अमेरिका ने भर दी सऊदी अरब की झोली, क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से जो चाहा सब पाया ओवल ऑफिस में ऐतिहासिक मुलाकात—रक्षा, टेक्नोलॉजी और कूटनीति के बड़े सौदों पर लगी मुहर

US has filled Saudi Arabia coffers and the Crown Prince gets everything he wanted from Trump

अमेरिका ने भर दी सऊदी अरब की झोली, क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से जो चाहा सब पाया
ओवल ऑफिस में ऐतिहासिक मुलाकात—रक्षा, टेक्नोलॉजी और कूटनीति के बड़े सौदों पर लगी मुहर

अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्तों में लंबे समय बाद आया यह बदलाव किसी कूटनीतिक चमत्कार से कम नहीं है। वॉशिंगटन में हाल ही में हुई मुलाकात में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) इतने गर्मजोशी भरे माहौल में मिले कि विशेषज्ञों ने इसे दोनों देशों के संबंधों में नया मोड़ बताया। इस मुलाकात के बाद जो घोषणाएँ सामने आईं, उन्होंने साफ कर दिया कि क्राउन प्रिंस MBS वॉशिंगटन से वह सब लेकर लौटे, जिसकी उन्हें चाह थी—चाहे वह F-35 लड़ाकू विमान हों, बड़े रक्षा समझौते हों या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चिप टेक्नोलॉजी का सहयोग।

2018 के बाद बदली तस्वीर
अलग-थलग करने की बात से लेकर ‘स्पेशल गेस्ट’ बनने तक

क्राउन प्रिंस की यह वॉशिंगटन यात्रा बेहद खास इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि तीन साल पहले तक हालात बिल्कुल अलग थे। साल 2018 में अमेरिका की यात्रा और खाड़ी क्षेत्र में उनके प्रभाव के बावजूद, पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद सऊदी के खिलाफ माहौल कड़ा हो गया था। राष्ट्रपति जो बाइडन ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह मोहम्मद बिन सलमान को “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग” करना चाहते हैं। लेकिन इस हफ्ते जब क्राउन प्रिंस ओवल ऑफिस में प्रवेश कर रहे थे, तो माहौल पूरी तरह बदल चुका था। राष्ट्रपति ट्रंप ने न केवल उनका गर्मजोशी से स्वागत किया, बल्कि जब एक पत्रकार ने खशोगी मुद्दे पर सवाल उठाया तो ट्रंप ने पत्रकार को ही फटकार दिया और कहा कि वह “हमारे मेहमान को शर्मिंदा करने की कोशिश न करें।” यह बदलाव सिर्फ दिखावा नहीं, बल्कि रणनीतिक और आर्थिक समीकरणों का वह सच है जिसने अमेरिका-सऊदी गठजोड़ को मजबूत किया है।

ट्रंप की ‘फुल सपोर्ट’—सऊदी की छवि सुधारने में मिली मदद

ओवल ऑफिस में मुलाकात के बाद प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक बयानों में यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि सऊदी क्राउन प्रिंस की वॉशिंगटन में साख कितनी तेजी से सुधरी है। अमेरिका का यह झुकाव उस समय और महत्वपूर्ण हो जाता है जब सऊदी अरब ने अमेरिका में करीब एक ट्रिलियन डॉलर निवेश का वादा किया है। इसके अलावा, सऊदी का ट्रंप परिवार से व्यावसायिक संबंध भी चर्चा में रहे हैं। यही कारण है कि राष्ट्रपति ट्रंप सऊदी साझेदारी को नई ऊँचाई देने के पक्ष में दिखे।

इजराइल सामान्यीकरण पर नरमी—सऊदी की बड़ी जीत

सालों से अमेरिका इस बात पर जोर देता रहा था कि सऊदी अरब और इजराइल के संबंध पूरी तरह सामान्य हों। बाइडन प्रशासन ने 2023 में साफ कहा था कि जब तक तीन शर्तें पूरी नहीं होतीं—

अमेरिका-सऊदी रक्षा और व्यापार समझौते
सऊदी और इजराइल के रिश्तों का सामान्यीकरण
इजराइल द्वारा फिलिस्तीनी राज्य के लिए मार्ग तैयार करना

