यूपी एटीएस का बड़ा खुलासा… तुफैल कर रहा था ISI के लिए इन युवाओं को तैयार… ‘उम्मीद-ए-शहर’ के निशाने पर थे कई शहरों के युवक
उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड UP ATS ने वाराणसी से पकड़े गए एक संदिग्ध तुफैल को लेकर बड़ा खुलासा किया है। जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसाओं में हलचल मच गई है। पूछताछ में तुफैल ने स्वीकार किया है कि वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के निर्देशों पर एक संगठित साइबर नेटवर्क चला रहा था। जिसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलना और देश के खिलाफ साजिश रचना था।
क्या थी साज़िश?
युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करना
भारत विरोधी विचारधारा फैलाना
संभावित आतंकी स्लीपर सेल तैयार करना
संवेदनशील जानकारियाँ एकत्र करना और विदेश भेजना
एटीएस की कार्रवाई
तुफैल को हिरासत में लेकर कई स्तर की पूछताछ की जा रही है।
उसके मोबाइल, चैट लॉग, बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स की गहराई से जांच की जा रही है।
फर्जी सिम कार्ड सप्लाई करने वालों की भी तलाश जारी है।
अन्य वॉट्सएप ग्रुप के सदस्यों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है।
तुफैल और ISI नेटवर्क – अब तक का बड़ा खुलासा
‘उम्मीद-ए-शहर’ वॉट्सएप ग्रुप का जाल
तुफैल ने स्वीकार किया है कि उसने ‘उम्मीद-ए-शहर’ नाम से आठ वॉट्सएप ग्रुप बनाए।
इन ग्रुप्स में वाराणसी, आज़मगढ़, कानपुर, कन्नौज, रामपुर, मुरादाबाद और बरेली के कई युवा जोड़े गए थे।
इन ग्रुप्स में एक पाकिस्तानी हैंडलर भी शामिल था, जो भारत में षड्यंत्र रच रहा था।
‘उम्मीद-ए-शहर’ वॉट्सएप ग्रुप से युवाओं को जोड़ने की चाल
UP ATS की पूछताछ के दौरान सामने आया कि तुफैल ने ‘उम्मीद-ए-शहर’ नामक आठ वॉट्सएप ग्रुप बनाए थे। इन ग्रुप्स के माध्यम से वह वाराणसी, आजमगढ़, कानपुर, कन्नौज, रामपुर, मुरादाबाद और बरेली जैसे शहरों के युवाओं को जोड़ रहा था। इन ग्रुप्स में भारत के अंदर से सक्रिय कुछ भारतीय मोबाइल नंबरों से जुड़े ISI एजेंट भी शामिल थे, जो युवाओं को प्रभावित करने, जानकारी इकट्ठा करने और आतंकी मानसिकता फैलाने का काम कर रहे थे।
पाकिस्तानी महिला ‘नफीसा’ का नाम सामने
UP ATS की पूछताछ में तुफैल ने यह भी स्वीकार किया कि उसका संपर्क पाकिस्तान की ‘नफीसा’ नामक महिला से हुआ था, जो ISI के लिए कार्यरत थी। नफीसा ने तुफैल को एक फर्जी भारतीय सिम कार्ड दिलवाया था, जिसे नकली नाम और पते पर रजिस्टर कराया गया था। यह सिम नफीसा के मोबाइल फोन से एक्टिव किया गया था, जिससे संदेह है कि नेटवर्क का नियंत्रण पाकिस्तान से हो रहा था।
नेटवर्क का मकसद था देश में अस्थिरता फैलाना
UP ATS अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क एक बेहद सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। युवाओं को कट्टरपंथ और भारत विरोधी विचारधारा की ओर मोड़ना। फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए सिम कार्ड लेना और डिजिटल पहचान छुपाना। भारत में स्लीपर सेल तैयार करना। संवेदनशील जानकारियाँ जुटाकर ISI तक पहुँचाना।
एटीएस की सतर्कता और आगे की कार्रवाई
तुफैल के खुलासे के बाद UP ATS ने सभी आठ वॉट्सएप ग्रुप्स की जांच शुरू कर दी है। उन युवाओं की पहचान की जा रही है, जो इन ग्रुप्स में शामिल थे। फर्जी सिम कार्ड बेचने वाले नेटवर्क पर भी कार्रवाई तेज़ कर दी गई है। ‘नफीसा’ और अन्य पाकिस्तानी हैंडलरों के खिलाफ इंटरपोल नोटिस की संभावना पर भी विचार हो रहा है।
देश को जागरूक होने की ज़रूरत
यह मामला दर्शाता है कि सोशल मीडिया, डिजिटल कम्युनिकेशन और नकली दस्तावेजों के माध्यम से दुश्मन देश भारत के युवाओं को निशाना बना रहा है। ऐसे मामलों से यह साफ है कि केवल सुरक्षा एजेंसियों को नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी सतर्क और जागरूक रहने की ज़रूरत है।…(प्रकाश कुमार पांडेय)





