US-Israel-Iran War:अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध…मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव…कई देशों तक फैला संघर्ष

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अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध: मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, कई देशों तक फैला संघर्ष

मध्य पूर्व में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष हाल के वर्षों के सबसे गंभीर और अस्थिर संकटों में बदलता जा रहा है। मिसाइल हमलों, ड्रोन अटैक और हवाई बमबारी की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के माहौल में धकेल दिया है। इस संघर्ष ने न केवल तीनों देशों को आमने-सामने ला दिया है, बल्कि खाड़ी क्षेत्र के कई अन्य देशों को भी इसकी चपेट में ला दिया है।

इस युद्ध की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों और मिसाइल सिस्टम को निशाना बनाते हुए समन्वित हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान की सैन्य अवसंरचना और रक्षा प्रणालियों को नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया। इन हमलों के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इज़राइल के कई शहरों और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। इसके बाद संघर्ष तेजी से कई मोर्चों पर फैल गया और पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।

खाड़ी देशों तक पहुंचा युद्ध

ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों का असर खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में देखा गया। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। इन देशों ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार देश के कई हिस्सों में जो तेज आवाजें सुनाई दीं, वे दरअसल एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट करने के कारण थीं। इससे साफ हो गया कि युद्ध का दायरा अब तीन देशों से आगे बढ़कर पूरे खाड़ी क्षेत्र तक फैल चुका है।

लेबनान में भी खुला नया मोर्चा

इस संघर्ष के दौरान लेबनान का शक्तिशाली संगठन हिज़्बुल्लाह भी युद्ध में कूद पड़ा। हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी सीमा से इज़राइल की ओर कई रॉकेट दागे। इसके जवाब में इज़राइल ने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में हवाई हमले किए। रिपोर्टों के अनुसार इज़राइली लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी लेबनान के खियाम शहर में तीन बार एयर स्ट्राइक की। इससे वहां भी तनाव और अस्थिरता बढ़ गई है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर संकट

इस युद्ध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। युद्ध के कारण आशंका जताई जा रही है कि अगर यह मार्ग प्रभावित हुआ तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी डर के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है।

तीन मिलियन लोग हुए विस्थापित

लगातार हो रही बमबारी और मिसाइल हमलों के कारण ईरान के कई शहरों में भारी तबाही की खबरें सामने आई हैं। अल-जज़ीरा के पत्रकारों के अनुसार तेहरान में रातभर कई स्थानों पर हमले हुए, जिनके बाद कई इलाकों से धुएं के गुबार उठते देखे गए। रिपोर्टों के मुताबिक लगातार हो रहे हमलों के कारण अब तक 30 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं। यह मानवीय संकट को और गहरा कर सकता है।

एयर इंडिया ने दुबई उड़ानें रोकीं

क्षेत्र में बढ़ते खतरे को देखते हुए एयर इंडिया ने सुरक्षा कारणों से दुबई के लिए अपनी उड़ानें एक दिन के लिए निलंबित कर दी हैं। एयरलाइन ने यात्रियों को रीबुकिंग या पूरा रिफंड देने की सुविधा देने की घोषणा की है। एयरलाइंस और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर बढ़ता असर यह दिखाता है कि युद्ध का प्रभाव केवल सैन्य या राजनीतिक नहीं बल्कि वैश्विक नागरिक यातायात पर भी पड़ रहा है।

ट्रंप का बयान

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन उनके अनुसार ईरान अभी किसी समझौते के लिए तैयार नहीं है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका और इज़राइल के हमलों ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान की एयर डिफेंस प्रणाली और ड्रोन उत्पादन क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

ईरान का दावा

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि हालिया हमलों के बाद ईरान के परमाणु केंद्रों में मौजूद कई परमाणु सामग्री मलबे के नीचे दब गई है। उन्होंने बताया कि इन सामग्रियों को केवल अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में ही निकाला जा सकेगा। ईरान का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि संघर्ष का असर परमाणु सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

इस युद्ध के शुरुआती चरण में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद देश में राजनीतिक स्थिति भी तेजी से बदली। इसके बाद ईरान ने मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है। यह बदलाव ईरान की सत्ता संरचना में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है और इससे क्षेत्रीय राजनीति पर भी असर पड़ सकता है।

वैश्विक चिंता बढ़ी

लगातार मिसाइल हमलों, ड्रोन अटैक और कई देशों में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो यह पूरे मध्य पूर्व को एक बड़े युद्ध में बदल सकता है। इसके अलावा वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस युद्ध को रोक पाएंगे या यह संकट और गहराएगा।

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