की सियासत गरमाती जा रही है। विपक्षी दलों के समूह इंडिया गठबंधन ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि वह इस बार उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार उतारने जा रहा है।
एनसीपी (शरद पवार) गुट के प्रमुख शरद पवार ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि उम्मीदवार के नाम को अंतिम रूप देने के लिए इस हफ्ते गठबंधन की अहम बैठक होगी। पवार ने कहा “उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया गठबंधन का उम्मीदवार कौन होगा इसके लिए हम इस हफ्ते मीटिंग करेंगे और हम अपना नाम देंगे। इस बयान से साफ हो गया है कि विपक्ष केवल समर्थन देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरेगा।

नामांकन की अंतिम तारीख 21 अगस्त, चुनाव 9 सितंबर को

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 21 अगस्त है, जबकि मतदान 9 सितंबर को होगा। ऐसे में इंडिया गठबंधन के पास नाम तय करने के लिए सीमित समय बचा है।
सूत्रों के मुताबिक, इस हफ्ते होने वाली बैठक में कांग्रेस, तृणमूल, आप, राजद, जदयू, शिवसेना (उद्धव गुट), एनसीपी (शरद गुट) और अन्य सहयोगी दल हिस्सा लेंगे।

अजित पवार गुट के साथ हाथ मिलाने की अटकलें खारिज

पत्रकारों ने जब शरद पवार से पूछा कि क्या उनके गुट का सत्तारूढ़ एनसीपी (अजित पवार) गुट के साथ कोई समझौता हो सकता है, तो उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ मीडिया की अटकलें हैं और इसमें कोई सच्चाई नहीं है।
उन्होंने दो टूक कहा, “हमारा अजित पवार गुट के साथ हाथ मिलाने का कोई इरादा नहीं है। इस बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में चल रही संभावित समीकरणों की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।

वोट चोरी विवाद पर भी दी प्रतिक्रिया

हाल ही में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मतदाता सूची में गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए एक विस्तृत प्रस्तुति दी थी, जिसमें उन्होंने ‘संस्थागत चोरी’  का आरोप लगाया। राहुल का दावा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बीजेपी और निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से गरीब और हाशिए पर खड़े समुदायों के वोट हटाए गए हैं, ताकि चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जा सके।
शरद पवार ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि “राहुल गांधी की प्रेजेंटेशन पूरी तरह से शोध और दस्तावेजों पर आधारित थी। इस पर कार्रवाई करना और जांच कराना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।”

राजनीतिक पारा चढ़ा, विपक्ष आक्रामक

वोट चोरी का मामला संसद से लेकर सड़क तक गरमा चुका है। विपक्ष का आरोप है कि यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। वहीं, सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को निराधार बता रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि उपराष्ट्रपति चुनाव और वोट चोरी विवाद, दोनों मुद्दे मिलकर आने वाले महीनों में राजनीतिक माहौल को और तेज कर सकते हैं।

इंडिया गठबंधन के सामने चुनौती और अवसर

उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया गठबंधन का सीधा मुकाबला एनडीए से होगा। हालांकि, इस पद का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से सांसदों द्वारा होता है और संख्याबल के मामले में एनडीए फिलहाल मजबूत स्थिति में है।
फिर भी, विपक्ष के लिए यह एक अवसर है कि वह एकता का प्रदर्शन करे और

देश के राजनीतिक विमर्श को अपने पक्ष में मोड़े।

गठबंधन के अंदर ऐसे नामों पर विचार हो सकता है जो व्यापक स्वीकृति रखते हों और जो भाजपा के खिलाफ एक मजबूत वैकल्पिक संदेश दे सकें।
अब सबकी नजरें इस हफ्ते होने वाली इंडिया गठबंधन की बैठक पर टिकी हैं, जहां से उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार का नाम तय होकर सामने आएगा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उम्मीदवार चाहे जो भी हो, यह चुनाव सिर्फ पद के लिए नहीं बल्कि विपक्ष की एकजुटता और ताकत की भी परीक्षा होगी।

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