अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव ने जहां भारतीय समेत कई वैश्विक शेयर बाजारों में दबाव पैदा किया है, वहीं वेनेजुएला का शेयर बाजार बिल्कुल उलटी तस्वीर पेश कर रहा है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और अमेरिका के सैन्य एक्शन के बाद भी वेनेजुएला के स्टॉक मार्केट में ऐसा जश्न देखने को मिला, जिसने पूरी दुनिया के निवेशकों को चौंका दिया। जनवरी के सिर्फ दो कारोबारी सत्रों में ही वहां का बेंचमार्क इंडेक्स 87 फीसदी तक उछल चुका है।
50% की ऐतिहासिक छलांग से बना रिकॉर्ड
मंगलवार को वेनेजुएला के शेयर बाजार में एक ही दिन में 50 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जो अपने आप में ऐतिहासिक मानी जा रही है। इससे पहले सोमवार को भी बाजार में करीब 16 फीसदी की मजबूती देखने को मिली थी। आंकड़ों के मुताबिक, 29 दिसंबर को इंडेक्स में 22 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई थी, जबकि नए साल की छुट्टियों के बाद 2 जनवरी को बाजार खुलते ही 7 फीसदी की तेजी आई। इन सभी उछालों ने मिलकर जनवरी के शुरुआती दो सत्रों में ही बाजार को 87 फीसदी ऊपर पहुंचा दिया।
सालों से जारी है तूफानी तेजी का सिलसिला
वेनेजुएला का शेयर बाजार पिछले कई वर्षों से असाधारण तेजी के लिए जाना जा रहा है। नवंबर 2025 को छोड़ दें तो बीते साल हर महीने इंडेक्स में बढ़त दर्ज की गई। इसी का नतीजा रहा कि निवेशकों को सालाना आधार पर करीब 1,644 फीसदी तक का रिटर्न मिला। खास बात यह है कि साल 2024 को बाजार के लिहाज से अपेक्षाकृत कमजोर माना गया, फिर भी उस साल निवेशकों को 106 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न मिला था।
2018 के बाद से चौंकाने वाले आंकड़े
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वेनेजुएला के शेयर बाजार में 2018 से नियमित कारोबार शुरू हुआ था। इसके अगले ही साल यानी 2019 में इंडेक्स ने करीब 4,400 फीसदी की जबरदस्त छलांग लगाई। वर्ष 2020 में भी बाजार ने निवेशकों को लगभग 1,380 फीसदी का रिटर्न दिया। इसके बाद के चार वर्षों में हर साल कम से कम 100 फीसदी का वार्षिक रिटर्न दर्ज किया गया, जिसने इस बाजार को दुनिया के सबसे अस्थिर लेकिन सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले बाजारों में शामिल कर दिया।
राजनीतिक भूचाल और तेल सौदे का असर
हालिया तेजी की जड़ें उस राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी हैं, जिसमें अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। मादुरो पर अमेरिका में ड्रग्स से जुड़े आतंकवाद सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया कि कराकास और वॉशिंगटन के बीच करीब 2 अरब डॉलर मूल्य के कच्चे तेल के निर्यात को लेकर समझौता हुआ है। इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद वेनेजुएला अमेरिका को 5 करोड़ बैरल तक तेल बाजार भाव पर सौंपेगा।
वैश्विक बाजारों में दिखा तुरंत असर
इन घटनाओं का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा। 7 जनवरी को शुरुआती एशियाई कारोबार में कच्चे तेल के वायदा भाव में गिरावट देखी गई, जबकि संसाधन आधारित शेयरों में तेजी आई। निवेशक अब इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि वेनेजुएला के बाजार में आया यह उछाल राजनीतिक बदलाव और तेल तक पहुंच से जुड़ा स्थायी मूल्यांकन है या फिर यह एक अत्यधिक अस्थिर बाजार का एक और असाधारण अध्याय भर है।