तब तक कोई बड़ा गठबंधन आगे नहीं बढ़ेगा। लेकिन इजराइल ने फिलिस्तीनी राज्य की मांग ठुकरा दी और सऊदी अरब ने अपनी शर्तों पर नरमी नहीं दिखाई। ऐसे में इस मुलाकात के बाद ट्रंप प्रशासन द्वारा इन सभी शर्तों को एक-दूसरे से अलग कर देना सऊदी अरब की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है। अब सऊदी अरब को रक्षा, AI और व्यापार के बड़े फायदे मिल जाएंगे—बिना इजराइल के साथ पूर्ण सामान्यीकरण की शर्त माने।

F-35 से लेकर रणनीतिक रक्षा समझौता—भारी हथियारों की सौगात

इस मुलाकात का सबसे बड़ा परिणाम रहा F-35 लड़ाकू विमानों की बिक्री की मंजूरी। ये वही एडवांस जेट हैं जो इजराइल उपयोग करता है। इसके साथ ही अमेरिका ने सऊदी अरब को Major Non-NATO Ally (MNNA) का दर्जा दिया, जिससे सऊदी को कई रक्षा और सुरक्षा सुविधाएँ मिलने का रास्ता खुल गया है। साथ ही एक नया रणनीतिक रक्षा समझौता भी हुआ, जिसमें खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, मिसाइल रक्षा और साझा सैन्य अभ्यास शामिल हैं। यह समझौता सऊदी अरब की वर्षों पुरानी मांग थी।

AI सहयोग और चिप टेक्नोलॉजी
तेल निर्भरता से मुक्ति की दिशा में बड़ा कदम

मोहम्मद बिन सलमान अपने विज़न-2030 के तहत सऊदी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से मुक्त करना चाहते हैं। इसी दिशा में अमेरिका और सऊदी के बीच AI सहयोग फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर हुए। इसमें शामिल हैं सऊदी को एडवांस AI चिप्स की बिक्री। टेक कंपनियों के साथ साझेदारी। डेटा सेंटर्स और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर। क्वांटम और साइबर सुरक्षा सहयोग। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण खनिज समझौता और परमाणु ऊर्जा सहयोग का रास्ता भी खोला गया है, जिससे सऊदी को भविष्य की तकनीकों में बढ़त मिलेगी।

क्षेत्रीय राजनीति में सऊदी की भूमिका को मान्यता—ट्रंप ने सुनी सभी मांगें

क्राउन प्रिंस MBS की क्षेत्रीय प्राथमिकताओं में सूडान के गृहयुद्ध को समाप्त कराने में अमेरिकी समर्थन भी शामिल था। ट्रंप प्रशासन ने इस पर सहमति देते हुए सऊदी के क्षेत्रीय नेतृत्व को मान्यता दी। MBS ने मुलाकात के दौरान कहा आज हमारे इतिहास का एक बहुत महत्वपूर्ण समय है। ये समझौते दोनों देशों के लिए लाभकारी हैं। उनके इस बयान से साफ है कि सऊदी अरब इस दौरे को अपनी कूटनीतिक उपलब्धियों की सूची में बहुत ऊपर रखेगा।

नई भू-राजनीतिक धुरी की शुरुआत?

अमेरिका-सऊदी रिश्तों का यह नया अध्याय कई मायनों में ऐतिहासिक है। रक्षा, व्यापार, तकनीक और क्षेत्रीय रणनीति के इतने बड़े समझौते एक साथ होना बेहद दुर्लभ है। इस मुलाकात ने तीन बड़े संकेत दिए कि सऊदी अब सिर्फ तेल सप्लायर नहीं बल्कि तकनीकी और रणनीतिक साझेदार की भूमिका में है। ट्रंप प्रशासन खशोगी विवाद को पीछे छोड़ आगे बढ़ चुका है। इजराइल सामान्यीकरण की बाधा हटाकर सऊदी को व्यापक लाभ दिलाए गए हैं। कुल मिलाकर, मोहम्मद बिन सलमान इस दौरे से ठीक वही हासिल करने में सफल रहे जिसकी उन्हें तलाश थी—और शायद उससे भी ज्यादा।

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