उत्तर प्रदेश बनेगा डेटा इकॉनमी का हब, योगी सरकार की नई नीति से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को इस तरह मिलेगी रफ्तार

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उत्तर प्रदेश बनेगा डेटा इकॉनमी का हब….योगी सरकार की नई नीति से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी रफ्तार

उत्तर प्रदेश को देश की डेटा इकॉनमी की राजधानी बनाने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है। प्रदेश सरकार ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और आईटी क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए डेटा सेंटर सेक्टर पर विशेष फोकस किया है। नई डेटा सेंटर नीति और हालिया घोषणाओं के बाद राज्य में इस क्षेत्र में निवेश और विकास की रफ्तार तेज होती दिखाई दे रही है।

लखनऊ में आयोजित बजट सत्र के दौरान सरकार ने राज्य में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने और स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी के गठन की घोषणा की थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य डेटा सेंटर उद्योग को संस्थागत समर्थन देना, निवेश प्रक्रिया को आसान बनाना और डिजिटल सेवाओं के लिए मजबूत आधार तैयार करना है। सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

2030 तक बड़ा लक्ष्य

योगी सरकार ने वर्ष 2030 तक प्रदेश में 4 से 5 बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इन क्लस्टरों की कुल क्षमता करीब 5 गीगावाट तक होगी। यह लक्ष्य उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख डेटा स्टोरेज और क्लाउड सेवा केंद्रों में शामिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। डिजिटल युग में डेटा का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। ऑनलाइन सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही केंद्र सरकार की डेटा लोकलाइजेशन नीति के कारण भी देश के भीतर डेटा स्टोरेज की आवश्यकता बढ़ रही है, जिससे डेटा सेंटर उद्योग का महत्व और अधिक बढ़ गया है।

30 हजार करोड़ के निवेश की योजना

प्रदेश सरकार की योजना के अनुसार उत्तर प्रदेश में लगभग 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से 8 डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जाएंगे। इन पार्कों की कुल क्षमता करीब 900 मेगावाट होगी। सरकार की ओर से इस दिशा में कई कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। अब तक 8 परियोजनाओं को लेटर ऑफ कंफर्ट जारी किया जा चुका है, जिनमें 6 डेटा सेंटर पार्क और 2 डेटा सेंटर इकाइयां शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से करीब 21,342 करोड़ रुपये के निवेश और 644 मेगावाट की क्षमता सुनिश्चित हो चुकी है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि उत्तर प्रदेश में डेटा सेंटर उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है और कई बड़ी तकनीकी कंपनियां यहां निवेश करने में रुचि दिखा रही हैं।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती

विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा सेंटर उद्योग का विस्तार केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे पूरे डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी। आईटी विशेषज्ञ प्रदीप यादव के अनुसार, डेटा सेंटर की स्थापना से क्लाउड सेवाओं, नेटवर्किंग, साइबर सिक्योरिटी, आईटी सर्विसेज और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे। रोजगार के अवसर भी बड़ी संख्या मेंउपलब्ध होंगे। डेटा सेंटर के आसपास आईटी कंपनियां, स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी आधारित सेवाएं विकसित होती हैं। इससे स्थानीय स्तर पर तकनीकी प्रतिभा को भी काम करने के नए अवसर मिलते हैं।

रोजगार के नए अवसर

सरकार का मानना है कि डेटा सेंटर क्लस्टर के विकास से प्रदेश में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। डेटा सेंटर के निर्माण, संचालन और रखरखाव में बड़ी संख्या में तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और आईटी पेशेवरों की जरूरत होती है। इसके अलावा इन परियोजनाओं के कारण आसपास के क्षेत्रों में सहायक उद्योगों और सेवाओं का भी विकास होगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा।

2017 के बाद तेजी से बदली स्थिति

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में डेटा सेंटर के क्षेत्र में कोई विशेष प्रगति नहीं हुई थी। उस समय प्रदेश में इस तरह की परियोजनाएं लगभग न के बराबर थीं। लेकिन योगी आदित्यनाथ सरकार के सत्ता में आने के बाद स्थिति तेजी से बदली है। सरकार ने निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीति आधारित प्रोत्साहन, बेहतर कनेक्टिविटी और निवेश अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी कंपनियों ने उत्तर प्रदेश में डेटा सेंटर स्थापित करने की योजना बनाई है और कई परियोजनाएं निर्माण या प्रस्तावित चरण में हैं।

स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी का गठन

सरकार ने डेटा सेंटर उद्योग के बेहतर संचालन और निगरानी के लिए स्टेट डेटा सेंटर अथॉरिटी बनाने की भी घोषणा की है। इस संस्था के गठन से निवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही डेटा सेंटर से जुड़ी परियोजनाओं के लिए एक स्पष्ट प्रशासनिक ढांचा तैयार होगा, जिससे कंपनियों को अनुमति और अन्य प्रक्रियाओं में आसानी होगी।

भविष्य की दिशा

डिजिटल अर्थव्यवस्था के बढ़ते महत्व को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार इस क्षेत्र में दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। डेटा सेंटर क्लस्टर, मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश अनुकूल माहौल के जरिए प्रदेश को तकनीकी विकास का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिश की जा रही है। अगर यह योजना सफल होती है तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश न केवल उत्तर भारत बल्कि पूरे देश की डेटा इकॉनमी का प्रमुख केंद्र बन सकता है। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने के साथ ही युवाओं के लिए रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर भी खुलेंगे।

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