वैष्णो देवी हादसा: लैंडस्लाइड में 31 श्रद्धालुओं की मौत, रेस्क्यू जारी….
जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित वैष्णो देवी धाम में मंगलवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया। अर्धकुमारी मंदिर के पास पुराने ट्रैक इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास हुए लैंडस्लाइड में अब तक 31 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। यह हादसा करीब दोपहर 3 बजे हुआ, जब माता रानी के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु यात्रा मार्ग पर थे।
- अर्धकुमारी मंदिर के पास हुआ अचानक बड़ा हादसा
- वैष्णो देवी हादसा – मरने वालों की संख्या हुई 31
- अर्धकुमारी मंदिर के पास लैंडस्लाइड
- जम्मू के कटरा स्थित वैष्णो देवी धाम में मची चीख पुकार
- घटना पुराने ट्रैक पर इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास हुई
रातभर चला रेस्क्यू, सुबह बढ़ा मौतों का आंकड़ा
हादसे के बाद मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात तक प्रशासन ने 7 लोगों की मौत की पुष्टि की थी। हालांकि बुधवार सुबह तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 31 तक पहुंच गई। प्रशासन और SDRF की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि कई लोग अब भी मलबे में दबे हो सकते हैं।
यात्रा स्थगित, बारिश से और मुश्किलें
कटरा से वैष्णो देवी धाम तक यात्रा फिलहाल अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई है। हादसे के समय इलाके में लगातार तेज बारिश हो रही थी। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को जम्मू में 24 घंटे से भी कम समय में 250 मिमी से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। इस वजह से आसपास के इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हो गए हैं। घरों और खेतों में पानी भर गया है और कई सड़कें टूट चुकी हैं।
रेलवे सेवाएं भी प्रभावित
लैंडस्लाइड और भारी बारिश के कारण रेलवे सेवाओं पर भी असर पड़ा है। नॉर्दर्न रेलवे ने जम्मू-कटरा से चलने वाली और यहां रुकने वाली 22 ट्रेनों को रद्द कर दिया है। इसके अलावा 27 ट्रेनों को शॉर्ट-टर्मिनेट किया गया है। हालांकि कटरा-श्रीनगर रूट पर ट्रेन सेवा फिलहाल जारी है। रेलवे ने यात्रियों से यात्रा से पहले अपडेट चेक करने की अपील की है।
श्रद्धालुओं की आपबीती: “पल में सबकुछ बिखर गया”
इस हादसे के गवाह बने कई श्रद्धालुओं ने अपनी दास्तान सुनाते हुए आंखें नम कर लीं।
एक श्रद्धालु ने बताया – “मैं और मेरा पूरा परिवार साथ जा रहे थे। मेरे बच्चे और पत्नी आगे निकल गए। तभी जोरदार धमाके के साथ चट्टान गिरी। कुछ समझ नहीं आया और अब तक मेरे बच्चों का कोई पता नहीं है। हम सब डरे हुए हैं, पल भर में हमारा सबकुछ बिखर गया।”
एक अन्य व्यक्ति बोले – “मैं पीछे था और मेरे साथ आए 6 लोग मेरे आगे थे। करीब 100 से ज्यादा श्रद्धालु आगे बढ़ रहे थे। तभी पत्थरों की तेज आवाज आई। मैं अभी भी कांप रहा हूं। मेरे साथ आए लोग कहां हैं, मुझे पता नहीं।”
एक महिला श्रद्धालु ने बताया – “हम माता रानी के दर्शन के लिए जा रहे थे। अचानक चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। मैं और उसके पति तो किसी तरह से बच गए, लेकिन उसके तीनों बच्चे भूस्खलन के बाद पहाड़ से गिरे मलबे और पत्थरों के नीचे दब गए। उसकी आंखों के सामने सबकुछ पलक झपकते ही यह सब हो गया।
पंजाब के मोहाली की रहने वाली किरण ने कहा – “मैं दर्शन करके नीचे लौट रही थी। अचानक लोगों में चीख-पुकार मच गई। मैंने पत्थर गिरते हुए देखे और जैसे-तैसे भागकर सुरक्षित जगह पर पहुंची। फिर भी मैं घायल हो गई। किरण के साथ आई एक और महिला ने बताया – “हम पांच लोग ग्रुप में थे, जिनमें से तीन गंभीर रूप से घायल हैं।
अलर्ट पर प्रशासन…हेल्पलाइन नंबर जारी
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हादसे के बाद आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। कटरा, रियासी और जम्मू के अस्पतालों में आपात स्थिति घोषित कर दी गई है। घायलों का मुफ्त इलाज करने के आदेश दिए गए हैं।
वैष्णो देवी यात्रा का महत्व और चुनौतीपूर्ण मार्ग
वैष्णो देवी धाम हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहता है। कटरा से मां वैष्णो देवी के भवन तक की यात्रा लगभग 13 किलोमीटर पैदल ट्रैक से होती है। अर्धकुमारी मंदिर इस यात्रा का मध्य बिंदु माना जाता है। जहां श्रद्धालु विश्राम करते हैं। इस मार्ग में पुराने ट्रैक पर कई जगह पहाड़ी ढलानों से गुजरना पड़ता है। यहां लगातार बारिश या भूकंप जैसी घटनाओं से लैंडस्लाइड का खतरा बना रहता है।
पिछले हादसों की यादें ताज़ा
यह पहली बार नहीं है जब वैष्णो देवी यात्रा के दौरान हादसा हुआ हो। 2022 में नए साल पर भगदड़ में 12 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। 2021 में भूस्खलन की वजह से यात्रा कुछ समय के लिए रोकी गई थी। यह हादसा एक बार फिर सवाल खड़े करता है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं या नहीं।
सवालों के घेरे में सुरक्षा इंतजाम
वैष्णो देवी हादसे में 31 श्रद्धालुओं की मौत ने पूरे देश को सन्न कर दिया है। हर साल लाखों लोग आस्था से प्रेरित होकर इस पवित्र यात्रा पर निकलते हैं, लेकिन हादसे और प्राकृतिक आपदाएं उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर देती हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन पहाड़ी क्षेत्रों में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की व्यवस्थाओं को मजबूत करेगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों? फिलहाल, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की एक ही प्रार्थना है – “माता रानी सभी को सुरक्षित रखें और घायल श्रद्धालुओं को जल्द स्वस्थ करें। (प्रकाश कुमार पांडेय)





