नागालैंड के पहाड़ी इलाकों में खेती करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। सीमित जमीन, मौसम की अनिश्चितता और बाजार तक पहुंच जैसी परेशानियों के बावजूद फेक जिले के पोर्बा गांव की वेसालु पुरी ने फूलों की खेती को कमाई का मजबूत जरिया बना दिया। 38 वर्षीय वेसालु ने साल 2021 में महज एक छोटे से खेत से शुरुआत की थी। आज उनका फूलों का कारोबार करीब ₹5 लाख सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है।
स्थानीय बाजार में फूलों की मांग को समझकर वेसालु ने खेती को बनाया कमाई का जरिया
वेसालु का परिवार लंबे समय से खेती से जुड़ा रहा है। बचपन से खेतों में काम देखने के कारण उन्हें कृषि की अच्छी समझ थी। फूलों के प्रति रुचि बढ़ने के बाद उन्होंने इसे व्यवसाय के तौर पर अपनाने का फैसला किया। उनके इलाके में शादी, चर्च कार्यक्रम, त्योहार और सामाजिक आयोजनों में फूलों की जरूरत रहती थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर अच्छी गुणवत्ता वाले फूल आसानी से उपलब्ध नहीं होते थे। इसी कमी को उन्होंने कारोबार के अवसर में बदल दिया।

KVK फेक के वैज्ञानिक सहयोग से ग्लेडियोलस की उन्नत खेती की मिली सही तकनीक
शुरुआत में ग्लेडियोलस की अच्छी रोपण सामग्री और वैज्ञानिक खेती की जानकारी वेसालु के सामने बड़ी चुनौती थी। इसी दौरान ICAR-कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), फेक से उन्हें मदद मिली। उन्हें ‘अरका अमर’ ग्लेडियोलस के कंद उपलब्ध कराए गए, जो ICAR-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु से प्राप्त हुए थे। प्रशिक्षण के दौरान खेत तैयार करने, दूरी, खाद, सिंचाई, रोग नियंत्रण, कटाई और कंदों को सुरक्षित रखने की जानकारी दी गई।

सिर्फ 0.25 एकड़ में 6,000 कंद लगाए, तैयार हुईं 5,400 बिक्री योग्य फूलों की डंडियां
वेसालु ने महज 0.25 एकड़ जमीन में 6,000 ग्लेडियोलस कंद लगाए। फसल तैयार होने पर करीब 5,400 बिक्री योग्य फूलों की डंडियां मिलीं। एक डंडी औसतन ₹15 में बिकी, जिससे लगभग ₹81,000 की सकल आय हुई। खेती की लागत करीब ₹28,930 रही और खर्च निकालने के बाद ₹52,070 की शुद्ध आय बची। इस प्रयोग का Benefit-Cost Ratio 2.80:1 रहा।

ग्लेडियोलस की सफलता के बाद बढ़ाया दायरा, अब कई तरह के फूलों की खेती और दूसरे राज्यों में बिक्री
पहली सफलता के बाद वेसालु ने खेती को आगे बढ़ाया और हाइड्रेंजिया, पियोनी, डेल्फीनियम, स्टॉक, यूकेलिप्टस और ग्लेडियोलस जैसी कई किस्में शामिल कीं। उनकी उपज अब स्थानीय बाजार के अलावा मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों तक भी पहुंच रही है। मांग बढ़ने पर वह आसपास के किसानों से भी फूल खरीदकर ग्राहकों तक पहुंचाती हैं, जिससे दूसरे उत्पादकों को भी बाजार मिलता है।
करीब ₹5 लाख के कारोबार के साथ अब फार्म को एग्रो-टूरिज्म और बड़े फूल व्यवसाय में बदलने की तैयारी
वेसालु का फार्म अब सिर्फ उत्पादन की जगह नहीं है। यहां स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों के शैक्षणिक भ्रमण भी होते हैं। CSIR-NEIST जोरहाट फ्लोरीकल्चर मिशन से मिले सहयोग ने भी उनके काम को आगे बढ़ाने में मदद की। अब वह ग्लेडियोलस का क्षेत्र बढ़ाने, बेहतर कंद तैयार कर बेचने, महंगे कट-फ्लावर उगाने और फार्म को एग्रो-टूरिज्म से जोड़ने की योजना पर काम कर रही हैं। उनकी कहानी बताती है कि सीमित जमीन पर भी सही फसल, तकनीक और बाजार की समझ से बड़ा व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है।