उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव की तारीख बदलने से बीजेपी और आरएलडी की बांछे खिल गई हैं। चुनाव आयोग ने इन सीटों पर बीजेपी और आरएलडी की गुहार को स्वीकार करते हुए मतदान के लिए अब 20 नवंबर की तारीख मुकरर्र कर दी है। कार्तिक पूर्णिमा मेले के चलते बढ़ गई थी बीजेपी आरएलडी की चुनावी टेंशन।
इससे पहले जब चुनाव कार्यक्रम घोषित किया गया था तब इन 9 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए 13 नवंबर की मुकर्रर की गई थी। अब तारीख बदलने से कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग के कदम से मीरापुर सीट पर बीजेपी और आरएलडी दोनों ही दल ने राहत की सांस ली है।
- उपचुनाव के मतदान की तारीख बदली
- मीरापुर में RLD को राहत…BJP को चैन
- कार्तिक पूर्णिमा का स्नान 15 नवंबर को है
- पहले 13 नवंबर को होना थी वोटिंग
- मेले के चलते बदली मतदान की तारीख
- आरएलडी और बीजेपी ने किया था चुनाव आयोग का रुख
- कार्तिक पूर्णिमा से पहले ही लग जाता है कई क्षेत्र में मेला
आम चुनाव के बाद जयंत चौधरी की पहली परीक्षा
राष्ट्रीय लोक दल आरएलडी ने लोकसभा चुनाव बीजेपी के साथ मिलकर लड़ा था। अपने कोटे की दो सीट पर आरएलडी ने जीत दर्ज की थी। बीजेपी के खेमे में जाने के बाद विधानसभा उप चुनाव में जयंत चौधरी की यह पहली परीक्षा है। उन्हें मीरपुर विधानसभा सीट पर परीक्षा देना होगी। दरअसल मीरपुर विधानसभा सीट पहले 2022 में सपा के समर्थन से आरएलडी ने जीती थी, लेकिन विधायक चंदन चौहान के सांसद चुने जाने के बाद मीरपुर सीट पर अब उपचुनाव हो रहे हैं। जहां से आरएलडी ने मिथलेश पाल को प्रत्याशी बनाया है। इस सीट पर सवा लाख से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं, जिसपर सपा की ओर से सुंबुल राणा, बसपा की ओर से शाह नजर और आजाद समाज पार्टी की ओर से जाहिद हुसैन के साथ AIMIM ने भी अरशद राणा को चुनाव में उतार रखा है। मुस्लिमों के वोटों के बिखराव का खतरा देख जयंत चौधरी को अपने उप चुनाव में जीत की उम्मीद नजर आ रही है। यही कारण है कि उन्होंने कार्तिक पूर्णिका के मेले के चलते उप चुनाव की तारीख बदलवाने के लिए ईसी से गुहार लगाई थी।
पहले था सपा का साथ, अब जयंत केन्द्र में मंत्री हैं
आरएलडी मुखिया जयंत चौधरी ढाई साल पहले समाजवादी पार्टी के समर्थन से मीरापुर विधानसभा सीट फतह कर चुके हैं, लेकिन लोकसभा चुनाव से पहले सियासी हालात बदले और जयंत एनडीए का हिस्सा बन गए, अब वे केंद्रीय मंत्री हैं। उनकी पार्टी बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव में उतरी है। साल 2022 के विधानसभा चुनाव में आरएलडी ने जाट-मुस्लिम-गुर्जर समीकरण के सहारे मीरापुर विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की थी। वहीं अब उपचुनाव में आरएलडी हिंदू बनाम मुस्लिम की बिसात बिछी हुई नजर आ रही है। आरएलडी भी ले ही इस तरह अपना सियासी वर्चस्व को बनाए रखने के लिए बड़ा सियासी दांव चल रही हो, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा मेले ने उसके मुखिया की सियासी टेंशन बढ़ा दी है। ऐसे में आरएलडी के सामने मीरापुर सीट को बचाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
हिन्दू वोट प्रतिशत कम होने की थी आशंका
बता दें उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर हो रहा उपचुनाव का मुकाबला अब अपने दिलचस्प मोड पर पहुंच गया है। इस बीच चुनाव आयोग की ओर से मतदान की तारीख बदल दी जाती है। अब राज्य की सभी 9 विधानसभा सीटों पर 13 नवंबर के बदले सात दिन बाद 20 नवंबर को वोटिंग होगी। दरअसल चुनाव आयोग की ओर से कार्तिक पूर्णिमा स्नान मेले को देखते हुए उपचुनाव के मतदान की तारीख बदली है।
चुनाव आयोग से बीजेपी और आरएलडी की ओर से लगातार मतदान की तारीख बदलने की गुहार लगाई जा रही थी। अब चुनाव आयोग का फैसला आने के बाद मीरापुर सीट पर जहां आरएलडी के जयंत चौधरी ने राहत की सांस ली है तो वहीं बीजेपी चैन महसूस कर रही है।
बता दें महाराष्ट्र और झारखंड विधानसभा चुनाव के साथ उत्तरप्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान किया गया था। झारखंड में जहां पहले चरण के साथ यूपी की सभी 9 विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए 13 नवंबर को मतदान होना था, लेकिन अब यूपी उप चुनाव के मतदान की तारीख बदलकर 13 के बजाए 20 नवंबर कर दी गई है। यूपी में 9 सीट पर हो रहे इन उपचुनाव को 2027 का सेमीफाइनल माना जा रहा है। जिसके चलते पक्ष और विपक्ष दोनों ही दल ने पूरी ताकत झोंक दी है।
हालांकि कार्तिक पूर्णिमा के त्योहार के चलते चुनाव को लेकर बीजेपी और आरएलडी गठबंधन की सियासी टेंशन बढ़ गई थीं। जिसे लेकर चुनाव आयोग के सामने गुहार लगाई गई और चुनाव आयोग इससे सहमत भी नजर आया। चुनाव आयोग की ओर से यूपी उपचुनाव के लिए 13 के बजाए अब 20 नवंबर को वोटिंग की तारीख तय गई है। दरअसल कार्तिक पूर्णिमा का स्नान 15 नवंबर को है। वहीं वोटिंग के दो दिन के बाद गंगा स्नान होना है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर क्या वजह है कि आरएलडी और बीजेपी को परेशानी हो रही थी। जिसके चलते 13 नवंबर को होने वाले मतदान की तारीख को टलवाने के लिए चुनाव आयोग का रुख किय गया।
कार्तिक पूर्णिमा का है धार्मिक महत्व
कार्तिक पूर्णिमा के स्नान पर्व और गंगा पूजन का उत्तर प्रदेश में धार्मिक महत्व है। इस साल 15 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर्व का स्नान होगा। जिसके चलते कार्तिक पूर्णिमा के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान और पूजन के लिए गंगा घाट पर जाते हैं, लेकिन कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर मीरापुर, गाजियाबाद,कुंदरकी और मझवां के साथ प्रयागराज में लोग गंगा स्नान के तीन से चार दिन पहले ही गंगा घाट के किनारे जमा होने लगते हैं। यहां मैला जैसा लग जाता है। ऐसे में कार्तिक पूर्णिमा के चलते बीजेपी और आरएलडी गठबंधन ने बहुसंख्यक समुदाय के लोगों के मतदान से वंचित रहने की संभाना जताई थी। यह उसकी टेंशन भी बन गई थी। क्योंकि हिंदू वोटों के कम होने का खतरा भी बीजेपी और आरएलडी के समाने था।
(प्रकाश कुमार पांडेय)





