संविधान संशोधन – जगदीप धनखड़ के बयान से छिड़ी नई बहस
संविधान की प्रस्तावना में संशोधन को लेकर अब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की बयान के बाद नई बहस छिड़ गई है। उन्होंने कहा कि कि संविधान की प्रस्तावना वैसे तो परिवर्तनशील नहीं है। लेकिन भारत अकेला ऐसा देश है जिसमें संविधान की प्रस्तावना को संशोधन के जरिए बदला गया है। धनखड़ ने कहा कि इसमें 1976 में 42 वें संशोधन के जरिए “समाजवादी” “धर्मनिरपेक्ष” और अखंडता शब्द जोड़े गए। हमें इस पर विचार करना चाहिए।
नई बहस छिड़ गई
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के बयान के संविधान की प्रस्तावना में संशोधन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। धनखड़ का बयान कि इस पर विचार करना चाहिए ने साफ कर दिया कि संघ की मांग पर विचार करा जा सकता है।
जगदीप धनखड़ ने ये टिप्पणी एक पुस्तक के विमोचन समारोह में कही। हांलाकि उन्होंने सीधे तौर पर संघ की बात का समर्थन नहीं किया लेकिन कही न कही ये जता दिया कि संविधान में संशोधन की संघ की मांग पर विचार किया जा सकता है। मतलब साफ है कि संशोधन पर विचार किया जा सकता है।
क्या कहा था दतात्रय होसबोले में
25 जून 2025 को बीजेपी की ओर से आपातकाल के 50 साल पर देश भर में कार्यक्रम किये गये थे। इसी तरह के एक कार्यक्रम के दौरान संघ के सह सर कार्यवाहक दतात्रय होसबोले ने भारत के संविधान की प्रस्तावना के तीन शब्दों पर “समाजवादी” “पंथनिरपेक्ष” की समीक्षा करने को कहा था। दरअसल ये वो शब्द हैं जो आपातकाल के समय संविधान में 42 संशोधन के जरिए 1976 में जोड़े गये थे। इसलिए इमरजेंसी के 50 साल जब पूरे हुए तो आरएसएस की ओर से इन शब्दों को संशोधन करने को कहा गया। इसी के बाद से सियासत शुरू हो गई।
कांग्रेस ने जमकर किया विरोध
संघ के इन शब्दों को समीक्षा के बयान का कांग्रेस ने जमकर विरोध किया। कांग्रेस ने इसे राजैनितक अवसरवादी और संविधान की आत्मा पर किया गया हमला बताया। —(प्रकाश कुमार पांडेय)