अधूरी ख्वाहिश, टूटता भरोसा और फिर वापसी — दिलीप कुमार की दूसरी शादी का सच
22 साल छोटी सायरा से शादी
दिलीप कुमार ने खुद से 22 वर्ष छोटी खूबसूरत अदाकारा सायरा बानो से 1966 में निकाह किया। सायरा बचपन से ही दिलीप कुमार की दीवानी थीं। उनकी मां नसीम बानो 1930-40 के दशक की मशहूर अभिनेत्री थीं और दिलीप कुमार से पारिवारिक जान-पहचान भी थी। पड़ोसी होने के कारण दोनों परिवारों में आना-जाना था।
सायरा की पढ़ाई लंदन में हुई। भारत लौटने के बाद उन्होंने जंगली से अपने करियर की शुरुआत की, जिसमें उनके साथ थे शम्मी कपूर। फिल्म सुपरहिट रही और सायरा रातों-रात स्टार बन गईं। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया और इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं। शादी के बाद सायरा ने फिल्मों से दूरी बना ली और खुद को पूरी तरह अपने पति को समर्पित कर दिया। दोनों की जोड़ी को आदर्श दंपति माना जाने लगा। लेकिन इस रिश्ते में एक अधूरापन था—औलाद की कमी।
संतान न होने की टीस
शादी के 14-15 साल बीत गए, लेकिन सायरा मां नहीं बन सकीं। यह बात दिलीप कुमार को भीतर से कचोटती रही। उनके परिवार, खासकर बहनों की इच्छा थी कि वे दूसरी शादी कर लें ताकि वंश आगे बढ़ सके। इसी दौरान उनकी मुलाकात पाकिस्तान की एक महिला आसमा रहमान (या आसमा) से हुई, जो पहले से शादीशुदा थीं और तीन बच्चों की मां थीं।
बताया जाता है कि आसमा दिलीप कुमार की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं। परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि उन्होंने अपने पहले पति से तलाक ले लिया। 1981 में दिलीप कुमार ने चुपचाप आसमा से निकाह कर लिया। यह खबर जब मीडिया में आई तो हड़कंप मच गया।
क्यों छुपाई गई दूसरी शादी?
दिलीप कुमार ने शुरुआत में इस निकाह को सार्वजनिक नहीं किया। वे लगातार इस रिश्ते से इंकार करते रहे। कारण कई बताए जाते हैं—पहला, सायरा बानो की भावनाएँ; दूसरा, समाज और मीडिया की प्रतिक्रिया; और तीसरा, उनकी सार्वजनिक छवि। उनकी छवि एक आदर्श, गंभीर और गरिमामय कलाकार की थी। ऐसे में दूसरी शादी का खुलासा उनके व्यक्तित्व पर सवाल खड़े कर सकता था। यही वजह रही कि उन्होंने इस रिश्ते को लंबे समय तक छिपाने की कोशिश की।
रिश्ता क्यों टूटा?
हालांकि यह दूसरा निकाह ज्यादा लंबा नहीं चला। करीब दो साल के भीतर ही दिलीप कुमार को एहसास हुआ कि उन्होंने जल्दबाज़ी में फैसला लिया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सायरा बानो ने जिस धैर्य और समर्पण का परिचय दिया, उसने सबको चौंका दिया। वे न तो सार्वजनिक रूप से भड़कीं, न ही पति का साथ छोड़ा। तलाक के बाद दिलीप कुमार दोबारा सायरा के पास लौट आए और जीवन के अंतिम समय तक दोनों साथ रहे। सायरा ने एक इंटरव्यू में कहा था कि “दिलीप साहब मेरी दुनिया हैं।” उन्होंने अपने रिश्ते को टूटने नहीं दिया। यही वजह है कि बाद के वर्षों में दोनों को हिंदी सिनेमा का सबसे सम्मानित दंपति माना गया।
महान कलाकार, मानवीय कमजोरियाँ
दिलीप कुमार ने मुगल-ए-आज़म, देवदास और नया दौर जैसी कालजयी फिल्मों से अभिनय की नई ऊंचाइयाँ छुईं। लेकिन उनकी निजी ज़िंदगी ने यह भी दिखाया कि बड़े से बड़ा सितारा भी इंसानी कमजोरियों से अछूता नहीं होता। उनकी दूसरी शादी का फैसला शायद संतान की चाहत और पारिवारिक दबाव का परिणाम था। मगर अंततः उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की और पहले रिश्ते को ही चुना।
यह कहानी सिर्फ एक अभिनेता की नहीं, बल्कि एक इंसान की है—जिसने शोहरत की बुलंदियों को छुआ, गलती की, उसे स्वीकार किया और फिर अपने जीवनसाथी के साथ सम्मानपूर्वक जीवन बिताया। दिलीप कुमार की दूसरी शादी का अध्याय भले ही विवादास्पद रहा हो, लेकिन इससे उनकी कलात्मक महानता कम नहीं होती। हां, यह जरूर साबित होता है कि सितारों की चमक के पीछे भी एक संवेदनशील, संघर्षरत और कभी-कभी उलझा हुआ इंसान छिपा होता है।