डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच व्यापारिक संगठन अब यूपीआई के साथ बैंकिंग ऐप और इंटरनेट बैंकिंग को भी बड़े भुगतान के विकल्प के तौर पर आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। बैंकों के मोबाइल ऐप में पहले से ही IMPS, NEFT और RTGS जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनके जरिए जरूरत के अनुसार बड़ी रकम ट्रांसफर की जा सकती है। हालांकि, किसी नए लाभार्थी का बैंक खाता जोड़ने के बाद आमतौर पर चार घंटे का कूलिंग पीरियड लागू होता है। व्यापारियों का कहना है कि अगर इस प्रक्रिया को आसान और तेज किया जाए तो बड़े लेनदेन के लिए बैंकिंग माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ सकता है और यूपीआई पर शुल्क से जुड़ी समस्या का भी एक विकल्प तैयार हो सकता है।
बैंकिंग ऐप में मौजूद हैं बड़े भुगतान के कई विकल्प, कारोबारी जरूरत के अनुसार बढ़वा सकते हैं लेनदेन सीमा
देश के राष्ट्रीयकृत बैंकों के मोबाइल ऐप पर बैंकिंग और भुगतान से जुड़ी कई सेवाएं उपलब्ध हैं। इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से ग्राहक IMPS, NEFT और RTGS का इस्तेमाल कर सकते हैं। खास तौर पर बड़ी रकम के भुगतान के लिए इन माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है। व्यापारियों को जरूरत के अनुसार अपने बैंक से लेनदेन की सीमा बढ़वाने की सुविधा भी मिलती है। इससे बड़े व्यापारिक भुगतान को बैंकिंग नेटवर्क के जरिए पूरा किया जा सकता है।
नए लाभार्थी को जोड़ने में चार घंटे का इंतजार व्यापारियों के लिए बन रहा मुख्य सवाल
बैंकिंग ऐप से किसी दूसरे व्यक्ति या कारोबारी को भुगतान करने के लिए पहले उसके खाते को लाभार्थी के तौर पर जोड़ना पड़ता है। मौजूदा व्यवस्था में बैंक आम तौर पर नए लाभार्थी के लिए करीब चार घंटे का कूलिंग पीरियड रखते हैं। इस अवधि के पूरा होने के बाद ही नियमित लेनदेन शुरू हो पाता है। व्यापारिक संगठनों की मांग है कि इस प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाया जाए, ताकि जरूरी भुगतान के लिए कारोबारियों को लंबे इंतजार की स्थिति का सामना न करना पड़े।
बिना नया लाभार्थी जोड़े क्विक ट्रांसफर की सुविधा भी मौजूद, लेकिन खुदरा बाजार में इस्तेमाल सीमित
कुछ बैंक इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग के जरिए बिना नया लाभार्थी जोड़े सीमित राशि तक क्विक ट्रांसफर की सुविधा देते हैं। IMPS के तहत इस माध्यम से करीब 2 लाख रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है। थोक कारोबार से जुड़े व्यापारी इस सुविधा का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन फुटकर बाजार में इसका उपयोग अभी ज्यादा नहीं है। इसका एक कारण यूपीआई की आसान और तेज भुगतान प्रक्रिया भी मानी जा सकती है।
QR कोड के कारण छोटे कारोबारियों के लिए UPI अब भी बेहद आसान भुगतान माध्यम बना हुआ है
खुदरा कारोबार में यूपीआई की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसकी सरल प्रक्रिया है। ग्राहक या व्यापारी QR कोड स्कैन करके सीधे भुगतान कर सकता है। इससे बैंक खाता नंबर और दूसरी बैंकिंग जानकारी बार-बार दर्ज करने की जरूरत कम हो जाती है। इसी वजह से छोटे और रोजाना होने वाले भुगतान में यूपीआई का इस्तेमाल काफी सुविधाजनक बना हुआ है। व्यापारिक संगठन अब चाहते हैं कि बैंकिंग व्यवस्था को भी इतना तेज बनाया जाए कि बड़े भुगतानों में इसका इस्तेमाल आसानी से बढ़ सके।
व्यापारियों की मांग है कि बैंकिंग व्यवस्था में बदलाव से भुगतान के विकल्प बढ़ें और कारोबार पर असर कम हो
व्यापारी संगठनों का कहना है कि बैंकिंग ऐप और इंटरनेट बैंकिंग की मौजूदा सुविधाओं को अधिक तेज और व्यावहारिक बनाया जाए। खास तौर पर नए लाभार्थी को जोड़ने की प्रक्रिया में लगने वाले चार घंटे के समय को कम करने की मांग की जा रही है। उनका मानना है कि इससे बड़े भुगतान के लिए बैंकिंग माध्यमों का उपयोग बढ़ सकता है और यूपीआई से जुड़े शुल्क के मुद्दे का वैकल्पिक समाधान भी मिल सकता है। साथ ही व्यापारिक लेनदेन की गति बनाए रखने में मदद मिलेगी।