US-Israel Attacks Iran : ईरान में अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई, 3000 से ज्यादा ठिकाने तबाह…जानें क्या है ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

US Israel Attacks Iran Major

US-Israel Attacks Iran LIVE: ईरान में अमेरिका की बड़ी सैन्य कार्रवाई, 3000 से ज्यादा ठिकाने तबाह… मिडिल ईस्ट में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की तैयारी

मध्य-पूर्व में जारी युद्ध लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब आठवें दिन में पहुंच गया है और हालात पहले से अधिक तनावपूर्ण होते दिखाई दे रहे हैं। बीते एक सप्ताह में हवाई हमलों, मिसाइलों और ड्रोन हमलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि अपने सैन्य अभियान के पहले ही सप्ताह में उसने ईरान के 3000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है।

अमेरिका द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान को “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” नाम दिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस ऑपरेशन के तहत ईरान के सैन्य ठिकानों, हथियार भंडारण केंद्रों और रणनीतिक सुविधाओं को लक्ष्य बनाकर हमले किए गए हैं। लगातार जारी हवाई हमलों के कारण क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

मिडिल ईस्ट में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर भेजने की तैयारी

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत करने जा रहा है। पेंटागन अब तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर इस क्षेत्र में तैनात करने की तैयारी कर रहा है। माना जा रहा है कि यह कदम ईरान पर दबाव बढ़ाने और संभावित बड़े संघर्ष के लिए रणनीतिक तैयारी के रूप में उठाया जा रहा है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात होता है तो अमेरिका की नौसैनिक ताकत इस क्षेत्र में काफी बढ़ जाएगी। इससे खाड़ी क्षेत्र और फारस की खाड़ी के आसपास अमेरिका की सैन्य गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।

ईरान ने अमेरिकी THAAD सिस्टम को किया नष्ट

इसी बीच ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। ईरानी सैन्य सूत्रों के मुताबिक, जॉर्डन में तैनात अमेरिका के टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) सिस्टम को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया गया है। यह सिस्टम बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है और अमेरिकी रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा माना जाता है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन यदि यह सही साबित होता है तो यह अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा सकता है।

सऊदी अरब में ड्रोन हमले की कोशिश नाकाम

मध्य-पूर्व में बढ़ते संघर्ष का असर अब आसपास के देशों पर भी दिखाई देने लगा है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि शनिवार तड़के उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने कई ड्रोन हमलों को नाकाम कर दिया।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार चार ड्रोन सऊदी अरब के विशाल शायबह तेल क्षेत्र को निशाना बनाकर भेजे गए थे, जिन्हें हवा में ही मार गिराया गया। यह हमला दुनिया के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों में से एक माने जाने वाले इस इलाके पर कुछ ही घंटों के भीतर दूसरी बार किया गया प्रयास था।

इससे पहले राजधानी रियाद के पास भी एक ड्रोन को इंटरसेप्ट किया गया था। सऊदी अधिकारियों का कहना है कि एयर डिफेंस सिस्टम ने समय रहते कार्रवाई कर संभावित बड़े नुकसान को टाल दिया।

ट्रंप की “सरेंडर” टिप्पणी पर ईरान का सख्त जवाब

इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक टिप्पणी को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। ट्रंप ने कहा था कि ईरान को आत्मसमर्पण कर देना चाहिए और वाशिंगटन ईरान के अगले सर्वोच्च नेता के चयन को प्रभावित कर सकता है। ईरान ने इन टिप्पणियों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान के अधिकारियों ने कहा कि देश के सर्वोच्च नेता का चयन पूरी तरह ईरान की “असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स” का अधिकार है और इसमें किसी बाहरी देश का कोई दखल नहीं हो सकता। मध्य-पूर्व रणनीतिक अध्ययन केंद्र के वरिष्ठ विश्लेषक अबास असलानी के अनुसार, ईरान ने इन बयानों को गंभीरता से लेने के बजाय उनका मजाक उड़ाते हुए खारिज कर दिया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका के दबाव में आने का सवाल ही नहीं उठता।

लेबनान में इजरायल की एयरस्ट्राइक

इसी दौरान इजरायल ने लेबनान में भी अपने सैन्य अभियान को तेज कर दिया है। खबरों के मुताबिक शुक्रवार को लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी हिस्से में जोरदार विस्फोट हुआ, जिसके बाद पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया। यह विस्फोट इजरायली हवाई हमलों के बाद हुआ। इजरायल डिफेंस फोर्स ने हमले से पहले पूरे दक्षिणी इलाके को खाली करने का आदेश भी जारी किया था। इस क्षेत्र में लाखों लोग रहते हैं और यहां हिजबुल्लाह से जुड़े कई ठिकाने मौजूद बताए जाते हैं। इजरायली सेना के अनुसार इन हमलों में हिजबुल्लाह के हथियार भंडारण केंद्रों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया गया। कई दौर में किए गए इन हमलों को क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

युद्ध का स्वरूप लगातार बदल रहा

विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और इजरायल इस युद्ध को तेजी से खत्म करने की रणनीति के तहत भारी हमले कर रहे हैं, जबकि ईरान इसे लंबी रणनीतिक लड़ाई की तरह देख रहा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका युद्ध को एक तेज सैन्य अभियान की तरह देख रहा है, जबकि ईरान इसे शतरंज की तरह लंबी योजना के साथ लड़ रहा है। यही कारण है कि युद्ध के आठवें दिन भी दोनों पक्ष पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे।

पूरे क्षेत्र में बढ़ी युद्ध की आशंका

मध्य-पूर्व में बढ़ते इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। सऊदी अरब, जॉर्डन और लेबनान जैसे देशों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। तेल आपूर्ति, समुद्री मार्गों और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार युद्ध को रोकने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए फिलहाल इस संघर्ष के जल्द खत्म होने की संभावना कम दिखाई दे रही है।

Exit mobile version