धनखड़ का इस्तीफा..देश में सियासी बयानबाजी का दौर जारी…जानें विपक्ष के दावे में कितना दम
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार की शाम को अचानक पद से इस्तीफा देकर देश की सियासत में हलचल मचा दी है। हालांकि उन्होंने इसके पीछे स्वास्थ्य का हवाला दिया है, लेकिन विपक्ष को उनकी यह बात हजम नहीं हो रही है। विपक्षी नेता दावा कर रहे हैं कि
यह फैसला धनखड़ की मर्जी से नहीं हुआ है, बल्कि सरकार के दबाव में उन्होंने पद छोड़ा है।
जगदीप धनखड़ का इस्तीफा…”1 से साढ़े 4”- के बीच ‘कुछ’ तो हुआ है — जयराम रमेश का बड़ा दावा
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अचानक दिया इस्तीफा, कारण बताया – स्वास्थ्य
कांग्रेस नेता जयराम रमेश बोले – “इस्तीफे से एक दिन पहले बैठक में कुछ असामान्य हुआ”
BAC की बैठक में नड्डा और रिजिजू के अनुपस्थित रहने को लेकर जताई नाराज़गी
सियासी गलियारों में कयासों का दौर तेज
सोमवार 21 जुलाई की शाम स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जब धनखड़ ने पद से इस्तीफा दिया तो विपक्षी नेताओं ने इसकी टाइमिंग और कारण पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है यह खबर बहुत चौंकाने वाली थी। हैरान करने वाली थी। शाम को अचानक खबर आती है कि उपराष्ट्रपति धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों के चलते पद इस्तीफा दे दिया है। लेकिन अब यह लगता है कि स्वास्थ्य की बात अचानक सामने आना ही अपने आप में सवाल उठा रहा है। बता दें संसद के पिछले सत्र के दौरान उनकी तबीयत खराब हुई थी, लेकिन वो तीसरे-चौथे दिन फिर लौट आए थे।
भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर दिया गया इस्तीफा कितना व्यक्तिगत है और कितना राजनीतिक — इस पर अब बहस शुरू हो गई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के तुरंत बाद एक विवादास्पद दावा किया है। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई को दोपहर 1 से शाम 4:30 बजे के बीच कुछ हुआ, जो सामान्य नहीं था।
जानें आखिर क्या हुआ था 21 जुलाई को?
जयराम रमेश के अनुसार 21 जुलाई को दोपहर साढ़े 12 बजे धनखड़ की अध्यक्षता में राज्यसभा की कार्य मंत्रणा समिति (BAC) की बैठक हुई। बैठक में जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू सहित कई प्रमुख नेता मौजूद थे। बैठक में कई विषय पर चर्चा हुई इसके बाद शाम 4:30 बजे दोबारा बैठक तय की गई थी, लेकिन दूसरी बार जब 4:30 बजे बैठक शुरू हुई तो बैठक में जेपी नड्डा और रिजिजू मौजूद नहीं थे।
जयराम रमेश का कहना है कि सबसे बड़ी बात, धनखड़ को यह व्यक्तिगत रूप से भी नहीं बताया गया कि वे क्यों नहीं आ रहे। जयराम रमेश ने कहा कि यह शिष्टाचार का उल्लंघन था और धनखड़ इससे आहत हुए। उन्होंने BAC की अगली बैठक 22 जुलाई दोपहर 1 बजे तक टाल दी थी।
जयराम रमेश ने कहा “कल सोमवार की दोपहर से शाम तक कुछ जरूर ऐसा हुआ जिससे उपराष्ट्रपति व्यथित हुए हैं। उन्होंने कहा बैठक से नड्डा और रिजिजू की अनुपस्थिति ने स्थिति और बिगाड़ दी।
कयास और संकेत
जयराम रमेश का यह ट्वीट साफ इशारा करता है कि उपराष्ट्रपति और सरकार के बीच हाल के दिनों में कुछ खटास रही है। यह चर्चा जोरों पर है कि धनखड़ पहले भी कुछ मौकों पर सरकार की कार्यप्रणाली से असहमत दिखे थे। पार्लियामेंटरी प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन और वरिष्ठ मंत्री का उपराष्ट्रपति को सूचना दिए बिना बैठक से गायब रहना एक संवैधानिक पद की गरिमा पर सवाल खड़ा करता है।
स्वास्थ्य या सियासत?
हालांकि धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, लेकिन कोई भी लंबा इलाज या गंभीर बीमारी की आधिकारिक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। न ही उन्होंने किसी सार्वजनिक मंच पर स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी। ऐसे में इस्तीफे को लेकर सियासी कारणों की संभावना को बल मिल रहा है।
क्या आगे हो सकता है?
राष्ट्रपति भवन ने फिलहाल सिर्फ इस्तीफे की पुष्टि की है। नया उपराष्ट्रपति कौन होगा, इस पर अभी राजनीतिक पार्टियों ने चर्चा शुरू नहीं की है। विपक्ष इस मसले को आगामी संसद सत्र में बड़ा मुद्दा बना सकता है।
देश के उपराष्ट्रपति के पद से धनखड़ का यह इस्तीफा विपक्ष को महज़ ‘स्वास्थ्य’ का मामला नहीं लग रहा है। कांग्रेस नेता के बयान और घटनाओं की टाइमलाइन बताती है कि संवैधानिक गरिमा के साथ राजनैतिक संवाद और व्यक्तिगत अपमान – तीनों की मिलीजुली वजह से यह कदम उठाया गया हो सकता है। अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति के अगले कदम और सरकार की प्रतिक्रिया पर हैं।
जुलाई 2022 में बने थे उम्मीदवार..6 अगस्त को चुने गये थे उपराष्ट्रपति
जुलाई 2022 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन एनडीए की ओर से जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया था। इसके अगले माह 6 अगस्त 2022 को चुनाव हुए जिसमें उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार को परास्त किया। इसके बाद 11 अगस्त 2022 को उपराष्ट्रपति पद की उन्होंने शपथ ली थी। अपने कार्यकाल के दौरान धनखड़ संसद और सार्वजनिक मंचों पर सूचना के साथ नैतिकता और संविधान ही नहीं लोकतंत्र जैसे गंभीर मुद्दों पर सक्रिय रहे। उन्होंने फर्जी खबरों के खिलाफ सख्ती दिखाई। साथ ही वोकल फॉर लोकल और भारतीय संस्कृति के साथ भाषायी विविधता का समर्थन करनते हुए अपनी आवाज बुलंद की। संसद के मानसून सत्र से पहले धनखड़ ने सभी दल के नेताओं से सदन की गरिमा और संवाद को बनाए रखने की अपील भी की थी। प्रकाश कुमार पांडेय