उपराष्ट्रपति चुनाव: नंबर गेम बनाम अंतरात्मा की आवाज़, किसकी रणनीति होगी सफल?
उपराष्ट्रपति चुनाव का मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर है। एक तरफ़ एनडीए ने तमिलनाडु से आने वाले वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के राज्यपाल रह चुके सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारा है, तो दूसरी तरफ़ विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ ने पूर्व न्यायमूर्ति और तेलंगाना से ताल्लुक रखने वाले बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है। सत्ता पक्ष को अपने मज़बूत नंबर गेम पर भरोसा है, जबकि विपक्ष ‘अंतरात्मा की आवाज़’ के सहारे परिणाम में उलटफेर की उम्मीद कर रहा है।
मुकाबला और दांव-पेंच
उपराष्ट्रपति पद के लिए मंगलवार को वोटिंग होनी है। संसद के दोनों सदनों – लोकसभा और राज्यसभा – के सदस्य इस चुनाव में वोट डालते हैं। इस लिहाज से कुल 781 सांसदों का वोट मायने रखेगा और जीत के लिए 392 वोटों की ज़रूरत होगी।
एनडीए के पास लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 132 सांसदों का समर्थन है। यानी कुल मिलाकर 425 सांसद राधाकृष्णन के साथ नज़र आ रहे हैं। विपक्षी उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी को 324 सांसदों का समर्थन मिलने की संभावना जताई जा रही है। यही वजह है कि सत्ता पक्ष को साफ़ तौर पर बढ़त दिखाई दे रही है। लेकिन विपक्ष ने चुनाव को केवल संख्याओं का खेल बनने से रोकने की कोशिश की है। उसने इसे ‘संवैधानिक मूल्यों’ और ‘लोकतंत्र की रक्षा’ की लड़ाई बताते हुए सांसदों से ‘अंतरात्मा की आवाज़’ पर वोट करने की अपील की है।
विपक्ष का दांव – अंतरात्मा की आवाज़
बी. सुदर्शन रेड्डी ने खुलकर कहा है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता, इसलिए सांसद अपनी अंतरात्मा के अनुसार वोट कर सकते हैं। यही वह रास्ता है, जिस पर विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने उम्मीदें टिका रखी हैं। विपक्षी नेता मानते हैं कि भले ही संख्यात्मक तौर पर वे पीछे हों, लेकिन गुप्त मतदान में क्रॉस वोटिंग उनके पक्ष में जा सकती है।
कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने यहां तक कहा कि आंध्र प्रदेश की राजनीति में टीडीपी और वाईएसआरसीपी के बीच तनातनी इस चुनाव में असर डाल सकती है। उनके अनुसार, कुछ सांसद बीजेपी उम्मीदवार को वोट देने से हिचक सकते हैं और सुदर्शन रेड्डी का समर्थन कर सकते हैं।
नंबर गेम पर भरोसा – एनडीए की रणनीति
वहीं, एनडीए इस चुनाव को लेकर पूरी तरह आत्मविश्वास से भरा हुआ है। उनके लिए यह मुकाबला सिर्फ़ जीत का नहीं बल्कि जीत के अंतर का भी है। पिछली बार 2022 में एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले थे। इस बार संख्या थोड़ी कम नज़र आ रही है। यही वजह है कि बीजेपी नेतृत्व विपक्षी दलों को साधने में जुटा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने बीजेडी, बीआरएस और कई छोटे दलों से संपर्क साधा है। साथ ही, बीजेपी ने अपने सांसदों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित की, जिसमें उन्हें मतदान की प्रक्रिया और गुप्त मतदान के तकनीकी पहलुओं पर ब्रीफिंग दी गई।
छोटे दलों पर टिकी निगाहें
इस चुनाव में छोटे दलों की भूमिका अहम है। बीजेडी के 7 सांसद और बीआरएस के 4 सांसदों ने अभी तक अपना रुख़ साफ़ नहीं किया है। अकाली दल, जेडपीएम, वीओटीटीपी और निर्दलीय सांसदों के वोट भी सस्पेंस बने हुए हैं। बीजेडी ने पिछले कई मौकों पर अपने सांसदों को ‘अंतरात्मा की आवाज़’ पर वोट देने की छूट दी है। ऐसे में देखना होगा कि इस बार नवीन पटनायक क्या रुख अपनाते हैं। इसी तरह बीआरएस का समर्थन भी अनिश्चित है। कांग्रेस ने बीआरएस से संपर्क करने में कोई खास सक्रियता नहीं दिखाई है, लेकिन सुदर्शन रेड्डी तेलुगु अस्मिता का हवाला देकर समर्थन की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष की एकजुटता और प्रतीकात्मक संदेश
विपक्ष ने इस चुनाव को सिर्फ़ संख्या से ज़्यादा प्रतीकात्मक बनाने की कोशिश की है। सुदर्शन रेड्डी जैसे गैर-राजनीतिक और न्यायपालिका से जुड़े चेहरे को आगे कर विपक्ष ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का मुद्दा उठाया है। असदुद्दीन ओवैसी और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे नेता भी उनके समर्थन में उतर आए हैं। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, राजद, सपा, आप और वामपंथी दल पहले ही उनके साथ खड़े हैं।
दिलचस्प पहलू यह भी है कि इस बार दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं। एक तरफ़ तमिलनाडु से राधाकृष्णन, तो दूसरी तरफ़ तेलंगाना से रेड्डी। इसे दक्षिण की राजनीति में बढ़ते महत्व का संकेत माना जा रहा है।
फाइनल मुकाबला
एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को अभी बढ़त तो साफ़ दिख रही है, लेकिन विपक्ष की रणनीति चुनाव को रोचक बना रही है। गुप्त मतदान की वजह से सस्पेंस और भी बढ़ जाता है। क्या वास्तव में सांसद अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर वोट करेंगे या फिर नंबर गेम ही सब पर भारी पड़ेगा, यह मंगलवार को साफ़ हो जाएगा।
नंबर गेम बनाम अंतरात्मा की आवाज
क्या उपराष्ट्रपति चुनाव सिर्फ़ “संख्याओं का खेल” है, या फिर सांसदों की “अंतरात्मा की आवाज़” से भी नतीजा बदल सकता है?
एनडीए का पलड़ा भारी?
425 सांसदों के समर्थन के साथ क्या सीपी राधाकृष्णन की जीत तय है, या विपक्षी रणनीति चौंका सकती है?
बीजेडी और बीआरएस का सस्पेंस
क्या बीजेडी और बीआरएस जैसे दल चुनाव में “किंगमेकर” साबित होंगे?
दक्षिण भारत का समीकरण
दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं। क्या यह चुनाव सिर्फ़ उपराष्ट्रपति पद तक सीमित है या “दक्षिण की राजनीति” में बड़ा संदेश छुपा है?
क्रॉस वोटिंग का खेल
गुप्त मतदान में क्रॉस वोटिंग का कितना असर पड़ेगा? क्या विपक्ष की यही सबसे बड़ी उम्मीद है?
संख्यात्मक बनाम नैतिक लड़ाई
क्या विपक्ष ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उतारकर इस चुनाव को “नैतिकता बनाम संख्या” की लड़ाई बना दिया है?
2022 और अब का फर्क
पिछले चुनाव में एनडीए उम्मीदवार को 528 वोट मिले थे। इस बार अनुमान 425 है। क्या यह एनडीए के लिए चेतावनी है?
छोटी पार्टियों की ताकत
ओवैसी और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे नेताओं का समर्थन विपक्ष को क्या वास्तविक फायदा देगा, या यह सिर्फ़ प्रतीकात्मक है?