चीन ने अमेरिकी कार्रवाई को बताया आर्थिक दबाव की नीति
चीन ने अमेरिका द्वारा शिनच्यांग से जुड़े तथाकथित “उइगुर जबरन श्रम निवारण अधिनियम” की सूची में 40 से अधिक चीनी कंपनियों को शामिल किए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का यह कदम पूरी तरह निराधार है और वह घरेलू कानूनों का इस्तेमाल कर चीनी कंपनियों पर मनमाने प्रतिबंध लगा रहा है।
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने 1 अगस्त को एक पत्रकार के सवाल के जवाब में कहा कि चीन इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करता है और इसका दृढ़ता से विरोध करता है। उन्होंने कहा कि चीन अपनी कंपनियों के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।
मानवाधिकारों के नाम पर प्रतिबंध लगाने का आरोप
चीनी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अमेरिका “मानवाधिकार” और “जबरन श्रम” जैसे मुद्दों को बहाने के रूप में इस्तेमाल कर चीनी उद्यमों पर एकतरफा दबाव बना रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई आर्थिक दबाव का स्पष्ट उदाहरण है।
बीजिंग का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों से प्रभावित कंपनियों के सामान्य कारोबार पर असर पड़ा है और इससे वैश्विक औद्योगिक तथा आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता भी प्रभावित हो रही है।
अमेरिका-चीन आर्थिक संवाद पर उठाए सवाल
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका के समय को लेकर भी सवाल खड़े किए। प्रवक्ता ने कहा कि 30 जुलाई को चीन और अमेरिका के प्रमुख आर्थिक वार्ताकारों के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से व्यापार और आर्थिक संबंधों को स्थिर बनाए रखने पर बातचीत हुई थी। चीन के अनुसार, दोनों पक्षों ने इस दौरान खुले, गहन और रचनात्मक तरीके से विचारों का आदान-प्रदान किया। लेकिन इसके ठीक एक दिन बाद अमेरिका की ओर से चीनी कंपनियों पर नए प्रतिबंध लगाए गए, जिससे दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों के बीच बनी सहमति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
वैश्विक व्यापार व्यवस्था को नुकसान का दावा
चीन ने कहा कि अमेरिका के इस तरह के कदम केवल द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था और वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता भी बढ़ाते हैं। बीजिंग ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह चीनी कंपनियों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कार्रवाई बंद करे और निष्पक्ष तथा पारदर्शी व्यापारिक माहौल बनाए रखने के लिए कदम उठाए।
तनाव के बीच जारी है चीन-अमेरिका आर्थिक टकराव
शिनच्यांग से जुड़े मुद्दों को लेकर चीन और अमेरिका के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि वह जबरन श्रम रोकने के लिए कदम उठा रहा है, जबकि चीन इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और आर्थिक दबाव की रणनीति बताता रहा है। ताजा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दोनों देश व्यापारिक रिश्तों में स्थिरता लाने के लिए बातचीत जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि नए प्रतिबंधों ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच भरोसे की चुनौती को बढ़ा दिया है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)