UP Rajya Sabha Election: यूपी राज्यसभा चुनाव में अखिलेश का बड़ा दांव! धनराज नथवानी को टिकट देने के पीछे क्या है रणनीति?

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर 16 अक्टूबर 2026 को चुनाव होना है। चुनाव की तारीख सामने आते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। विधानसभा में मौजूदा संख्या के हिसाब से बीजेपी के 7 और समाजवादी पार्टी के 2 उम्मीदवारों के जीतने की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। असली मुकाबला 10वीं सीट को लेकर है, क्योंकि एक सीट के लिए करीब 37 विधायकों के वोट की जरूरत होती है। इसी वजह से पार्टियां अपने अतिरिक्त वोटों और दूसरे दलों के विधायकों के समर्थन को लेकर रणनीति बना रही हैं।

यूपी की 10 सीटों पर क्यों घमासान?

राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर को होगा। बीजेपी के पास अपने गठबंधन के साथ पर्याप्त विधायक हैं, जबकि सपा दो सीटों के लिए अपनी स्थिति मजबूत कर चुकी है। तीसरी सीट के लिए सपा को अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा। ऐसे में 10वीं सीट चुनाव का सबसे अहम हिस्सा बन गई है।

किस पार्टी के खाते में कितनी सीट?

मौजूदा विधानसभा गणित के आधार पर बीजेपी के 7 और सपा के 2 सीटें हासिल करने की स्थिति में हैं। इसके बाद बचने वाली 10वीं सीट के लिए मुकाबला होगा। सपा ने इसी गणित को ध्यान में रखते हुए दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।

सपा ने धनराज नथवानी को उतारा

अखिलेश यादव ने वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया। धनराज नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं।

धनराज और परिमल का रिलायंस कनेक्शन

धनराज नथवानी, राज्यसभा सांसद और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी परिमल नथवानी के बेटे हैं। धनराज का रिलायंस से कारोबारी जुड़ाव है, जबकि उनके पिता भी कंपनी में कॉरपोरेट अफेयर्स से जुड़े रहे हैं। परिमल नथवानी को जून 2026 में NDA के समर्थन से झारखंड से राज्यसभा में एक और कार्यकाल मिला था।

क्या पार्टी फंड भी वजह है?

धनराज की उम्मीदवारी के बाद राजनीतिक हलकों में इसके पीछे कारोबारी और वित्तीय संपर्कों को लेकर चर्चा शुरू हुई है। कुछ रिपोर्टों में इसे सपा की कॉरपोरेट और उद्योग जगत तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा गया है। हालांकि, पार्टी ने धनराज को उम्मीदवार बनाने के पीछे पार्टी फंड को आधिकारिक वजह नहीं बताया है। इसलिए इसे फिलहाल राजनीतिक अटकल के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

बीजेपी और कांग्रेस से कनेक्शन?

धनराज के गुजरात में राजनीतिक और संस्थागत संपर्क भी चर्चा में हैं। वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं और उनके पिता को अतीत में बीजेपी समर्थित समर्थन मिला है। इसी वजह से यह सवाल भी उठ रहा है कि सपा का यह फैसला अलग-अलग राजनीतिक और कारोबारी नेटवर्क तक पहुंच बनाने की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि बीजेपी या कांग्रेस को साधने के मकसद की सपा ने कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सपा को क्या फायदा हो सकता है?

सपा के लिए धनराज की उम्मीदवारी का एक संभावित फायदा यह है कि पार्टी को कारोबारी और उद्योग जगत में अपनी पहुंच बढ़ाने का मौका मिल सकता है। चुनावी गणित में भी तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त वोट जुटाने की कोशिश महत्वपूर्ण होगी। सपा नेताओं ने कुछ बीजेपी विधायकों में संभावित असंतोष का हवाला देते हुए क्रॉस-वोटिंग की संभावना की बात कही है, लेकिन इसका परिणाम चुनाव में ही स्पष्ट होगा।

 

 

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