Delhi-NCR Pollution Control: यूपी सरकार का सख्त कदम — 1 नवंबर 2026 से पुराने वाहनों पर बैन, प्रदूषण रोकने के लिए एक्शन मोड में प्रशासन
Greater Noida News: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रण में लाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि 1 नवंबर 2026 से गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ जिलों में 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल वाहनों के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होगा। यह कदम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को देखते हुए उठाया गया है।
- यूपी सरकार का बड़ा पर्यावरण फैसला
- 2026 से पुराने वाहन होंगे बैन
- चार जिलों में लागू होगा प्रतिबंध
- डीजल-पेट्रोल गाड़ियों पर सख्त कार्रवाई
- ग्रेटर नोएडा में हुई उच्चस्तरीय बैठक
- 2,500 से ज्यादा वाहन अब तक जब्त
- प्रदूषण हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष निगरानी
- वाटर स्प्रिंकलर, एंटी-स्मॉग गन सक्रिय
- औद्योगिक इकाइयों को चेतावनी जारी
- जनता से स्वच्छ हवा अभियान में सहयोग
पुराने वाहनों पर लगेगा प्रतिबंध
सरकार का यह आदेश सीधे तौर पर दिल्ली-एनसीआर के चार प्रमुख औद्योगिक जिलों में लागू होगा। इन जिलों में बड़ी संख्या में निजी और व्यावसायिक वाहन चल रहे हैं, जो प्रदूषण का मुख्य स्रोत माने जा रहे हैं। प्रतिबंध के बाद ऐसे वाहन सड़कों पर नहीं चल सकेंगे, साथ ही जिनके पास ऐसे वाहन हैं, उन्हें या तो स्क्रैपिंग के लिए भेजना होगा या एनओसी लेकर दूसरे राज्यों में ट्रांसफर करना होगा।
ग्रेटर नोएडा में हुई उच्चस्तरीय बैठक
यह फैसला शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रदेश सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने की। बैठक में प्रमुख सचिव अनिल कुमार और यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के चेयरमैन डॉ. आर.पी. सिंह भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार दिल्ली-एनसीआर के वायु गुणवत्ता मानकों को सुधारने के लिए सख्त मॉनिटरिंग कर रही है।
अब तक 2,552 वाहन जब्त, 20,075 को मिली एनओसी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि साल 2023 से अब तक 2,552 पुराने वाहनों को जब्त किया गया है, जबकि 20,075 वाहनों को एनओसी जारी की गई है ताकि वे दूसरे राज्यों में ट्रांसफर हो सकें। अधिकारियों ने बताया कि अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और 2026 तक सड़कों से सभी पुराने डीजल-पेट्रोल वाहन हटाने का लक्ष्य रखा गया है।
चार जिलों में चिन्हित किए गए प्रदूषण हॉटस्पॉट
राज्य सरकार की ओर से प्रदूषण नियंत्रण के लिए जिलों में हॉटस्पॉट क्षेत्र भी चिन्हित किए गए हैं। गौतमबुद्ध नगर में 7 हॉटस्पॉट, गाजियाबाद और बुलंदशहर में 5-5 हॉटस्पॉट, जबकि हापुड़ में 2 हॉटस्पॉट दर्ज किए गए हैं। इन इलाकों में वायु गुणवत्ता लगातार “बहुत खराब” (Very Poor) श्रेणी में पाई जा रही है, जिसके चलते यहां विशेष कार्रवाई की जा रही है।
वायु शुद्धि के लिए वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन
प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए जिलेवार उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। गौतमबुद्ध नगर में 224 वाटर स्प्रिंकलर और 94 एंटी-स्मॉग गन सक्रिय हैं। गाजियाबाद में 41 वाटर स्प्रिंकलर और 107 एंटी-स्मॉग गन का संचालन किया जा रहा है। बुलंदशहर में 59 स्प्रिंकलर और 5 एंटी-स्मॉग गन, जबकि हापुड़ में 3-3 स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गन लगाए गए हैं। इनकी मदद से सड़कों पर जमा धूल और निर्माण कार्यों से उड़ने वाले कणों को कम किया जा रहा है। बैठक में राज्य मंत्री डॉ. अरुण सक्सेना ने बताया कि इस साल दीपावली के बाद पिछले वर्षों की तुलना में प्रदूषण स्तर में गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि पुराने वाहनों से निकलने वाले धुएं, कूड़ा जलाने और सड़क की धूल को रोकने के लिए प्रशासन ने विशेष रणनीति तैयार की है। सक्सेना ने कहा, “सरकार का लक्ष्य है कि एनसीआर में प्रदूषण का स्तर धीरे-धीरे नियंत्रित श्रेणी में लाया जाए। इसके लिए पुराने वाहनों पर बैन के साथ-साथ हर जिले में वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र सक्रिय रखे जा रहे हैं।”
1,100 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई
2025 में अब तक 1,100 से अधिक पुराने वाहनों पर कार्रवाई की जा चुकी है। प्रशासन की ओर से सभी जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वे बिना रजिस्ट्रेशन, बिना फिटनेस सर्टिफिकेट और तय सीमा से अधिक पुराने वाहनों को सख्ती से जब्त करें। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में यातायात पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसी के साथ ऑनलाइन डेटाबेस के जरिए यह भी देखा जा रहा है कि किन वाहनों की उम्र 10 या 15 वर्ष से अधिक हो चुकी है।
प्रदूषण के कारण और उपाय
दिल्ली-एनसीआर में इस समय हवा की गुणवत्ता लगातार “Very Poor” श्रेणी में है। प्रमुख कारणों में शामिल हैं पुराने वाहनों का धुआं,निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल खेतों में पराली जलाना और मौसम में नमी के कारण हवा का स्थिर होना। इन सभी कारणों को ध्यान में रखते हुए यूपी सरकार ने क्लीन एयर एक्शन प्लान के तहत नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें सड़क की सफाई, कूड़ा न जलाने पर सख्ती, वाहनों की फिटनेस जांच, और ट्रैफिक जाम कम करने के लिए वैकल्पिक रूट तय करने के प्रावधान हैं।
औद्योगिक इकाइयों पर भी निगरानी
सरकार ने एनसीआर में चल रही औद्योगिक इकाइयों को भी चेतावनी दी है कि वे केवल “ग्रीन फ्यूल” का प्रयोग करें। जिन इकाइयों में कोयला या अन्य प्रदूषक ईंधन का उपयोग पाया जाएगा, उन पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने औद्योगिक क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के लिए विशेष टीमें गठित की हैं।
योगी सरकार की अपील
प्रदेश सरकार ने जनता से अपील की है कि वे सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा उपयोग करें और निजी वाहनों को साझा (Car Pooling) में चलाएं। साथ ही जिन लोगों के पास पुराने वाहन हैं, वे स्वेच्छा से उन्हें स्क्रैपिंग सेंटर में जमा करें।राज्य मंत्री ने कहा, “प्रदूषण रोकना केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। हर नागरिक का योगदान जरूरी है, तभी हम स्वच्छ और स्वस्थ उत्तर प्रदेश बना सकेंगे।” दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण रोकने के लिए यूपी सरकार का यह फैसला ऐतिहासिक माना जा रहा है। 1 नवंबर 2026 से पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लागू होने के बाद क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है। सरकार का फोकस अब “स्वच्छ हवा और हरित परिवहन” के लक्ष्य पर है, जिससे आने वाले वर्षों में एनसीआर को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सके। (प्रकाश कुमार पांडेय)





