कैराना सांसद से अभद्रता मामले ने पकड़ा तूल…अखिलेश ने उठाई एडीएम पर कार्रवाई की मांग
उत्तर प्रदेश के शामली जनपद स्थित कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन से एडीएम कार्यालय में कथित अभद्रता का मामला लगातार राजनीतिक तूल पकड़ रहा है। सपा नेताओं और पदाधिकारियों ने इस पूरे घटनाक्रम को महिला प्रतिनिधियों के सम्मान से जोड़ते हुए सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए एडीएम को आड़े हाथों लिया है।
अखिलेश यादव का बयान
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने फेसबुक और एक्स (ट्विटर) पर लिखा “जो अधिकारी सांसद का सम्मान नहीं करता, वह जनता का सम्मान क्या करेगा?”
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि योगी सरकार में अफसरशाही बेलगाम हो चुकी है और यह लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए बेहद खतरनाक है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल 1 जुलाई को कैराना सांसद इकरा हसन और छुटमलपुर नगर पंचायत अध्यक्ष शमा परवीन सहारनपुर कलेक्ट्रेट स्थित एडीएम कार्यालय किसी जनसमस्या को लेकर पहुंची थीं। आरोप है कि दिन में दोपहर 12 से 3 बजे तक एडीएम अपने कार्यालय में नहीं थे। करीब तीन बजे आने के बाद उन्होंने महिला जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। इस तरह कथित रूप से उन्हें ‘कार्यालय से बाहर जाने’ की बात कही। इसे लेकर सपा सांसद इकरा हसन ने शासन और प्रशासन में लिखित शिकायत भी की है। जिसकी कॉपी मंडलायुक्त को भी सौंपी गई। उन्होंने इसे प्रोटोकॉल उल्लंघन और महिला विरोधी व्यवहार बताया।
सपा का आक्रोश और विरोध
इस घटना के बाद सपा नेताओं ने तीखा विरोध शुरू किया। सपा जिलाध्यक्ष चौधरी अब्दुल वाहिद ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर एडीएम पर कार्रवाई की मांग की है। महानगर प्रभारी अभिषेक अरोड़ा ने भी पत्र के माध्यम से नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि सांसद और अध्यक्षा जन समस्याओं को लेकर पहुंची थीं और उनके साथ ऐसा व्यवहार अस्वीकार्य है। प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य फैसल सलमानी ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश बताया और कहा कि वे उच्च अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
पूर्व सांसद और विधायकों की प्रतिक्रिया
पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए कहा कि, “इकरा हसन हमारी बेटी है, उनके साथ हुई घटना अत्यंत निंदनीय है। सांसद का प्रोटोकॉल होता है, और ऐसे में उनका अपमान पूरी संसद का अपमान है।”
उनकी इस पोस्ट पर कई लोगों ने समर्थन जताया और कमेंट्स के जरिए नाराजगी प्रकट की। वहीं, पूर्व विधायक माविया अली ने कहा कि भाजपा सरकार में अधिकारी बेलगाम हो चुके हैं, और यह घटना राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने इसे महिला अस्मिता का अपमान बताया।
एडीएम का पक्ष और जांच की स्थिति
एडीएम संतोष बहादुर सिंह ने इन आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि सांसद नाराज थीं क्योंकि उन्होंने फोन नहीं उठाया था। छुटमलपुर ईओ की शिकायत थी लेकिन लिखित में कोई शिकायत नहीं दी गई। एसडीएम ने कहा कि “मैंने न तो उन्हें बाहर जाने को कहा, और न ही कोई अभद्रता की।”
जिलाधिकारी के आदेश पर जांच शुरू कर दी गई है, और एडीएम से जवाब-तलब किया गया है।
यह मामला अब सिर्फ एक प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक सम्मान से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। सपा का आरोप है कि एक तरफ महिला सशक्तिकरण और “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” जैसे नारों की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर महिला सांसद और जनप्रतिनिधियों से अभद्रता जैसे आरोप प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस मामले पर क्या रुख अपनाती है और जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं।