अमेरिकी मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच दिल्ली पहुंचेंगे, व्यापार समझौते पर नई शुरुआत की उम्मीद
नई दिल्ली। India US Trade Pact: ट्रंप की ओर से ‘दोस्ती’ वाले बड़े दांव के बीच मसना जा रहा है कि ट्रेड डील पर अब बात बनने की संभावना है। दरअसल ऐसा इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है क्योंकि अमेरिका के मुख्य व्यापार वार्ताकार ब्रेंडन लिंच इस समय भारत आने वाले हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिका की ओर से लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ पर क्या इस वार्ता में कोई निर्णय होगा।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में छाए तनाव के बीच अब दोनों देश एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौटने जा रहे हैं। अमेरिका के मुख्य व्यापार वार्ताकार ब्रेंडन लिंच नई दिल्ली पहुंचेंगे। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह बैठक प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में अहम मानी जा रही है।
क्यों अटकी थी बातचीत?
अब तक दोनों देशों के बीच पांच दौर की वार्ता हो चुकी है। छठा दौर 25 से 29 अगस्त के बीच होना था, लेकिन अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने के फैसले के बाद इसे टालना पड़ा।
भारत ने इन टैरिफ को अनुचित करार दिया।
अमेरिकी फैसले से भारतीय निर्यात पर सीधा असर पड़ा। समझौते का पहला चरण, जिसे 2025 की शरद ऋतु (अक्टूबर-नवंबर) तक पूरा करना था, अब अटक गया है।
मंगलवार की बातचीत क्यों अहम?
मंगलवार को होने वाली यह मुलाकात छठे दौर से पहले की तैयारी मानी जा रही है। अधिकारी के मुताबिक, इसका मकसद दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और अगले दौर की रणनीति तय करना है।
ब्रेंडन लिंच की भूमिका
ब्रेंडन लिंच अमेरिका के सहायक व्यापार प्रतिनिधि (दक्षिण और पश्चिम एशिया) हैं। वे एशिया के 15 देशों के साथ अमेरिका की व्यापार नीति तैयार करने और उसे लागू करने की जिम्मेदारी संभालते हैं। भारत-अमेरिका व्यापार नीति मंच (TPF) के प्रबंधन और क्षेत्रीय भागीदारी समझौतों के समन्वय में भी उनकी बड़ी भूमिका है।
भारत की स्थिति
भारत का कहना है कि अमेरिका द्वारा अचानक और ऊंचे टैरिफ लगाने से भारतीय निर्यातक बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। भारत ने इसे WTO नियमों के खिलाफ और “अनुचित” बताया है। सरकार चाहती है कि व्यापार समझौते में समानता और पारस्परिक लाभ के आधार पर आगे बढ़ा जाए। भारत और अमेरिका दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से यह बातचीत बेहद अहम है। जहां अमेरिका अपने घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए टैरिफ का सहारा ले रहा है, वहीं भारत खुले और निष्पक्ष व्यापार की वकालत कर रहा है। अब देखना यह होगा कि ब्रेंडन लिंच की दिल्ली यात्रा व्यापार समझौते को नई राह देती है या फिर दोनों देशों के बीच खिंची रेखाएं और गहरी हो जाती हैं। (प्रकाश कुमार पांडेय)