यूपी बनेगा मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब…रंग लाई सीएम योगी की पहल

UP global hub medical device manufacturing

यूपी बनेगा मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब

YEIDA मेडिकल डिवाइस पार्क में 101 प्लॉट्स का आवंटन, कई इकाइयों ने शुरू किया निर्माण

लखनऊ/ग्रेटर नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक पहचान की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के सेक्टर-28 में विकसित 350 एकड़ का मेडिकल डिवाइस पार्क अब महज़ एक योजना नहीं, बल्कि धरातल पर उतरता एक सशक्त औद्योगिक इकोसिस्टम बन चुका है।

इस पार्क में अब तक 101 से अधिक औद्योगिक प्लॉट्स का आवंटन हो चुका है, जबकि कई कंपनियों ने उत्पादन इकाइयों के निर्माण का कार्य भी शुरू कर दिया है। आने वाले समय में यहां मेडिकल इक्विपमेंट और डिवाइस का बड़े पैमाने पर निर्माण शुरू होने की उम्मीद है।

निवेशकों का बढ़ता भरोसा

मेडिकल डिवाइस सेक्टर में यूपी सरकार की नीतियों और पारदर्शी सिंगल विंडो सिस्टम का असर साफ नजर आ रहा है। YEIDA क्षेत्र में कुल 188.15 एकड़ औद्योगिक भूमि पर 203 प्लॉट्स विकसित किए गए हैं, जिनमें से आधे से अधिक का आवंटन हो चुका है।
अब तक 85 निवेशकों ने लीज प्लान जमा कर दिए हैं, जबकि 62 लीज डीड निष्पादित हो चुकी हैं। यह आंकड़े प्रदेश में निवेश के प्रति बढ़ते विश्वास को दर्शाते हैं।

आधुनिक इंडस्ट्रियल क्लस्टर के रूप में विकास

YEIDA इस मेडिकल डिवाइस पार्क को केवल फैक्ट्रियों के समूह के तौर पर नहीं, बल्कि एक आधुनिक और सुव्यवस्थित इंडस्ट्रियल क्लस्टर के रूप में विकसित कर रहा है। पार्क में आधारभूत सुविधाओं के साथ पर्यावरण संतुलन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

भूमि उपयोग का विवरण:

नए निवेशकों के लिए फिर खुला मौका

मेडिकल डिवाइस मैन्युफैक्चरिंग में निवेश के इच्छुक उद्यमियों के लिए YEIDA ने 12 जनवरी 2026 से नए आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस चरण में 22 नए प्लॉट्स प्रस्तावित किए गए हैं, जिनका आकार 1000 से 5940 वर्गमीटर तक है।
इच्छुक निवेशक 11 फरवरी 2026 तक आवेदन कर सकते हैं।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि YEIDA की रणनीतिक लोकेशन और प्रस्तावित जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की निकटता इस मेडिकल डिवाइस पार्क को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी। यह परियोजना न केवल मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम करेगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी नई मजबूती देगी।

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