उज्जैन की भैरवगढ़ जेल में अनोखा नजारा…कैदियों ने साड़ी-लहंगा पहनकर किया गरबा…सलाखों के पीछे दिखा भक्ति का रंग

unique scene at Ujjain Bhairavgarh Jail

आमतौर पर जेल का नाम सुनते ही जेहन में सलाखें, सख्त पहरा और बंद जिंदगी की तस्वीर उभरती है। लेकिन मध्य प्रदेश के उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में नजारा कुछ अलग है। यहां नवरात्रि के मौके पर मां दुर्गा की आराधना हो रही है। ढोलक की थाप पर गरबा खेला जा रहा है और सबसे खास बात यह है कि पुरुष बंदी साड़ी और लहंगा पहनकर गरबा करते नजर आ रहे हैं। जेल की चारदीवारी के भीतर भक्ति, परंपरा और उत्साह का यह अनोखा संगम लोगों का ध्यान खींच रहा है।

भैरवगढ़ जेल में अनोखा गरबा उत्सव
साड़ी-लहंगे में थिरके पुरुष बंदी
जेल में गूंजे गरबा गीत, झूमे कैदी
647 बंदियों ने रखा नौ दिन का उपवास
जेल की चारदीवारी में आस्था का उत्सव
भैरवगढ़ जेल में अनोखा गरबा
सलाखों के पीछे गरबा उत्सव
साड़ी-लहंगे में थिरके पुरुष बंदी
ढोलक की थाप पर गरबा रास
पारंपरिक गीतों से भक्तिमय हुआ माहौल
पद्मावती माता मंदिर में पूजा-अर्चना
मां दुर्गा की प्रतिमाओं के सामने आराधना
बंदियों ने खुद गाए भक्ति गीत
जेल में 2,000 से अधिक बंदी
647 बंदियों ने रखा नौ दिन का उपवास
फलाहार और दूध की व्यवस्था
सेहत पर भी जेल प्रशासन का ध्यान

ये कोई आम गरबा पंडाल नहीं, बल्कि उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल है। जहां सलाखों के पीछे कदम थिरक रहे हैं। ढोलक की थाप है, डांडिया की खनक है और मां दुर्गा की भक्ति में डूबे बंदी हैं। नवरात्रि के दौरान जेल का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। यहां पुरुष बंदियों ने साड़ी और लहंगा पहनकर गरबा किया और पारंपरिक उत्सव में उत्साह के साथ हिस्सा लिया। जेल परिसर के पद्मावती माता मंदिर और दोनों प्रमुख खंडों में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमाओं के सामने पूजा-अर्चना की जा रही है। सुबह मां की आराधना होती है और शाम को महाआरती के बाद गरबा रास शुरू होता है। खास बात यह है कि बंदी किसी डिजिटल म्यूजिक सिस्टम के बजाय खुद भक्ति गीत गाते हैं और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर गरबा करते हैं। भक्ति के इन पलों में जेल की सख्त दिनचर्या के बीच उत्सव का अलग ही रंग दिखाई देता है।

नवरात्रि में आस्था का अंदाजा इस आंकड़े से भी लगाया जा सकता है। जेल में बंद दो हजार से अधिक कैदियों में से 647 बंदियों ने नौ दिन का उपवास रखा है। उपवास करने वाले बंदियों की सेहत का ध्यान रखते हुए जेल प्रशासन की ओर से चाय, दूध, केले और फलाहार की व्यवस्था की गई है। साबूदाने की खिचड़ी, मूंगफली और चिप्स जैसे खाद्य पदार्थ फलाहार में दिए जा रहे हैं। जेल अधीक्षक मनोज कुमार साहू के नेतृत्व में धार्मिक आयोजन और उपवास के दौरान बंदियों की जरूरतों का ध्यान रखा जा रहा है। इस आयोजन का एक पहलू यह भी है कि जेल में बंद लोगों को अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार पर्व मनाने का अवसर मिल रहा है। हालांकि, यह आयोजन किसी की सजा या अपराध की गंभीरता को कम नहीं करता, लेकिन सुधार और सकारात्मक गतिविधियों के लिए माहौल बनाने की कोशिश जरूर दिखाई देता है। नवरात्रि का यह उत्सव याद दिलाता है कि आस्था और परंपराएं दीवारों की मोहताज नहीं होतीं। भैरवगढ़ जेल में गरबा करते बंदियों की तस्वीरें एक अलग कहानी कहती हैं। यह कहानी है भक्ति की, सामूहिक सहभागिता की और इस उम्मीद की कि अनुशासन के साथ सकारात्मक गतिविधियां बंदियों के जीवन में बदलाव की प्रेरणा बन सकती हैं। अपराध के लिए सजा अपनी जगह है, लेकिन सुधार की संभावना को बनाए रखना भी जरूरी है। उज्जैन की भैरवगढ़ जेल में नवरात्रि के दौरान हुआ यह आयोजन इसी पहलू को सामने लाता है। सलाखों के पीछे गरबा करते बंदियों के कदम भले ही जेल परिसर में थिरके हों, लेकिन यह आयोजन आस्था, अनुशासन और सकारात्मक बदलाव की उम्मीद का संदेश देता है।

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