UP Board Exam 2026: सख्त OMR नियमों के साथ छात्रों को बड़ी राहत, जानें पूरी तैयारी और अहम दिशा-निर्देश
OMR शीट: एक गलती और परीक्षा रद्द
साल 2023 से लागू व्यवस्था के तहत हाईस्कूल परीक्षा में 70 अंकों के प्रश्नपत्र में से 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न OMR शीट पर हल करने होते हैं। शेष 50 अंक पारंपरिक तरीके से उत्तर पुस्तिका में लिखित उत्तर देकर प्राप्त किए जाते हैं। छात्रों को OMR शीट पर सही विकल्प के सामने बने गोले को नीले या काले बॉल पेन से सावधानीपूर्वक भरना होगा। किसी भी प्रकार की कटिंग, ओवरराइटिंग, इरेजर या करेक्शन फ्लूइड का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। ऐसा पाए जाने पर परीक्षा निरस्त की जा सकती है।
बोर्ड ने सुविधा के लिए इस बार OMR शीट पर परीक्षार्थी का रोल नंबर और विषय पहले से ही मुद्रित रखने की व्यवस्था की है, जिससे क्लेरिकल त्रुटियों की संभावना कम हो सके। फिर भी छात्रों को प्रश्नपत्र की सीरीज सावधानी से भरने की हिदायत दी गई है। यदि कोई छात्र OMR शीट खराब कर देता है, तो उसे “ऑरेंज OMR शीट” दी जाएगी। लेकिन इस स्थिति में उसे सभी विवरण—रोल नंबर, विषय आदि—खुद भरने होंगे। परीक्षा कक्ष निरीक्षकों को OMR शीट के विवरणों का मिलान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
डुप्लीकेट व्यवस्था और सुरक्षा उपाय
नकल या छेड़छाड़ रोकने के लिए बोर्ड ने OMR शीट में काउंटर-फॉयल सिस्टम लागू किया है। प्रत्येक OMR शीट दो भागों में होगी—मुख्य शीट और निचला काउंटर फॉयल। परीक्षा समाप्त होने के बाद दोनों भागों को अलग-अलग लिफाफों में सील किया जाएगा। यह व्यवस्था पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
एडमिट कार्ड भूल गए? मिलेगी सशर्त अनुमति
छात्रों को बड़ी राहत देते हुए बोर्ड ने यह प्रावधान किया है कि यदि कोई परीक्षार्थी जल्दबाजी में एडमिट कार्ड लाना भूल जाता है, तो उसे अस्थायी रूप से परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि शर्त यह है कि वह अगले पेपर में मूल या डुप्लीकेट प्रवेश पत्र प्रस्तुत करेगा। ऐसा न करने पर उसे आगे की परीक्षाओं से वंचित किया जा सकता है।
देरी से आने वाले छात्रों को भी 30 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा, बशर्ते वे उचित कारण प्रस्तुत करें। प्रवेश पत्र में नाम, लिंग या पहचान से संबंधित त्रुटियां पाए जाने पर अन्य दस्तावेजों से सत्यापन कर परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी। दिव्यांग छात्रों को 20 मिनट का अतिरिक्त समय मिलेगा। बहुमंजिला परीक्षा केंद्रों में उनके लिए भूतल पर विशेष व्यवस्था की जाएगी।
शिक्षकों की ड्यूटी और प्रशासनिक तैयारी
सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को परीक्षा संचालन के लिए 20 अनिवार्य ड्यूटी शिफ्ट सौंपी गई हैं। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, सख्त तलाशी और उड़नदस्ता टीमों की तैनाती सुनिश्चित की गई है।
प्रैक्टिकल परीक्षा में चूके छात्रों को दूसरा मौका
इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षाओं के दौरान 4,372 छात्र किसी न किसी कारणवश परीक्षा नहीं दे सके। इनमें कुछ छात्र अनुपस्थित रहे, तो कुछ परीक्षक की अनुपस्थिति के कारण वंचित रह गए।
बोर्ड ने घोषणा की है कि 12 मार्च को लिखित परीक्षाएं समाप्त होने के बाद इन छात्रों को पुनः अवसर दिया जाएगा। बीमारी या अन्य वास्तविक कारणों से प्रैक्टिकल नहीं दे पाने वाले छात्रों को कुल दो मौके मिलेंगे।
परीक्षा से पहले विशेष मार्गदर्शन सत्र
परीक्षा पूर्व तनाव को कम करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने यूट्यूब के माध्यम से ऑनलाइन मार्गदर्शन सत्र आयोजित किया। इसमें अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और परिषद सचिव भगवती सिंह ने छात्रों के सवालों के जवाब दिए। अधिकारियों ने छात्रों को सलाह दी कि वे केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रस्तुति की कला पर भी ध्यान दें। पहले उन प्रश्नों को हल करें जिनमें अधिक आत्मविश्वास हो। उत्तर में उपशीर्षक, मुख्य बिंदु और आवश्यकतानुसार ग्राफ व आरेख अवश्य बनाएं। समय प्रबंधन को सफलता की कुंजी बताया गया। परीक्षा के अंत में कम से कम पांच मिनट उत्तरों की समीक्षा के लिए अवश्य रखें।
मानसिक दबाव से जूझते छात्र
परीक्षा के नजदीक आते ही मानसिक दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। प्रदेश भर से छात्र मनोविज्ञान विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-180-5311 पर संपर्क कर रहे हैं। कुछ छात्र सोशल मीडिया और मोबाइल के कारण पढ़ाई में व्यवधान की शिकायत कर रहे हैं, तो कुछ घबराहट, तेज धड़कन और एकाग्रता की कमी की समस्या साझा कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने अभिभावकों से सहयोगात्मक वातावरण देने और अनावश्यक दबाव न बनाने की अपील की है। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नियमित समय सारिणी बनाएं, मोबाइल से दूरी रखें, योग और ध्यान का अभ्यास करें तथा सकारात्मक सोच विकसित करें।
परिणाम से अधिक महत्वपूर्ण है प्रयास
बोर्ड अधिकारियों का स्पष्ट संदेश है कि परीक्षा जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण चरण मात्र है। अंक महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वे किसी छात्र की संपूर्ण क्षमता का निर्धारण नहीं करते। जैसे-जैसे फरवरी की ठंडक के बीच परीक्षा का माहौल गर्म हो रहा है, वैसे-वैसे लाखों परिवारों में उत्सुकता और चिंता दोनों दिखाई दे रही है। सख्त OMR नियम, पारदर्शी व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं के संतुलन के साथ UP बोर्ड परीक्षा 2026 अनुशासन और सहानुभूति—दोनों का उदाहरण पेश करने की तैयारी में है।